जमीनी लड़ाई में लंबे समय तक टिके रहने वाले चेचेन लड़ाकों की चर्चा अब ईरान जंग में हो रही है. इन लड़ाकों की एंट्री अब ईरान में हो सकती है. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सबसे भरोसेमंद माने जाने वाले चेचेन फाइटर्स ने ईरान में लड़ने के लिए ग्रीन सिग्नल दे दिया है. ईरानी सरकारी मीडिया प्रेस टीवी की रिपोर्ट के अनुसार चेचेन सैन्य इकाइयों ने घोषणा की है कि यदि अमेरिका जमीनी हमला करता है, तो वे ईरानी सशस्त्र बलों की सहायता के लिए ईरान में तैनात होने को तैयार हैं.
चेचेन विद्रोही वही हैं जिन्होंने 1990 के दशक और शुरुआती 2000 के दशक में पुतिन को तगड़ी टक्कर दी थी और रूस के लिए बड़ी चुनौती बन गए थे. दूसरे के दौरान चेचेन उग्रवादियों ने गुरिल्ला हमले, आत्मघाती विस्फोट और मॉस्को सहित कई शहरों में आतंकी कार्रवाइयां कीं. 2002 का मॉस्को थिएटर संकट और 2004 का बेसलान स्कूल हमला रूस की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर झटका बने.
हालांकि पुतिन ने इन चेचेन लड़ाकों के खिलाफ कड़ा सैन्य अभियान चलाया और चेचेन्या पर मजबूत कंट्रोल पा लिया.
अब ये चेचेन लड़ाके पुतिन के विश्वस्त सहयोगी बन गए हैं. ईरान के सरकारी टीवी प्रेस टीवी ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि अगर ईरान में अमेरिका ग्राउंड ऑपरेशन करता है तो इसका जवाब देने के लिए चेचेन लड़ाके ईरान में उतरेंगे.
रूस के चेचन गणराज्य के प्रमुख रमजान कादिरोव के प्रति वफादार ये लड़ाके इस्लामिक गणराज्य ईरान के विरुद्ध चल रहे अमेरिकी-इजरायली युद्ध को जेहाद बताते हैं.
यूक्रेन युद्ध में भी उतरे हैं चेचेन फाइटर्स
यूक्रेन युद्ध के दौरान इन लड़ाकों को शहरी युद्ध, मनोवैज्ञानिक दबाव और सोशल मीडिया प्रचार के जरिए विरोधी पक्ष पर असर डालने के लिए इस्तेमाल किया गया था. इनकी खासियत तेज़ कार्रवाई, मजहबी-वैचारिक जोश और व्यक्तिगत निष्ठा पर आधारित कमांड स्ट्रक्चर है. यही मॉडल उन्हें पारंपरिक सेना से अलग बनाता है.
ईरान के संदर्भ में चेचेन लड़ाकों की भूमिका सीधे युद्ध लड़ने से ज्यादा 'सपोर्ट और प्रॉक्सी संतुलन' बनाने की हो सकती है. रूस पहले से ही ईरान के साथ सैन्य-तकनीकी सहयोग बढ़ा चुका है. खासकर ड्रोन, एयर डिफेंस और खुफिया तालमेल के क्षेत्र में. ऐसे में अगर अमेरिका या उसके सहयोगी दबाव बढ़ाते हैं, तो चेचेन यूनिट्स को सलाहकार, सुरक्षा या सीमित ऑपरेशन सपोर्ट के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है.
रणनीतिक तौर पर यह कदम रूस के लिए दो फायदे देता है. पहला- बिना सीधे बड़े पैमाने पर सेना उतारे वह अपने सहयोगी ईरान को मजबूत संदेश दे सकता है. दूसरा- यह अमेरिका को संकेत होगा कि पश्चिम एशिया में रूस अब भी प्रभावशाली खिलाड़ी है.
बता दें कि इस जंग में रूस का प्रतिद्वंद्वी यूक्रेन गल्फ में अमेरिका के सहयोगी सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात की मदद कर रहा है. अगर चेचेन सैनिक ईरान जाते हैं तो इसे अमेरिका के खिलाफ रूस का एक और अप्रत्यक्ष कदम कहा जा सकता है.
हालांकि यह भी सच है कि चेचेन लड़ाकों की तैनाती का मतलब खुला रूस-अमेरिका सैन्य टकराव नहीं होगा. बल्कि यह 'हाइब्रिड वॉरफेयर' का हिस्सा होगा. जहां प्रत्यक्ष युद्ध से ज्यादा मनोवैज्ञानिक, राजनीतिक और सीमित सैन्य दबाव का इस्तेमाल किया जाता है.
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