'अगर जमात आ जाती तो पाकिस्तान...', बांग्लादेश में बाल-बाल बचा भारत!

बांग्लादेश के 2026 संसदीय चुनाव में बीएनपी ने 299 सीटों में से 200 से अधिक सीटें जीतकर भारी बहुमत हासिल किया है. तारिक रहमान 17 साल के निर्वासन के बाद लौटे और अब वे बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं. भारत ने तारिक रहमान की जीत पर बधाई दी है और दोनों देशों के बीच रिश्तों को सुधारने की उम्मीद जताई गई है.

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तारिक रहमान की जीत पर पीएम मोदी ने बधाई दी है तारिक रहमान की जीत पर पीएम मोदी ने बधाई दी है

राधा कुमारी

  • नई दिल्ली,
  • 13 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:24 PM IST

बांग्लादेश में हुए संसदीय चुनाव में तारिक रहमान की पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने भारी बहुमत हासिल किया है. 12 फरवरी 2026 को हुए चुनाव में BNP ने जमात-ए-इस्लामी और छात्रों की पार्टी नेशनल सिटीजन पार्टी के गठबंधन को हराकर 299 सीटों में से 200 से अधिक सीटें जीती हैं जो दो-तिहाई बहुमत से ज्यादा है. नतीजों से साफ हो गया है कि तारिक रहमान बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं.

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बांग्लादेश का ये चुनाव 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद पहला चुनाव है जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री की पार्टी अवामी लीग को चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं दी गई. तारिक रहमान 17 साल के निर्वासन के बाद दिसंबर 2025 में लंदन से बांग्लादेश वापस लौटे हैं. 

उनकी मां पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की मौत के बाद उन्होंने बीएनपी की कमान संभाली है और वो 'Bangladesh First' नीति पर जोर दे रहे हैं, जिसमें लोकतंत्र, भ्रष्टाचार मुक्त शासन और आर्थिक सुधार शामिल हैं.

बांग्लादेश में बीएनपी की जीत का भारत पर क्या असर होगा?

बांग्लादेश और भारत अहम व्यापारिक साझेदार हैं. दोनों देशों के बीच 4,096 किमी लंबी सीमा है और भारत के पांच राज्यों की सीमा बांग्लादेश से लगती है. भारत और बांग्लादेश के बीच 54 नदियां भी बहती हैं. पाकिस्तान से विभाजित होकर बने बांग्लादेश की स्थापना में भारत का अहम योगदान रहा है. भारत बांग्लादेश का पारंपरिक दोस्त और सहयोगी रहा है. ये रिश्ते शेख हसीना के कार्यकाल में सबसे ज्यादा मजबूत रहे हैं.

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तारिक रहमान और बीएनपी का भारत के साथ रिश्ता शेख हसीना के समय जितना करीबी नहीं रहा है. 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने और उनके भारत में शरण लेने के बाद बांग्लादेश के साथ भारत के रिश्ते खराब हुए हैं. 

हालांकि, बीएनपी के बांग्लादेश में सक्रिय होने के बाद भारत की तरफ से रिश्तों को सुधारने की कोशिश हुई है. 30 दिसंबर को खालिदा जिया के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके लिए एक शोक पत्र भेजा था. विदेश मंत्री एस जयशंकर उनके अंतिम संस्कार में शामिल हुए थे, जहां उनकी मुलाकात जिया के बेटे तारिक रहमान से हुई.

तारिक रहमान की जीत पर प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर बधाई दी है. उन्होंने लिखा, 'मैं तारिक रहमान को बीएनपी लीड करते हुए बांग्लादेश के संसदीय चुनावों में जीत हासिल करने पर हार्दिक बधाई देता हूं. यह जीत आपके नेतृत्व में बांग्लादेश की जनता के विश्वास को दिखाती है. भारत एक लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के समर्थन में हमेशा खड़ा रहेगा. मैं आशा करता हूं कि हमारे बहुआयामी संबंध मजबूत होंगे और हम साझा विकास के लक्ष्यों पर मिलकर काम करेंगे.'

