कनाडा में 'अधबीच' में फंसे हजारों गगनदीप, PR की चाहत में जद्दोजहद की एक कहानी

कनाडा में रह रहे हजारों भारतीय इस अधबीच में फंसे हैं कि न आगे का रास्ता साफ नज़र आ रहा है और न वापसी का हौसला है. ये वो लोग नहीं हैं जो गलत तरीके से आए. ये पढ़े-लिखे युवा हैं, जिन्होंने पूरे प्लान के साथ देश छोड़ा. सपना बस इतना था कि किसी तरह PR मिल जाए, फिर काम शुरू होगा, परिवार आएगा और बच्चों का भविष्य सुरक्षित होगा.

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Representative image of Gagandeep (AI) Representative image of Gagandeep (AI)

हुमरा असद

  • टोरंटो,
  • 04 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:45 AM IST

अचानक ओंटारियो सरकार (कनाडा का एक प्रांत) का एक ईमेल आया... और मानो सब कुछ रुक गया. जैसे-समंदर के किनारे बना सपनों का आलीशान महल एक लहर से बह गया हो...

कनाडाई सरकार का इमिग्रेशन विभाग कई अलग-अलग प्रोग्राम के तहत विदेशियों को नागरिकता, परमानेंट रिज़िडेंसी, स्टूडेंट या वर्क वीज़ा देने का काम करता है. इसके कुछ प्रोग्राम प्रांतीय सरकार के होते हैं तो कुछ फेडरल सरकार के. यूं समझ लें, जैसे भारत में केंद्र सरकार और राज्य सरकार की योजनाएं.

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14 नवंबर 2025 को अचानक ओंटेरियो सरकार ने अपना Ontario Immigrant Nominee Program (OINP) सस्पेंड कर दिया. स्किल्ड ट्रेड वर्कर्स- प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन, कारपेंटर, मैकेनिक्स... सबकी एप्लीकेशन वापस. वही लोग, जिनकी कनाडा में सबसे ज्यादा डिमांड है.

इसी फैसले की मार झेल रहे हैं, 28 साल के गगनदीप सिंह. सिर पर पगड़ी, मझोला कद, गोरा रंग... मैंने बातचीत शुरू की तो घर ले गया. कनाडा में भी पंजाब जैसी आओ-भगत...

बीवी प्रेग्नेंट है, डिलीवरी नजदीक है, कभी भी हॉस्पिटल जाना पड़ सकता है. साथ में गुजराती आंटी अपने बेटे के साथ रहती हैं. दो और लड़के भी थे. पूछने पर पता चला, शेयरिंग में रहते हैं. घर में 4 कमरे हैं, एक में गगन बीवी के साथ रहता है, एक में गुजराती आंटी तो दो में दो और लड़के. किचन, बाथरूम और लिविंग रूम शेयरिंग में है.

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लड़ाई-झगड़ा तो नहीं होता?

हो जाता है कभी-कभी. हमारी आंटी बहुत अच्छा खाना बनाती हैं, किसी का भी समान लेकर बना लेती हैं. अब तो परिवार जैसे हैं सब, मिलकर रहते हैं, साथ खाते हैं. थोड़ा-बहुत तो परिवार में भी चलता रहता है.

कहां के रहने वाले हैं?

हंसते हुए बोला, अब तो ब्रैंप्टन का हूं जी.. हरियाणा से हूं, कुरुक्षेत्र के पास है, यमुना नगर जगाधरी... सिटी फेमस फॉर यूटेंसिल्स. सबसे ज्यादा फैक्ट्रीज वहां पर ही हैं. इंडिया की सबसे बड़ी शुगर मिल भी और पेपर की भी. मानो बताते हुए गर्व महसूस हो रहा हो.

और पढ़ाई-लिखाई क्या रही है?

मैंने B-Tech करी है कंप्यूटर साइंस में. उसके बाद मैंने एक्सपीरियंस लिया as a web developer. फिर कनाडा में स्टूडेंट वीजा पर आकर IT में डिप्लोमा किया. यहां पढ़ाई करने पर कुछ एक्स्ट्रा प्वाइंट्स मिल जाते हैं तो PR आसान हो जाता है.

(कनाडा का PR पाने के लिए कनाडा सरकार का इमिग्रेशन विभाग कैंडिडेट की उम्र, पढ़ाई, भाषा, जीवनसाथी की पढ़ाई, कनाडा में जॉब ऑफर जैसे अलग-अलग मानकों के आधार पर कुछ स्कोर तय करता है, जो ये बताता है कि आप कनाडा में रहने, यहां नौकरी या यहां बसने के लिए कितने लायक हैं.

ये कॉम्प्रिहेंसिव रैंकिंग सिस्टम (CRS) कहलाता है. PR के लिए अप्लाई करने वाले शख्स का CRS स्कोर तय कट-ऑफ रेंज के बराबर या उससे ज्यादा होना चाहिए.)

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तो PR हो गया?

अभी कहां जी, बस होने ही वाला था कि सरकार ने धोखा कर दिया.

कैसा धोखा...

पढ़ाई के बाद एक साल रूफर का काम किया.. ये छतें बनाने का काम. कनाडा में इसकी डिमांड ज्यादा है. पैसा भी है. यहां लोगों ने कहा इसमें जल्दी PR हो जाता है. ओंटेरियो का प्रोग्राम था, एक्स्ट्रा प्वाइंट्स मिलते हैं. PR के लिए तो सारा खेल प्वाइंट्स का ही है... एक साल से ज्यादा हो गया, बेरोजगार हूं. PR के इंतजार में था. अब जब जवाब आया तो सारी एप्लीकेशन ही रिजेक्ट कर दीं.

