'भारत के लिए अमेरिका का पाखंड...', कनाडा विवाद पर क्या बोला चीनी मीडिया?

चीन की सरकार के माउथपीस कहलाने वाले ग्लोबल टाइम्स ने भारत और कनाडा के हालिया विवाद को पश्चिमी देशों खासकर अमेरिका से जोड़कर उन पर निशाना साधा है. ग्लोबल टाइम्स ने अपने ओपिनियन लेख में लिखा है कि भारत और कनाडा के बीच बढ़ता विवाद कथित अमेरिकी मूल्यों पर आधारित गठबंधनों के पाखंड (hypocrisy) को उजागर करता है.

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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो (फाइल फोटो) भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 20 सितंबर 2023,
  • अपडेटेड 2:16 PM IST

खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह हत्याकांड को लेकर कनाडाई पीएम जस्टिन ट्रूडो की टिप्पणी के बाद भारत और कनाडा के रिश्तों में तनाव चरम पर पहुंच गया है. कनाडा की संसद में बोलते हुए जस्टिन ट्रूडो ने आरोप लगाया है कि कनाडाई नागरिक हरदीप सिंह की हत्या में भारत का हाथ है. कनाडा ने भारत पर कार्रवाई करते हुए एक सीनियर डिप्लोमैट को निष्कासित कर दिया है.

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भारत ने ट्रूडो के इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. साथ ही जवाबी कार्रवाई करते हुए भारत ने भी कनाडा के एक सीनियर डिप्लोमैट को निष्कासित करते हुए पांच दिन के भीतर देश छोड़ने के लिए कहा है. दोनों देशों के हालिया विवाद पर अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया समेत कई अन्य देशों ने प्रतिक्रिया दी है. वहीं, चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने भी इस पर टिप्पणी की है. 

ग्लोबल टाइम्स ने अमेरिका पर साधा निशाना

भारत पर कनाडा के संगीन आरोप और दोनों तरफ से की गई कार्रवाई को लेकर ग्लोबल टाइम्स ने अपने ओपिनियन लेख में हेडिंग दी है, "भारत और कनाडा के बीच बढ़ता विवाद अमेरिकी मूल्यों पर आधारित गठबंधनों के पाखंड (hypocrisy) को उजागर करता है."

चीन के सरकारी अखबार ने आगे लिखा है, "पिछले कुछ वर्षों में भारत और कनाडा के बीच विवाद कनाडा में रह रहे सिख समुदाय के आसपास केंद्रित रहा है. कनाडा में रह रहे सिख मोदी सरकार का विरोध करते हैं और सिखों के अधिकारों की वकालत करते हैं.

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भारत-कनाडा संबंधों में गिरावटः ग्लोबल टाइम्स

वेबसाइट ने लिखा है, "भारत में सिख अल्पसंख्यक समुदाय है जिसकी आबादी 2 करोड़ से अधिक है. दुनिया भर में प्रवासी के रूप में रह रहे सिखों में कनाडा में सबसे ज्यादा सिख रहते हैं. कनाडा में सिख समुदाय महत्वपूर्ण राजनीतिक, वाणिज्यिक और आर्थिक प्रभाव रखता है. 

हाल के वर्षों में कनाडा में अलगाववादी खालिस्तान आंदोलन का फिर से जोर पकड़ना भारत और कनाडा के बीच विवाद का एक प्रमुख कारण बन गया है, जिससे दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है. वहीं, ट्रूडो के इन आरोपों के बाद दोनों देशों के बीच तनातनी ने भारत-कनाडा संबंधों को और खतरे में डाल दिया है."

अमेरिका का गठबंधन चीन विरोधी एजेंडे से प्रेरित

ग्लोबल टाइम्स ने आगे लिखा है कि ज्यादातर ऑब्जर्वर का मानना है कि नई दिल्ली में संपन्न हुए जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के बीच हुई मुलाकात ही दोनों देशों के रिश्तों को बयां कर रही थी. हरदीप सिंह निज्जर को लेकर अब दोनों देश आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं. एक दूसरे के राजनयिकों को निष्कासित कर रहे हैं. जिससे अमेरिकी नेतृत्व वाली तथाकथित मूल्य-आधारित गठबंधन की कमजोरी उजागर हो रही है.

