कोलकाता के मशहूर साल्ट लेक स्टेडियम के बाहर शनिवार सुबह एक बड़ा बदलाव देखने को मिला. यहां पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की डिजाइन की हुई एक विवादित फुटबॉल मूर्ति को तोड़ दिया गया है. यह प्रतिमा सालों से स्टेडियम के बाहर लगी हुई थी और इसे लेकर लंबे समय से बहस चल रही थी. इसके टूटने के बाद खेल प्रेमियों से लेकर सोशल मीडिया तक इस पर चर्चा तेज हो गई है.
इस प्रतिमा की बनावट को लेकर शुरुआत से ही विवाद रहा है. इसमें धड़ से कटे हुए दो पैर और उनके ऊपर एक फुटबॉल रखी हुई दिखाई देती थी. साथ ही इस पर 'बिश्वा बांग्ला' का लोगो भी लगा हुआ था, जो पिछली टीएमसी सरकार का प्रतीक माना जाता है. स्टेडियम में आने वाले फुटबॉल फैंस इसे लंबे समय से देखते आ रहे थे. हालांकि, शुरुआत से ही इसके डिजाइन को लेकर अलग-अलग राय रही. कुछ लोग इसे एक अलग तरह की कला मानते थे, जबकि कई फुटबॉल समर्थकों का कहना था कि इसका डिजाइन स्टेडियम जैसी मशहूर जगह के हिसाब से सही नहीं लगता.
शनिवार सुबह जब लोग VVIP गेट के पास पहुंचे तो उन्हें प्रतिमा टूटी हुई मिली. इसके बाद स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर इस पर चर्चा तेज हो गई. कई लोग इसे लंबे समय से चल रहे विवाद का अंत बता रहे हैं, तो कुछ इसे एक पुरानी पहचान के खत्म होने के तौर पर देख रहे हैं.
राजनीतिक बयान भी आए सामने
इस मामले पर राजनीतिक बयान भी सामने आए हैं. बीजेपी नेता कीया घोष ने सोशल मीडिया पर लिखा कि स्टेडियम के सामने लगी यह संरचना अब तोड़ दी गई है, जैसा पहले कहा गया था. उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा और तेज हो गई है.
वहीं, पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री निशीथ प्रमाणिक ने 17 मई को मीडिया से बातचीत में कहा था कि यह प्रतिमा स्टेडियम की सुंदरता के अनुरूप नहीं लगती और इसे हटाया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा था कि सरकार स्टेडियम के इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार की योजना पर काम कर रही है. खेल मंत्री ने इस प्रतिमा को लेकर राजनीतिक टिप्पणी भी की थी. उन्होंने कहा था कि उनके मुताबिक, प्रतिमा लगने के बाद से पिछली सरकार के लिए मुश्किलें बढ़ीं. हालांकि, यह उनका राजनीतिक बयान था.
दरअसल, पिछले साल दिसंबर में लियोनेल मेसी के 'GOAT India Tour' के दौरान साल्ट लेक स्टेडियम में भारी भीड़ और अव्यवस्था देखने को मिली थी. उस समय स्टेडियम में हंगामे और तोड़फोड़ की खबरें भी सामने आई थीं, जिसके बाद व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठे थे. अब इस प्रतिमा के तोड़े जाने के बाद साल्ट लेक स्टेडियम एक बार फिर चर्चा में आ गया है.
यह प्रतिमा साल 2017 में FIFA U-17 वर्ल्ड कप से पहले लगाई गई थी. इसे लेकर शुरुआत से ही अलग-अलग राय बनी हुई थी. कुछ लोग इसे स्टेडियम की पहचान मानते थे, जबकि कुछ इसे असामान्य और विवादित बताते थे. अब इसके तोड़े जाने के बाद कोलकाता में एक बार फिर राजनीतिक और खेल दोनों ही स्तर पर नई बहस शुरू हो गई है.
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