क्यों!

सरकार को हम धोखेबाज़ लग रहे हैं... मेल में लिखा है, फ्रॉड होने का शक है और सारी एप्लीकेशन वापस की जा रही हैं. लेकिन हमें लगता है कि बस साउथ एशिया के देशों की की गई है, यही अपना भारत-पाकिस्तान-बांग्लादेश...

खूब प्रोटेस्ट चल रहे हैं, मैं वाइफ की तबीयत की वजह से कम जा पाता हूं लेकिन सोशल मीडिया से पूरा साथ दे रहा हूं.

कुछ असर हुआ सरकार पर?

खबर आई थी कि कुछ एप्लीकेशन फिर से ओपन की गई हैं, करीब 59 और उन्हें अप्रूव किया गया है लेकिन कुछ नहीं पता, हुआ भी है या नहीं. एक दिन ओंटेरियो का मुख्यमंत्री डग फोर्ड प्रोटेस्टर्स से मिलने आया था. उसका कहना था कि फेडरल सरकार ने किया है ये जबकि ये प्रोग्राम ओंटेरियो सरकार का था. बस एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं.

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तो अब आगे क्या...

देखो जी क्या होता है... अभी तो विज़िटर वीज़ा चल रहा है. वर्क वीज़ा एक साल का ही था, वो अक्तूबर 2024 में एक्स्पायर हो गया. जब तक विज़िट वीज़ा है, तब तक रह रहे हैं. और स्कोर भी कम हो रहा है, देखो तब तक नंबर मैच कर गए तो PR मिल जाएगा.

खर्चा कैसे चल रहा है?

सेविंग्स से काम चल रहा है. दीदी भी रहती हैं, थोड़ी मदद वो कर देती हैं. यहां दो सबसे बड़े खर्चे हैं, एक रेंट और दूसरा ग्रोसरी... रेंट में दीदी हेल्प कर देती हैं, ग्रोसरी मैं देख लेता हूं. हॉस्पिटल आने-जाने के लिए अपने गुजराती भाई गाड़ी दे देते हैं. पेट्रोल मैं डलवा लेता हूं. सब मिल-जुलकर हो ही जाता है.

कतराते हुए आगे बोला, थोड़ा-बहुत कैश पर काम कर लेता हूं. लीगल तो नहीं है लेकिन कुछ लोग करवा लेते हैं. उनका काम भी कम पैसों में हो जाता है.

वाइफ की फैमिली भी यहीं रहती है, भाई PR है, छोटी बहन पढ़ रही है. मम्मी जी विज़िट वीजा पर आई हुई हैं, वाइफ की डिलीवरी के लिए. कभी यहां रह लेती हैं, कभी बेटे के पास.

बच्चे की डिलीवरी का खर्चा कैसे होगा?

डिलीवरी का खर्चा भी हो ही जाएगा. सेविंग कर ली थी ठीक-ठाक. यहां घंटे के हिसाब से पैसा मिलता है और काम करने की कोई लिमिट नहीं है. 24 घंटे में 23 घंटे भी काम कर लो तो कोई पाबंदी नहीं. मैं तो कहता हूं लोगों से शुरुआत में जितनी मेहनत कर सकते हो कर लो, कमा लो खूब लेकिन खर्चा भी बहुत है. डॉक्टर का खर्चा, लॉयर का भी खर्चा है, परमिट का खर्चा...

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लोगों से पता किया है, नॉर्मल डिलीवरी में 12 हज़ार डॉलर तक का खर्चा आएगा (7-8 लाख रुपये) और सी सेक्शन हो गई तो 20000 हज़ार डॉलर (13 लाख रु से ज्यादा) तक जाएगा.

जब तक वर्क परमिट था तो हेल्थकेयर फ्री था लेकिन अब तो डॉक्टर की एक विज़िट पर ही बहुत खर्चा हो जाता है, फिर दवाई अलग, टेस्ट अलग, अल्ट्रासाउंड होते हैं, वो अलग...

सेविंग्स लेकर इंडिया जाने का नहीं सोचा?

देखो जी, बच्चा यहां पैदा हो गया तो यहां का सिटिज़न कहलाएगा. बच्चे का फ्यूचर ही संवर जाए. बड़े होकर ये तो आ सकेगा यहां. और वहां तो किसी को कुछ पता भी नहीं है. घरवालों से क्या कहें... उन्हें तो उम्मीद होती है कि बाहर जाकर बेटा खूब कमा रहा होगा.

बीवी को भी ज्यादा कुछ नहीं पता, इस हाल में क्या टेंशन दूं उसे...

वापसी करनी पड़ी तो.. आगे का क्या सोचा है?

अप्रैल में विज़िटर रिकॉर्ड खत्म हो जाएगा. उससे पहले कुछ नहीं हुआ तो वापस जाना पड़ सकता है. बच्चा सिटिजन हो जाएगा. इंडिया जाकर फिर तैयारी करेंगे जी. 3 साल तक के वर्क एक्स्पीरियंस के नंबर मिलते हैं, मेरा एक्स्पीरियंस 7 महीने कम है अभी. वहां जाकर और काम कर लूंगा तो नंबर और बढ़ जाएंगे फिर इंडिया से ही PR लेकर आएंगे.

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कोशिश करते रहेंगे जी, जब तक कर सकते हैं...

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