बांग्लादेश: 17 महीनों में 413 बार हुई मॉब लिंचिंग, रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

बांग्लादेश में 12 फरवरी के चुनाव से पहले मानवाधिकार संगठनों ने हिंसा की गंभीर रिपोर्ट जारी की है.पिछले 17 महीनों में 413 मॉब लिंचिंग की घटनाएं हुईं और अल्पसंख्यकों के घरों व मंदिरों को निशाना बनाया गया.

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मानवाधिकार रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव से पहले बांग्लादेश में जमकर हिंसा हुई है. (Image: File) मानवाधिकार रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव से पहले बांग्लादेश में जमकर हिंसा हुई है. (Image: File)

आशुतोष मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 05 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:22 AM IST

बांग्लादेश में 12 फरवरी को आम चुनाव के लिए मतदान होना है, लेकिन उससे पहले कई मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्टों ने देश की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इन रिपोर्टों के मुताबिक, बीते डेढ़ साल में बांग्लादेश में अनिश्चितता और हिंसा अपने चरम पर रही है.

मानवाधिकार वॉचडॉग एमनेस्टी इंटरनेशनल और ATS-SS की रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश में मॉब लिंचिंग की घटनाओं में तेज़ी से इजाफा हुआ है. वहीं चरमपंथी तत्वों को मिल रही कथित खुली छूट और अराजक घटनाओं में बढ़ोतरी भी गहरी चिंता का विषय बनी हुई है.

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रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 17 महीनों में बांग्लादेश में 413 मॉब वायलेंस यानी भीड़ द्वारा हिंसा की घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 259 लोगों की मौत हुई. हालांकि, एक अन्य मानवाधिकार संगठन अधिकार का दावा है कि मॉब लिंचिंग में 181 लोगों की जान गई है. मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, इन घटनाओं में अधिकांश पीड़ितों को या तो पीट-पीटकर मार डाला गया या जिंदा जला दिया गया.

45 लोगों की मौत एक्स्ट्रा-जुडिशियल किलिंग

उदाहरण के तौर पर हिंदू युवक दीपू दास का मामला सामने आया है, जिसे एक फैक्ट्री से बाहर निकालकर बेरहमी से पीटा गया और बाद में आग के हवाले कर दिया गया. रिपोर्ट यह भी बताती है कि पिछले 17 महीनों में अंतरिम सरकार के कार्यकाल के दौरान 45 लोगों की मौत एक्स्ट्रा-जुडिशियल किलिंग में हुई, जबकि 122 लोगों की मौत जेल हिरासत में दर्ज की गई.

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अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के मामलों में भी बढ़ोतरी हुई है. मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, कई घटनाओं में हिंदुओं के घर तोड़े गए, पूजा स्थलों को नुकसान पहुंचाया गया, जिनमें एक व्यक्ति की मौत हुई और सैकड़ों लोग घायल हुए. इस दौरान जमीन पर कब्जा और घरों से बेदखली के मामले भी सामने आए हैं.

पिछले 17 महीनों में 195 लोगों की मौत राजनीतिक हिंसा में हुई, जबकि पूरे देश में 11 हजार से अधिक लोग घायल हुए हैं. सितंबर 2024 से जनवरी 2026 के बीच एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट में बताया गया कि 700 से अधिक घटनाएं राजनीतिक दलों के बीच हुईं, जिनमें प्रथम दृष्टया बीएनपी (BNP) शामिल रही. इन घटनाओं में 121 लोगों की मौत और 7 हजार से अधिक लोग घायल हुए.

हिंसा में लगातार इजाफा

रिपोर्ट के अनुसार, आम चुनाव की तारीख़ों की घोषणा के बाद केवल दो महीनों में ही राजनीतिक हिंसा में 5 लोगों की मौत और लगभग 1000 लोग घायल हुए. 11 दिसंबर 2025 से 31 जनवरी 2026 के बीच राजनीतिक हिंसा की 162 घटनाएं सामने आईं, जिनमें मारपीट, तोड़फोड़, आगजनी और प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच झड़पें शामिल हैं.

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सिर्फ़ एमनेस्टी इंटरनेशनल ही नहीं, बल्कि बांग्लादेश के अन्य मानवाधिकार संगठनों ने भी हिंसा में इज़ाफे की पुष्टि की है. अधिकार संगठन के अनुसार, अगस्त 2024 से 31 दिसंबर 2025 के बीच 328 लोगों की मौत हुई, जबकि 9 हज़ार से अधिक लोग राजनीतिक हिंसा में घायल हुए.

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