भारत को लेकर तारिक रहमान का कहना है कि वो भारत के साथ 'आपसी सम्मान, समझ और बराबरी' पर आधारित रिश्ते चाहते हैं.

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अगर बांग्लादेश की सत्ता में जमात आ जाती तो...

बांग्लादेश चुनाव में बीएनपी की जीत पर विदेश मामलों के जानकार रोबिंदर सचदेव कहते हैं, 'बीएनपी की जीत का सबसे बड़ा असर भारत पर होगा. अगर जमात आती तो पाकिस्तान के साथ मिलकर भारत के खिलाफ बड़े षड्यंत्र करती. बीएनपी और भारत के बीच मतभेद देखने को मिलेंगे लेकिन बीएनपी भारत के खिलाफ नहीं जाएगी और न ही वो नॉर्थ-ईस्ट में इंसर्जेंसी जैसे गेम करेगा या फिर ऐसा होगा भी तो कम होगा. बीएनपी की जीत का सबसे बड़ा फायदा भारत को यही होगा.'

रोबिंदर सचदेव ने कहा कि शेख हसीना के बाद बांग्लादेश संभाल रहे अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस की विचारधारा इस्लामिक झुकाव वाली मानी जाती है और वो पाकिस्तान के करीब जा रहे थे. यूनुस पर जमात-ए-इस्लामी का प्रभाव रहा है और अगर जमात सत्ता में आती तो पाकिस्तान-बांग्लादेश मिलकर भारत के खिलाफ गुट बना सकते थे.

रोबिंदर सचदेव कहते हैं, 'तारिक रहमान बांग्लादेश फर्स्ट की बात करते हैं...न तो दिल्ली, न तो पिंडी (रावलपिंडी, पाकिस्तान). इसमें कोई शक नहीं कि ये पाकिस्तान के साथ रिश्ते बढ़ाएंगे लेकिन पाकिस्तान इन्हें विचारधारा के आधार पर अपनी तरफ नहीं कर पाएगा.'

साउथ एशिया इंस्टीट्यूट के निदेशक माइकल कुगलमैन कहते हैं कि अगर चुनाव में जमात की जीत होती तो भारत के लिए बहुत असहज स्थिति बन जाती.

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बांग्लादेश के अखबार द डेली स्टार से बात करते हुए वो कहते हैं, 'अगर जमात चुनाव जीत जाती तो भारत राजनीतिक और सुरक्षा के नजरिए से चिंतित हो सकता था. लेकिन भारत बीएनपी को लेकर थोड़ा सहज है. बीएनपी का जमात से अब कोई गठबंधन नहीं है और पार्टी ने भारत के साथ मिलकर काम करने की इच्छा भी जताई है.'

शेख हसीना का मामला भारत-बांग्लादेश रिश्तों में कड़वाहट ला सकता है

तारिक रहमान बांग्लादेश को सबसे आगे रखते हुए भारत को बराबरी का पार्टनर मानने की बात करते हैं. वो भारत के साथ रिश्तों को रीसेट करने की बात कर चुके हैं. लेकिन रोबिंदर सचदेव कहते हैं जिस दिन तारिक रहमान ने शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग उठाई, भारत-बांग्लादेश के रिश्ते मुश्किल में आ सकते हैं.

वो कहते हैं, 'तारिक रहमान के समय भारत-बांग्लादेश के रिश्तों के बीच जो सबसे बड़ी बात आएगी वो शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग हो सकती है. देखना होगा कि वो कब भारत से शेख हसीना को वापस करने की मांग करते हैं. तब रिश्तों में कड़वाहट आ सकती है. हमें देखना होगा कि तारिक रहमान शेख हसीना को लेकर कब और क्या कहते हैं.' 

वो कहते हैं कि तारिक रहमान शेख हसीना के मामले के अलावा भारत से तीस्ता जल बंटवारा और सीमा मुद्दे पर भी कठिन बातचीत कर सकते हैं.

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