बंगाल: आसनसोल में अवैध कोयला खदान धंसने से तीन की मौत, कई दबे

पश्चिम बर्धमान के आसनसोल में बड़ीरा इलाके की बीसीसीएल ओपन कास्ट खदान में अवैध खनन के दौरान सुरंग धंसने से बड़ा हादसा हुआ. खदान में कम से कम 5–6 मजदूर थे, जिनमें से चार को निकाला गया, तीन की मौत और दो गंभीर रूप से घायल हैं. रेस्क्यू ऑपरेशन पोकलेन मशीनों से जारी है. हादसे ने खदानों की सुरक्षा, अवैध खनन और कोयला माफिया के नेटवर्क पर सवाल खड़े कर दिए हैं. प्रशासन और केंद्रीय बल मौके पर तैनात हैं.

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हादसे के बाद घटनास्थल पर भीड़ लग गई. Photo ITG हादसे के बाद घटनास्थल पर भीड़ लग गई. Photo ITG

अनिल गिरी

  • आसनसोल,
  • 13 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:48 PM IST

पश्चिम बर्धमान जिले के आसनसोल के कुल्टी थाना क्षेत्र अंतर्गत बड़ीरा इलाके में बीसीसीएल की ओपन कास्ट कोयला खदान में मंगलवार को बड़ा हादसा हो गया. आरोप है कि अवैध रूप से कोयला निकालने के दौरान खदान के भीतर बनी सुरंग अचानक धंस गई, जिसमें कई मजदूर दब गए. सूत्रों के मुताबिक हादसे के वक्त कम से कम 5 से 6 लोग खदान के अंदर मौजूद थे. इस हादसे में अब तक तीन लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि दो लोग गंभीर रूप से घायल हैं. घायलों को आसनसोल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है. प्रशासन को आशंका है कि अब भी एक से दो लोग मलबे में फंसे हो सकते हैं. उन्हें निकालने के लिए पोकलेन मशीनों से युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है.

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हादसे के बाद लगी भीड़
हादसे की खबर फैलते ही खदान के आसपास सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा हो गई. मृतकों और लापता लोगों के परिजन घटनास्थल पर मौजूद हैं. परिजनों का आरोप है कि कोयला माफिया से जुड़े लोग उन्हें इलाके से हटाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन परिजन अपनों की एक झलक पाने की उम्मीद में डटे हुए हैं.

मृतकों की हुई पहचान
मृतकों में एक महिला भी शामिल है. मृतकों की पहचान गीता बाउरी, सुरेश बाउरी और टिपु बाउरी के रूप में हुई है. वहीं घायल मजदूरों के नाम सुभाष मल्लिक और गोविंद बाउरी बताए जा रहे हैं. प्रशासन को आशंका है कि अब भी एक से दो लोग खदान के भीतर फंसे हो सकते हैं. उन्हें निकालने के लिए पोकलेन मशीनों की मदद से तेज़ी से राहत और बचाव कार्य चलाया जा रहा है. मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल और सीआईएसएफ की तैनाती की गई है.

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पहले भी हो चुकी है घटना
यह कोई पहली घटना नहीं है. बड़ीरा की इस ओपन कास्ट खदान में पहले भी कई बार धंसान से मौतें हो चुकी हैं, इसके बावजूद अवैध खनन जारी रहने का आरोप है. स्थानीय लोगों का दावा है कि रोज़ाना 3 से 4 ट्रक अवैध कोयला यहां से निकालकर आसपास की भट्टियों में भेजा जाता है. इस हादसे के बाद एक बार फिर खदानों की सुरक्षा, प्रशासनिक निगरानी और कोयला माफिया के नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. घटनास्थल पर भारी पुलिस बल और CISF की तैनाती की गई है. पुलिस का कहना है कि हादसे के कारणों और अवैध खनन के एंगल से मामले की जांच की जा रही है.

इस बीच बीजेपी विधायक अजय पोद्दार ने घटना को लेकर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि सुबह पौने आठ बजे एरिया-12, बीसीसीएल बॉर्डर पर भू-धंसान हुआ. ग्रामीण रैट-होल माइनिंग के जरिए कोयला निकाल रहे थे और फंस गए. पहले तीन लोगों को निकाला गया, जिनमें एक की मौत हुई. बाद में मशीन लगाकर दो और शव निकाले गए. कुल पांच लोग थे—तीन की मौत, दो अस्पताल में हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि मासूम ग्रामीण मारे जा रहे हैं और फायदा सिंडिकेट, माफिया और सिस्टम को हो रहा है. पुलिस, माफिया और केंद्रीय बल सब मिले हुए हैं.

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वहीं, टीएमसी के पूर्व कुल्टी ब्लॉक यूथ अध्यक्ष शुभाशीष मुखर्जी ने कहा कि यह एक परित्यक्त बीसीसीएल खदान है, जो मुख्य सड़क से काफी नीचे है, जहां मशीनरी पहुंचाना मुश्किल है. उनके मुताबिक, अवैध खनन रोकने के लिए बैरिकेडिंग और तारबंदी की गई थी, फिर भी कुछ लोग बेहद जोखिम भरे तरीके से 300–400 फीट नीचे उतर गए. रेस्क्यू ऑपरेशन अभी जारी है.

पूर्व वार्ड काउंसलर अशोक कुमार पासवान ने बताया कि शुरुआत में दो लोगों को होश में बाहर निकाला गया और जिला अस्पताल भेजा गया. फिलहाल यह पुष्टि की जा रही है कि अंदर कोई और फंसा तो नहीं.
फिलहाल, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है, लेकिन यह हादसा एक बार फिर यह सवाल छोड़ गया है—
जब खदान कानूनी है, CISF तैनात है, फिर भी अवैध खनन और मौतें क्यों नहीं रुक रही हैं?

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