'भारत जैसे विशाल पड़ोसी के साथ बिगड़े रिश्तों को...', बांग्लादेश में BNP की जीत पर क्या लिख रहा वर्ल्ड मीडिया?

बांग्लादेश के चुनाव नतीजों पर दुनियाभर की नजर है. द न्यूयॉर्क टाइम्स ने कहा है कि 2024 की क्रांति के बाद तारिक रहमान राजनीतिक वंश के नए उत्तराधिकारी हैं. वहीं बीबीसी और अल जजीरा ने कहा है कि तारिक रहमान की असली चुनौती अब शुरू होने वाली है. बीबीसी ने कहा है कि भारत जैसे विशाल पड़ोसी के साथ बिगड़े रिश्तों को पटरी पर लाना टेढ़ी खीर रहने वाला है.

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बांग्लादेश चुनाव नतीजों को दुनिया भर में कवरेज मिल रहा है. (Photo: AP) बांग्लादेश चुनाव नतीजों को दुनिया भर में कवरेज मिल रहा है. (Photo: AP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:18 PM IST

बांग्लादेश के चुनाव नतीजे और साथ में हुए रेफरेंडम अंतर्राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियां बने हुए हैं. बांग्लादेश में अगस्त 2024 में हुए कथित क्रांति के बाद ये पहला बड़ा चुनाव था. इस चुनाव के नतीजे ये संकेत दे रहे हैं कि बांग्लादेश में पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान पीएम बनने जा रहे हैं. अब तक आए नतीजों में BNP को स्पष्ट बहुमत मिल चुका है. 

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वर्ल्ड मीडिया इस चुनाव को बांग्लादेश में लोकतंत्र की वापसी के रूप में देख रहा है जहां लंबी हिंसा के बाद चुनी हुई सरकार स्थितियों को कंट्रोल में लेगी. 

द न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में बांग्लादेश के जनमत संग्रह की चर्चा की है. अखबार ने लिखा है कि 10 में से 8 वोटरों ने लोकतंत्र की रक्षा और राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के मकसद से किए गए सुधारों का समर्थन किया. अखबर ने इसे "अहम चुनाव" कहा और रिपोर्ट किया कि मतदाताओं ने प्रधानमंत्री की दो टर्म सीमा, द्विसदनीय संसद और महिलाओं की अधिक भागीदारी जैसे सुधारों को भारी समर्थन दिया. इस रिपोर्ट में तारिक रहमान को "राजनीतिक वंश" का उत्तराधिकारी बताते हुए कहा कि यह 2024 की क्रांति के बाद नई शुरुआत है. 

बीबीसी ने लिखा है कि तारिक रहमान ने चुनाव तो जीत लिया है लेकिन देश की इकोनॉमी को फिर से खड़ा करना, खाने की चीज़ों की बढ़ती कीमतों को कंट्रोल में लाना और बांग्लादेश की बड़ी युवा आबादी के लिए नौकरियां बनाना नई सरकार के सामने बड़ी चुनौतियां हैं. 

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इस वेबसाइट ने लिखा है कि भारत जैसे दिग्गज पड़ोसी भारत के साथ खराब रिश्तों को ठीक करना भी उनकी प्राथमिकताओं की लिस्ट में सबसे ऊपर है. 

अपनी जीत के कुछ ही घंटों के अंदर, रहमान को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फ़ोन आया और उन्होंने उन्हें "शानदार जीत" के लिए बधाई दी. 

तारिक रहमान पर इस बात का दबाव होगा कि बदलाव की बाट जोह रहे युवा वोटर्स तक कैसे अपनी बात पहुंचाएं, बदलाव की सख्त उम्मीद लिए इन्हीं युवाओं ने अगस्त 2024 के प्रदर्शन में हिस्सा लिया था जिसकी वजह से शेख हसीना सरकार का पतन हुआ. 

अल जजीरा ने इस चुनाव में अगस्त की कथित क्रांति के बाद बनी छात्रों की पार्टी NCP के फिसड्डी प्रदर्शन को प्रमुखता से उछाला है. अखबार ने लिखा है कि 2024 में स्टूडेंट्स के विरोध प्रदर्शनों के बावजूद, युवाओं की पार्टी नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP) ने उतना अच्छा परफॉर्म नहीं किया जितना उसके सपोर्टर्स ने उम्मीद की थी उसे सिर्फ़ छह सीटें मिलीं.

