नेपाल में एक बार फिर प्राचीन काल की तरह के राज्यभिषेक जैसा दृश्य दिखाई देगा. शंख बज रहे होंगे. घंटे-घड़ियाल की आवाज गूंजेंगी और मंत्रों की ध्वनि से सारा माहौल वैदिक हो जाएगा. ये मौका है नेपाल में होने जा रहे शपथग्रहण समारोह का, जहां नेपाल के नए प्रधानमंत्री के तौर पर बालेन्द्र शाह शपथ लेने जा रहे हैं. उनके इस शपथग्रहण समारोह को विशेष बनाने के लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं. इस समारोह की टाइमिंग इसलिए भी खास है, क्योंकि शपथग्रहण के लिए रामनवमी का दिन चुना गया है. यह वही समय होगा जब अयोध्या के राममंदिर में विशेष पूजा की जा रही होगी.
'Gen Z' आंदोलन के बाद नई सरकार
नेपाल में बीते साल हुए 'Gen Z' आंदोलन के बाद वहां की चुनी हुई सरकार भंग कर दी गई थी. इसके बाद भारत के इस पड़ोसी देश में नए सिरे से चुनाव हुए. चुनाव में इस आंदोलन का चेहरा बनकर उभरे बालेन्द्र शाह को जनता ने अपना समर्थन दिया था. अब बालेंद्र शाह नेपाल की सत्ता पर काबिज होने जा रहे हैं और उनका शपथ ग्रहण समारोह भी ऐतिहासिक होने जा रहा है.
श्रीरामनवमी की तिथि को होगा शपथ ग्रहण
शपथग्रहण का शुभ मुहूर्त शुक्रवार को चैत्र नवरात्र के श्रीरामनवमी की तिथि को तय किया गया है. शपथग्रहण का समय स्थानीय समयानुसार दोपहर 12 बजकर 44 मिनट पर तय किया गया है. यह वही समय है जब अयोध्या में राम मंदिर में रामनवमी के अवसर पर विशेष पूजा होगी. राष्ट्रपति भवन शीतल निवास के तरफ से लोगों को भेजी जा रही शपथग्रहण के निमंत्रण के अनुसार बालेन्द्र शाह इसी शुभ समय में शपथ लेने वाले हैं.
स्वस्ति वाचन और शंखनाद बनाएंगे आयोजन को खास
बालेन्द्र की टीम के तरफ से भी इस बात की पुष्टि की गई है कि पंचांग में शुभ मुहूर्त देख कर शपथग्रहण का समय तय किया गया है. यह शपथग्रहण केवल एक औपचारिक प्रक्रिया न होकर धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा विशेष आयोजन भी होगा. शपथग्रहण समारोह के दौरान 108 हिन्दू बटुकों द्वारा स्वस्ति वाचन किया जाएगा, जिसे शुभ और मंगलकारी माना जाता है. इसके साथ ही 107 बौद्ध लामा गुरु भी मंगल पाठ करेंगे, जिससे बौद्ध परंपरा के अनुसार शांति और समृद्धि की कामना की जाएगी.
इसके अतिरिक्त, 7 ब्राह्मणों द्वारा शंखनाद किया जाएगा, जिससे पूरा शपथग्रहण समारोह सनातन धर्म की ध्वनि से गुंजायमान होगा. इस प्रकार यह आयोजन नेपाल की बहुधार्मिक और बहुसांस्कृतिक पहचान को भी दर्शाएगा, जहां विभिन्न परंपराओं को एक साथ सम्मान दिया जाता है. कुल मिलाकर, बालेन्द्र शाह का शपथग्रहण समारोह धार्मिक अनुष्ठानों, सांस्कृतिक प्रतीकों और राष्ट्रीय महत्व के एक भव्य आयोजन के रूप में आयोजित होने जा रहा है, जो देश में नई सरकार के गठन के साथ नई उम्मीदों और ऊर्जा का संदेश भी देगा.
पंकज दास