नेपाल: पूरे चुनाव में सिर्फ 5 रैली, भाषण दिया कुल 26 मिनट और बन गए प्रधानमंत्री

नेपाल के राजनीतिक इतिहास में आज उस शख्स का नाम बतौर पीएम जुड़ गया है जिसने यहां की जेन जी क्रांति के बाद लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता पर कब्जा किया. मेयर से पीएम बनने तक बालेन शाह का राजनीतिक सफर एक अदभुत कहानी है. उन्होंने सीधे लोगों से संवाद किया और लोगों ने उन्हें अपना राजनीतिक भविष्य तय करने का अधिकार दिया.

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नेपाल के PM पद की शपथ लेने के बाद सुशीला कार्की को गले लगाते बालेन शाह. (Photo: AP) नेपाल के PM पद की शपथ लेने के बाद सुशीला कार्की को गले लगाते बालेन शाह. (Photo: AP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 4:11 PM IST

राजनीति के कई घाघ भी इस क्रांतिकारी बदलाव का आकलन नहीं कर सके. उनका दशकों का अनुभव काम नहीं आया. सोशल और पॉलिटिकल इंजीनियरिंग की सारी तिकड़म बेकार गई जब मैदान में 35 साल के रैपर और बालेन शाह मैदान में आए. नेपाल में क्रांति के बाद बालेन शाह शुक्रवार को देश के प्रधानमंत्री बन गए हैं. 

बालेन शाह का चुनावी कैलकुलेशन आपको हैरान कर सकता है. चुनाव का प्रचार करते हुए बालेन शाह ने पूरे चुनाव में मात्र 26 मिनट भाषण दिया और वे प्रधानमंत्री बन गए. 

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रैपर से राजनेता बने बालेन्द्र शाह 'बालेन' को इसी प्रचार के दम पर उनकी पार्टी को 52 लाख वोट मिले. आनुपातिक वोटिंग के तहत मिले ये 52 लाख वोट उनकी पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) को पीएम बनाने का मौका दे गया. और बालेन शाह पीएम बन गए. 

नेपाल समाचारपत्र से जुड़ी पत्रकार सरस्वती कर्माचार्य ने कहा, "बालेन ने पूरब में झापा से लेकर सुदूर पश्चिम तक मात्र 4-5 जनसभाओं को संबोधित किया, जिसमें हजारों लोग शामिल हुए. लेकिन अगर हम समय की बात करें, तो उन्होंने हर सभा में सिर्फ 4 या 5 मिनट ही बात की और सीधे मुद्दे पर बात की."

पार्टी के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध वीडियो, इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया की रिपोर्ट और पार्टी कार्यकर्ताओं के बयानों से पता चलता है कि बालेन के भाषण अनौपचारिक होते थे.

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ऐसा लगता था मानो वह लोगों से बहुत ही सहज अंदाज़ में बात कर रहे हों. "क्या आपने चाय पी ली?" "आज आपने कौन सी सब्ज़ी खाई?" "क्या आपने स्थानीय रूप से उगाई गई सब्ज़ियां खाईं या फिर बॉर्डर पार से आयात की गई?"

PM पद की शपथ लेने के बाद अपने बेटी के साथ बालेन शाह. (Photo: AP)

जनकपुरधाम के रहने वाले लेक्चरर वीरेंद्र कुमार झा कहते हैं, "जनकपुर में उन्होंने अपनी मातृभाषा मैथिली में बात की, और सुदूर पश्चिम के दौरे के दौरान उन्होंने सोशल मीडिया पर डोटेली भाषा में एक स्टेटस लिखा, जिसमें कहा गया था, 'सुदूर अब दूर नाहि, झिक्के, झिक्के माया तमलाई,' जिसका अर्थ है, 'सुदूर पश्चिम अब दूर नहीं है, आपको बहुत-बहुत प्यार." 

अन्य जगहों पर बालेन ने राष्ट्रीय भाषा नेपाली में बात की. 

पार्टी कार्यकर्ताओं ने बताया कि बालेन ने चुनाव प्रचार के दौरान वोट भी नहीं मांगे. पत्रकार कर्माचार्य ने कहा, "अपने एक भाषण में उन्होंने कहा था, मैं यहां अपने लिए वोट मांगने नहीं आया हूं, बल्कि मैं यहां काम करवाने के लिए आया हूं. भले ही हमारी पार्टी न जीते, फिर भी हम लोगों के लिए काम करेंगे.'

जनकपुर में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "मुझे सिर्फ मधेशी का बेटा होने के नाते वोट न दें, बल्कि एक अच्छे उम्मीदवार होने के नाते अपना वोट दें."

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बालेन के चुनाव प्रचार के बिल्कुल अलग अंदाज पर टिप्पणी करते हुए झा ने कहा कि उनके भाषण "छोटे, मीठे, सीधे मुद्दे पर और प्रभावशाली" होते थे.

झा ने आगे कहा, "दूसरे उम्मीदवारों के विपरीत बालेन ने किसी भी राजनीतिक दल या उम्मीदवार की आलोचना नहीं की, न ही कोई बड़े-बड़े आश्वासन या वादे किए. उन्होंने आम लोगों के दिलों को छुआ और स्थानीय समस्याओं के बारे में भी बात की."

पश्चिमी नेपाल के धनगढ़ी विधानसभा क्षेत्र में अपने एक लोकप्रिय भाषण में बालेन ने कहा था, "हमें अपने देश को स्विट्जरलैंड बनाने की जरूरत नहीं है. हमारे यहां बधिमालिका और खप्तड़ नेशनल पार्क हैं, जो स्विट्जरलैंड से भी ज़्यादा खूबसूरत हैं."

बालेन शाह ने नेपाल के प्रधानमंत्री पद की शपथ 27 मार्च 2026 को ली. उनका शपथग्रहण समारोह काफी अनोखा और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध था, जिसमें हिंदू और बौद्ध परंपराओं का मिश्रण देखने को मिला. इस दौरान शंखनाद किया गया, 108  वैदिक छात्रों ने स्वस्ति वाचन का सामूहिक पाठ किया और 16 बौद्ध भिक्षुओं द्वारा अष्टमंगल का जाप किया गया.

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