 कुछ NCP सपोर्टर्स के लिए दिसंबर में जमात-ए-इस्लामी के साथ जुड़ने के पार्टी के फैसले ने उन्हें वोट देने का अपना फैसला बदलने पर मजबूर कर दिया.  23 साल के यूनिवर्सिटी स्टूडेंट सोहनुर रहमान ने रॉयटर्स न्यूज़ एजेंसी को बताया, "वे 2024 के विद्रोह के बाद लोगों की उम्मीदों और सपनों पर खरे नहीं उतरे."

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"NCP का जमात के साथ जुड़ना धोखे जैसा लगा, और हमारे जैसे कई युवा वोटर्स ने उनका सपोर्ट नहीं किया."

जहांगीरनगर यूनिवर्सिटी में गवर्नमेंट और पॉलिटिक्स के प्रोफेसर शकील अहमद ने कहा कि इस गठबंधन ने उन युवा वोटर्स को दूर कर दिया जो एक नया पॉलिटिकल क्लास चाहते थे. 

अहमद ने कहा, "कई लोगों ने इसे पुरानी पॉलिटिक्स से ब्रेक लेने के बजाय पुरानी पॉलिटिक्स में वापसी के तौर पर देखा." "इस फ़ैसले ने युवाओं के वोट को बांट दिया और BNP के लिए सपोर्ट को मज़बूत किया जो ज़्यादा ऑर्गनाइज़्ड और शासन करने में काबिल लग रही थी."

अल जजीरा ने बांग्लादेश के चुनावी नतीजों पर लंबी कवरेज की है. अल जजीरा ने चुनाव नतीजों और काउंटिंग प्रक्रिया पर जमानत की नाराजगी को तरजीह दी है. 

बांग्लादेश के चुनाव नतीजों में दूसरी पार्टी बनने वाली जमात का कहना है कि वह वोटों की गिनती से 'संतुष्ट' नहीं है और 'काउंटिंग प्रक्रिया' की ईमानदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है. 

इस रिपोर्ट में नई सरकार की चुनौतियों और भारत से रिश्तों पर बात की गई है. 

ढाका में सेंटर फॉर पॉलिसी डायलॉग की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर फहमीदा खातून का कहना है कि इस चुनाव में कई जाने-पहचाने चेहरे हैं, लेकिन कुछ नए युवा उम्मीदवार भी हैं।

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खातून ने आगे कहा कि बांग्लादेश का चुनाव पड़ोसी भारत समेत "कई ग्लोबल प्लेयर्स" के हित में है. खातून ने आगे कहा, "बांग्लादेश के भारत के साथ लंबे समय से डिप्लोमैटिक और इकोनॉमिक रिश्ते हैं. लेकिन 2024 में राजनीतिक बदलाव या बगावत के बाद, कई मामलों में, यह एक नया दौर शुरू हुआ है."

पाकिस्तान में भी इन चुनाव नतीजों की चर्चा है. डॉन ने भी इस चुनाव पहला स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव बताया है. डॉन ने अपनी रिपोर्ट में पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के उस बयान को तवज्जो दी है जहां उन्होंने कहा है कि ढाका का नया राजनीतिक माहौल पूरे इलाके में ज़्यादा संतुलित,  स्वतंत्र और आपसी सम्मान वाली बातचीत में मदद करेगा. 

पाकिस्तान के जियो न्यूज ने बांग्लादेश की नई सरकार से पाकिस्तान के रिश्तों पर टिप्पणी की है. इस वेबसाइट ने लिखा है कि पाकिस्तान बांग्लादेश से बिरदराना रिश्ते बनाए रखना चाहता है. 2024 में शेख हसीना को Gen Z की लीडरशिप में हटाने के बाद पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच रिश्ते बेहतर हो गए. दोनों देशों ने समुद्री व्यापार भी शुरू कर दिया है और पिछले साल सरकार से सरकार के बीच कॉमर्स बढ़ाना शुरू कर दिया है.

द गार्जियन ने चुनाव को "डेमोक्रेसी का टेस्ट" बताया. अखबार ने भारत की बधाई को "ऑलिव ब्रांच" कहा, क्योंकि हसीना के निर्वासन के बाद भारत-बांग्लादेश के संबंध तनावपूर्ण थे. अखबार ने अपनी रिपोर्ट में  हसीना की आलोचना का भी उल्लेख किया, जहां उन्होंने चुनावों को मजाक बताया है. 
 

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