पश्चिमी देशों पर निशाना साधते हुए ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, "पश्चिमी देश मानवाधिकारों के रक्षक होने का दावा करते हैं और आए दिन मानवाधिकार संबंधी मुद्दों पर दूसरे देशों की आलोचना भी करते हैं. यही देश तथाकथित भारतीय लोकतंत्र के लिए उनकी प्रशंसा करते हैं जो मुख्य रूप से भूराजनीतिक हितों और भारत को अपने चीन विरोधी एजेंडे में शामिल करने की इच्छा से प्रेरित होते हैं. जबकि पश्चिमी देश भारत के तथाकथित लोकतंत्र और उनके अपने लोकतंत्र के बीच के अंतर से अच्छी तरह परिचित हैं. पश्चिमी देशों में भी कई व्यक्ति हैं जो भारत की धार्मिक और अल्पसंख्यक नीतियों का समर्थन नहीं करते हैं."

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वर्तमान में भारत पश्चिमी देशों के लिए उपयोगी

ग्लोबल टाइम्स ने सिंघुआ विश्वविद्यालय (Tsinghua University) के राष्ट्रीय रणनीति संस्थान में अनुसंधान विभाग के निदेशक कियान फेंग (Qian Feng) के हवाले से आगे लिखा है, "पश्चिमी देश खासकर अमेरिका हाल के वर्षों में चीन को रोकने के लिए लोकतंत्र और स्वतंत्रता के सामान्य मूल्यों के तहत भारत के साथ सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. यहां तक कि चीन को रोकने के लिए पश्चिमी देश भारत में हो रहे मानवाधिकारों के हनन और घरेलू जातीय अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार पर आंख मूंदने के लिए तैयार हैं. जो उनके तथाकथित सामान्य मूल्यों के आधार पर भारत के साथ पश्चिमी गठबंधन के पाखंड को उजागर करता है.  

शंघाई इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल स्टडीज के रिसर्च फेलो झाओ गैनचेंग के हवाले से ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि ध्यान देने वाली बात यह है कि क्या पश्चिमी लोग वास्तव में भारत को अपनी तरह ही एक लोकतांत्रिक देश मानते हैं? यह सिर्फ इतना है कि फिलहाल भारत उनके लिए उपयोगी है, इसलिए वो इसका फायदा उठाते हैं. 

कनाडा के मामलों में हस्तक्षेप करना अमेरिका के लिए आसानः चीनी मीडिया

ग्लोबल टाइम्स ने आगे लिखा है, "पश्चिमी देशों के गठबंधन का एक प्रमुख सदस्य कनाडा लंबे समय से अमेरिका का सहयोगी रहा है. अमेरिका की इंडो-पैसिफिक रणनीति को भी बढ़ावा देने में कनाडा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. हालांकि, वर्तमान में भारत और अमेरिका द्वारा बनाए जा रहे गठबंधन को अक्सर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. जो इस तरह के गठबंधन बनाने के प्रयास में अमेरिका की कमजोरी को दिखाता है.

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"वहीं, अब भारत और कनाडा ने एक-दूसरे के सीनियर डिप्लोमैट को निष्कासित कर दिया है. यदि भारत और कनाडा के बीच संबंध लगातार ऐसे ही बिगड़ते रहे तो अमेरिका तुरंत मध्यस्थता का कदम उठा सकता है. आखिरकार, अमेरिका के लिए कनाडा के मामलों में हस्तक्षेप करना एक परिचित और आसान काम है."

कौन था हरदीप सिंह निज्जर? (Who was Hardeep Singh Nijjar)

खालिस्तान के लिए जनमत संग्रह करने की कोशिश करने वाली जमात में हरदीप सिंह निज्जर का नाम काफी आगे था. वह पंजाब के जालंधर जिले के भारसिंहपुर गांव का रहने वाला था. हरदीप सिंह निज्जर को भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने भगोड़ा और आतंकवादी घोषित कर रखा था. इसके अलावा, राष्ट्रीय जांच एजेंसी की ओर से निज्जर पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था.

जून 2023 में कनाडा के सरे शहर में हरदीप सिंह निज्जर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. निज्जर को सिख धार्मिक स्थल की पार्किंग में उसके ट्रक में गोली मारी गई थी. कनाडा की सुरक्षा एजेंसियों की शुरुआती जांच के मुताबिक निज्जर को दो हमालवारों ने गोली मारी थी. इस मामले में अब तक किसी भी गिरफ्तारी नहीं हुई है.

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