पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों पर असदुद्दीन ओवैसी ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि राज्य की जनता ने भारतीय जनता पार्टी को सत्ता सौंपी है और इस जनादेश का सम्मान किया जाना चाहिए.
हैदराबाद में मीडिया से बात करते हुए ओवैसी ने कहा, 'यह जनता का फैसला है, हमें इसे स्वीकार करना होगा. मैं पहले भी कहता रहा हूं कि तथाकथित 'धर्मनिरपेक्ष पार्टियां' बीजेपी के विस्तार को रोक नहीं पाएंगी.'
उन्होंने यह भी कहा कि AIMIM ने पश्चिम बंगाल में 11 उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन सभी को हार का सामना करना पड़ा. इसके बावजूद उन्होंने पार्टी को वोट देने वाले लोगों का धन्यवाद किया. ओवैसी ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और तृणमूल कांग्रेस जैसी पार्टियों ने पहले 'सॉफ्ट हिंदुत्व' की राजनीति करने की कोशिश की.
उन्होंने मुस्लिम समुदाय से अपील करते हुए कहा कि उन्हें अपनी स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व तैयार करने पर ध्यान देना चाहिए. गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने 207 सीटें जीतकर दो-तिहाई बहुमत हासिल किया है और 15 साल से सत्ता में रही टीएमसी सरकार को हटा दिया है.
BJP की सीटें बढ़कर 207 हुईं
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत के बाद भारतीय जनता पार्टी ने अपनी बढ़त और मजबूत कर ली है. पार्टी का आंकड़ा 207 सीटों तक पहुंच गया. राजारहाट-न्यू टाउन सीट पर बीजेपी उम्मीदवार पीयूष कनोडिया ने कड़े मुकाबले में तृणमूल कांग्रेस के विधायक तपस चटर्जी को बेहद कम अंतर से हराया. 18 चरणों की गिनती के बाद कनोडिया को 1,06,564 वोट मिले, जबकि चटर्जी को 1,06,255 वोट हासिल हुए. इस तरह लगभग 309 वोटों के अंतर से यह सीट बीजेपी के खाते में गई.
ममता भी नहीं बचा सकीं अपनी सीट
इस नतीजे के साथ 294 सीटों वाली विधानसभा में बीजेपी ने दो-तिहाई बहुमत से भी आगे निकलकर अपनी स्थिति बेहद मजबूत कर ली है, जबकि टीएमसी करीब 80 सीटों तक सिमट गई है. चुनाव में एक बड़ा झटका तब देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भवानीपुर सीट पर बीजेपी के सुवेंदु अधिकारी से हार का सामना करना पड़ा.
यह जीत कई मायनों में खास मानी जा रही है. 1972 के बाद पहली बार पश्चिम बंगाल में ऐसी सरकार बनने जा रही है, जिसकी पार्टी केंद्र में भी सत्ता में है. इससे प्रशासनिक तालमेल और नीतिगत फैसलों में बड़े बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है.
बीजेपी का वोट प्रतिशत बढ़ा
चुनावी अभियान के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने जोरदार प्रचार किया, जिसका असर नतीजों में साफ दिखाई दिया. वोट प्रतिशत के आंकड़े भी इस बदलाव को दर्शाते हैं. बीजेपी का वोट शेयर बढ़कर करीब 45 प्रतिशत तक पहुंच गया, जबकि टीएमसी का वोट प्रतिशत घटकर लगभग 41 प्रतिशत रह गया.
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