भारत में निपाह वायरस के दो मामलों की पुष्टि के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने शुक्रवार को कहा कि देश से इस जानलेवा वायरस के फैलने का खतरा कम है. WHO ने साफ किया कि मौजूदा हालात में भारत के खिलाफ किसी तरह की यात्रा या व्यापार पाबंदी की जरूरत नहीं है.
WHO के मुताबिक, भारत पहले भी निपाह के प्रकोप से सफलतापूर्वक निपट चुका है और इस बार भी केंद्र व राज्य की स्वास्थ्य टीमें मिलकर जरूरी सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय लागू कर रही हैं. संगठन ने कहा, 'इस वक्त इंसानों में वायरस के बढ़ते आपसी संक्रमण के कोई सबूत नहीं हैं.'
हालांकि WHO ने यह भी जोड़ा कि आगे और लोगों के वायरस के संपर्क में आने की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि भारत और पड़ोसी देश बांग्लादेश के कुछ इलाकों में यह वायरस चमगादड़ों में पहले से मौजूद है.
WHO का यह बयान ऐसे समय आया है, जब हांगकांग, थाईलैंड, ताइवान, मलेशिया, सिंगापुर, वियतनाम और नेपाल समेत कई देशों ने निपाह मामलों की खबरों के बाद कोविड जैसी स्वास्थ्य जांच फिर से शुरू कर दी है.
बंगाल में दो नर्स संक्रमित
भारत में इस महीने निपाह वायरस के दो मामलों की पुष्टि पश्चिम बंगाल में हुई है. दोनों मरीज 25 वर्षीय नर्स एक महिला और एक पुरुष हैं जो उत्तर 24 परगना जिले के बारासात स्थित एक निजी अस्पताल में काम करते हैं.
दोनों में दिसंबर 2025 के आखिरी हफ्ते में लक्षण दिखने शुरू हुए, जो तेजी से न्यूरोलॉजिकल (तंत्रिका तंत्र से जुड़ी) जटिलताओं में बदल गए. जनवरी की शुरुआत में दोनों को आइसोलेशन में रखा गया.
11 जनवरी को कल्याणी स्थित एक सरकारी अस्पताल की वायरल रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लैब ने इन मामलों को संदिग्ध निपाह संक्रमण के तौर पर चिन्हित किया था. इसके बाद 13 जनवरी को पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) ने संक्रमण की पुष्टि की. WHO के अनुसार, 21 जनवरी तक पुरुष मरीज की हालत में सुधार दर्ज किया गया है, जबकि महिला मरीज की स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है.
सभी कॉन्टैक्ट्स की रिपोर्ट नेगेटिव
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को जानकारी दी कि दोनों मरीजों के संपर्क में आए सभी लोगों की जांच की गई है और सभी की रिपोर्ट नेगेटिव आई है.
मंत्रालय ने मीडिया और जनता को आगाह करते हुए कहा, 'कुछ जगहों पर निपाह वायरस के मामलों को लेकर अटकलें और गलत आंकड़े फैलाए जा रहे हैं. राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) से मिली जानकारी के अनुसार, दिसंबर से अब तक पश्चिम बंगाल में निपाह के सिर्फ दो ही पुष्टि किए गए मामले सामने आए हैं.'
मंत्रालय ने लोगों से अपील की कि केवल आधिकारिक स्रोतों से जारी जानकारी पर ही भरोसा करें और अपुष्ट खबरें न फैलाएं.
निपाह वायरस क्या है?
निपाह एक दुर्लभ लेकिन बेहद जानलेवा वायरस है, जो मुख्य रूप से फल खाने वाले चमगादड़ों से इंसानों में फैलता है. इंसानों के बीच इसका संक्रमण सीमित स्तर पर ही देखा गया है.
विशेषज्ञों का कहना है कि बांग्लादेश में हर साल निपाह के मामले सामने आते हैं, लेकिन अब तक कोई सबूत नहीं मिला है कि यह वायरस इंसानों में तेजी से फैलने वाला रूप ले रहा है.
निपाह वायरस मुख्य रूप से चमगादड़ों, सूअरों, कुत्तों और घोड़ों को संक्रमित करता है. इंसान संक्रमित जानवरों के सीधे संपर्क में आने या उनके शरीर के तरल पदार्थों से दूषित भोजन जैसे फल या खजूर का रस के सेवन से संक्रमित हो सकते हैं.
इंसानों में यह वायरस आमतौर पर बुखार और दिमाग में सूजन (एन्सेफेलाइटिस) पैदा करता है, जो जानलेवा साबित हो सकता है. हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि निपाह, कोविड-19 या फ्लू की तरह तेजी से फैलने वाला वायरस नहीं है और कम समय में बड़े पैमाने पर संक्रमण फैलने की आशंका कम है.
भारत में नया नहीं है निपाह
भारत में निपाह वायरस के छिटपुट मामले पहले भी सामने आते रहे हैं, खासकर केरल में, जिसे इस संक्रमण के लिहाज से दुनिया के सबसे जोखिम वाले इलाकों में गिना जाता है. 2018 में पहली बार सामने आने के बाद से केरल में निपाह से दर्जनों मौतें हो चुकी हैं.
मौजूदा प्रकोप भारत में निपाह का सातवां और पश्चिम बंगाल में तीसरा दर्ज मामला है. इससे पहले 2001 और 2007 में बंगाल-बांग्लादेश सीमा से सटे जिलों में निपाह फैल चुका है. WHO के अनुसार, बांग्लादेश में लगभग हर साल निपाह के मामले सामने आते हैं.
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