अमेरिका ईरान पर 'अंतिम प्रहार' करने के विकल्पों पर काम कर रहा है. इसके तहत अमेरिका अपने सैनिकों को ईरान में उतार सकता है और ईरान के रणनीतिक ठिकानों पर भीषण बमबारी कर सकता है. अमेरिकी वेबसाइट एक्सियोस ने दो अमेरिकी अधिकारियों और दो जानकार सूत्रों के हवाले से ये जानकारी दी है. इजरायली वेबसाइट इजरायल टाइम्स ने भी इस रिपोर्ट को जारी किया है.
अगर ईरान के साथ उच्च-स्तरीय बातचीत शुरू करने की कोशिशें कामयाब नहीं होतीं और ईरानी होर्मुज़ स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही को रोकना और धमकाना जारी रखते हैं, तो अमेरिका एक 'अंतिम चोट' के रूप में इस विकल्प पर विचार कर सकता है.
इस 'अंतिम प्रहार' या 'Final blow' से अमेरिका के दो उद्देश्य साधे जा सकेंगे. तेहरान के साथ भविष्य की बातचीत में उसकी स्थिति मजबूत होगी या फिर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जीत की घोषणा के साथ एकतरफ़ा रूप से युद्ध समाप्त करने का मौका मिल जाएगा.
अधिकारियों ने Axios को बताया कि चार विकल्पों पर चर्चा चल रही है.
अमेरिका इन विकल्पों पर चर्चा कर रहा है
पहला विकल्प होगा खार्ग द्वीप पर कब्जा करना या उसकी घेराबंदी करना. ये द्वीप ईरान का तेल निर्यात का मुख्य केंद्र है. अगर इस द्वीप पर अमेरिका का कब्जा हो जाता है तो इससे ईरान की कमर ही टूट जाएगी.
ईरान के लिए खार्ग द्वीप उसकी तेल इकोनॉमी की 'लाइफलाइन' माना जाता है. फारस की खाड़ी में स्थित यह द्वीप देश का प्रमुख तेल निर्यात टर्मिनल है, जहां से लंबे समय से लगभग 80–90% कच्चा तेल बाहर भेजा जाता रहा है. यहां बड़े भंडारण टैंक, लोडिंग जेटी और पाइपलाइन नेटवर्क मौजूद हैं, जो इसे रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बनाते हैं. खार्ग पर किसी भी सैन्य हमले या नाकेबंदी की स्थिति इसका असर सीधे ईरान की आय, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक तेल बाजार पर पड़ता है. इसलिए इसकी सुरक्षा ईरान की शीर्ष प्राथमिकता रहती है.
दूसरा विकल्प होगा होर्मुज स्ट्रेट में स्थित लरक द्वीप पर कब्ज़ा करना. इस द्वीप पर ईरानी ठिकाने और रडार मौजूद हैं, जो होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर नजर रखते हैं; साथ ही यहां छोटी नावें भी मौजूद हैं जो नागरिक जहाज़ों पर हमला कर सकती हैं. ईरान ने कासेम और लरक द्वीप के बीच ही अपना टोल बूथ लगाया है. यही वो जगह है जहां से ईरान होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से सेफ्टी शुल्क के रूप में करोड़ों रुपये वसूलने की तैयारी कर रहा है.
तीसरी संभावना होगी पूर्वी फारस की खाड़ी में स्थित अबू मूसा द्वीप पर हमला करना. इस द्वीप के जरिए ईरान को खाड़ी से बाहर निकलने वाले जहाज़ों पर नियंत्रण मिल जाता है. यह द्वीप और इसके पास स्थित ग्रेटर और लेसर तुंब द्वीप ईरान के कब्जे में हैं, लेकिन संयुक्त अरब अमीरात (UAE) इन पर अपना दावा करता है. UAE अमेरिका का एक प्रमुख सहयोगी देश है.
अंत में और चौथी संभावना अमेरिका सीधे तौर पर ईरानी तेल का निर्यात करने वाले जहाजों को रोक सकता है या उन पर कब्जा कर सकता है.
Axios के अनुसार अमेरिकी सैनिकों द्वारा ईरान के अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम को ज़ब्त करने की योजनाएं भी विचाराधीन हैं.अमेरिकी सेना ने ईरान के अंदरूनी हिस्सों में ज़मीनी ऑपरेशन की योजनाएँ भी तैयार की हैं, ताकि वहां की परमाणु फैसिलिटी में दबाकर रखे गए अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम पर कब्जा किया जा सके.
एनरीच्ड यूरेनियम पर कब्जे का भी विकल्प
माना जाता है कि यह यूरेनियम ईरान के अंदरूनी हिस्सों में स्थित अब खंडहर बन चुके परमाणु ठिकानों के नीचे दबा हुआ है. इसके विकल्प के तौर पर अमेरिका इन ठिकानों पर हवाई बमबारी भी कर सकता है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि ईरान उस सामग्री तक न पहुंच पाए.
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की हालिया रिपोर्टों के अनुसार ईरान ने यूरेनियम संवर्धन का स्तर काफी बढ़ा लिया है. 2025–26 के आकलनों के मुताबिक ईरान लगभग 60% तक संवर्धित यूरेनियम तैयार कर चुका है, जो हथियार-ग्रेड 90% से थोड़ा ही कम माना जाता है. 2025 के मध्य तक उसके पास लगभग 440 किलोग्राम 60% संवर्धित यूरेनियम है.
सूत्रों का कहना है कि ट्रंप ने अभी तक इनमें से किसी भी योजना पर कोई फैसला नहीं लिया है. अमेरिका इन विकल्पों पर अभी विचार ही कर रहा है.
इतने जटिल और जोखिम भरे ऑपरेशन को अंजाम देने के बजाय अमेरिका उन सुविधाओं पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले कर सकता है, ताकि ईरान को उस सामग्री तक पहुंचने से हमेशा के लिए रोका जा सके.
सूत्रों का कहना है कि अगर ईरान के साथ बातचीत से जल्द ही कोई ठोस नतीजा नहीं निकलता है, तो ट्रंप ईरान के साथ तनाव बढ़ाने के लिए तैयार हैं. ट्रंप सबसे पहले ईरान के पावर प्लांट और ऊर्जा सुविधाओं पर बमबारी करने की अपनी धमकी को अमल में ला सकते हैं, जिसके जवाब में तेहरान ने खाड़ी क्षेत्र में जबरदस्त जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है.
व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने बुधवार को ईरान को चेतावनी दी कि अगर कोई समझौता नहीं हो पाता है तो ट्रंप 'पहले से कहीं ज़्यादा ज़ोरदार' हमला करने के लिए तैयार हैं.
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