तिलजला अग्निकांड: कोलकाता हाईकोर्ट ने संपत्ति पर बुलडोजर एक्शन पर लगाई रोक

तिलजला के घनी आबादी वाले इलाके में मंगलवार दोपहर को एक चमड़े की फैक्ट्री में आग लग गई थी. जांच अधिकारियों ने बताया कि यह फैक्ट्री अवैध रूप से चल रही थी और इसके पास इमारत का कोई स्वीकृत नक्शा या प्लान नहीं था. इसे नगर निगम द्वारा ध्वस्त किया जा रहा है.

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कोर्ट ने साफ कहा कि किसी भी फैक्ट्री या व्यवसाय का संचालन नहीं किया जा सकेगा. (Photo- Social Media) कोर्ट ने साफ कहा कि किसी भी फैक्ट्री या व्यवसाय का संचालन नहीं किया जा सकेगा. (Photo- Social Media)

तपस सेनगुप्ता

  • कोलकाता,
  • 15 मई 2026,
  • अपडेटेड 7:14 PM IST

कोलकाता के तिलजला अग्निकांड मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने संबंधित संपत्ति पर बुलडोजर कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है. अदालत का यह अंतरिम आदेश मामले के अंतिम निपटारे तक प्रभावी रहेगा. हालांकि कोर्ट ने साफ कहा कि वहां किसी भी फैक्ट्री या व्यवसाय का संचालन नहीं किया जा सकेगा.

दरअसल, मंगलवार दोपहर को तिलजला के घनी आबादी वाले इलाके में एक चमड़े की फैक्ट्री में आग लग गई. इसमें कई गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि दो लोगों की मौत हो गई थी. जांच अधिकारियों ने बताया कि यह फैक्ट्री अवैध रूप से चल रही थी और इसके पास इमारत का कोई स्वीकृत नक्शा या प्लान नहीं था. 

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इसके बाद इसे गिराने के निर्देश दिए गए. बुधवार को नगर निगम के अधिकारियों ने इमारत गिराने की कार्रवाई शुरू की थी, जिसके खिलाफ इसके मालिक ने कोर्ट का रुख किया. इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस राजा बसु चौधरी ने कहा कि जिस तरह हर जगह अवैध निर्माण हो रहा है, उसने बेहद गंभीर स्थिति पैदा कर दी है और इस पर नियंत्रण जरूरी है. 

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि इस घटना में दो लोगों की मौत हुई थी और वहां फैक्ट्री चलाने की कोई अनुमति नहीं थी, इसलिए फिलहाल उस परिसर में किसी तरह का व्यवसाय नहीं चलाया जा सकता. हालांकि, अभी के लिए संपत्ति को तोड़े जाने पर रोक लगाई जाती है.

कोर्ट ने यह भी कहा कि नगर निगम और पुलिस कानून के अनुसार अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं. मामले से जुड़े सभी पक्षों को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया है. मामले की अगली सुनवाई 22 जून को होगी. 

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अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि यदि याचिकाकर्ता की संपत्ति का कोई हिस्सा पहले ही तोड़ा जा चुका है तो नगर निगम इस मामले पर याचिकाकर्ता के साथ चर्चा करे. कोर्ट का यह निर्देश संभावित नुकसान और आगे की कार्रवाई को लेकर संतुलन बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.

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