कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद आएंगी भारत, एस जयशंकर और गोयल से करेंगी मुलाकात

कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद 12 से 17 अक्टूबर तक भारत, सिंगापुर और चीन का दौरा करेंगी. दिल्ली में आनंद भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से व्यापार, ऊर्जा परिवर्तन और सुरक्षा पर बातचीत करेंगी.

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कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद भारत में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के लिए आएंगी (Photo: Reuters) कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद भारत में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के लिए आएंगी (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 अक्टूबर 2025,
  • अपडेटेड 1:58 PM IST

Canada FM to visit India: कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने घोषणा की है कि वह 12 से 17 अक्टूबर तक भारत, सिंगापुर और चीन का दौरा करेंगी. यह यात्रा कनाडा की इंडो-पैसिफिक रणनीति के तहत इन देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने के लिए है.

दिल्ली में मंत्री आनंद की भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ मुलाकात होगी. दोनों देश व्यापार डायवर्सिफिकेशन, एनर्जी ट्रांसफॉर्मेशन और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर रणनीतिक सहयोग के लिए एक ढांचा तैयार करने की दिशा में काम कर रहे हैं.

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मुंबई में भी मंत्री आनंद का दौरा होगा, जहां वह कनाडाई और भारतीय कंपनियों के साथ मिलेंगी. ये कंपनियां दोनों देशों में निवेश, रोजगार सृजन और आर्थिक अवसरों को बढ़ावा देने के लिए काम कर रही हैं.

विदेश मंत्री अनीता आनंद का आगामी भारत दौरा हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच आई गंभीर दरार के संदर्भ में बेहद महत्वपूर्ण है. यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों की मरम्मत की दिशा में एक संभावित पहल हो सकती है.

भारत-कनाडा संबंध पिछले कुछ समय से गंभीर संकट में हैं. खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मामले में कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के आरोप और भारतीय राजनयिकों को निष्कासित करने से दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया था.

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इसके परिणामस्वरूप दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को निकाल दिया था. भारत ने कनाडाई नागरिकों के लिए वीजा सेवाएं रोक दीं थी. जिसकी वजह से द्विपक्षीय व्यापार और निवेश पर नकारात्मक असर पड़ा था. 

दौरे का रणनीतिक महत्व

आनंद का दौरा दिखाता है कि कनाडा अब रिश्तों को सामान्य बनाने की दिशा में गंभीर है. विदेश मंत्री स्तर की यात्रा एक स्पष्ट संकेत है कि दोनों देश बातचीत के रास्ते खुले रखना चाहते हैं.

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