I-PAC रेड में कुछ मिला या नहीं? हाईकोर्ट में ED ने दिया साफ जवाब, अब सुप्रीम कोर्ट की बारी

I-PAC रेड को लेकर तृणमूल कांग्रेस और प्रवर्तन निदेशालय के बीच चल रही कानूनी खींचतान में कलकत्ता हाईकोर्ट ने अहम मोड़ देते हुए टीएमसी की याचिका निपटा दी. कोर्ट ने ईडी के उस बयान को रिकॉर्ड किया, जिसमें एजेंसी ने साफ कहा कि 8 जनवरी की तलाशी के दौरान किसी भी तरह का दस्तावेज़ या डेटा जब्त नहीं किया गया. अब मामला सुप्रीम कोर्ट में सुना जाएगा.

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I-PAC रेड पर बड़ा अपडेट: हाईकोर्ट में ED का बयान दर्ज, केस निपटा. (Photo: PTI) I-PAC रेड पर बड़ा अपडेट: हाईकोर्ट में ED का बयान दर्ज, केस निपटा. (Photo: PTI)

सृष्टि ओझा / संजय शर्मा

  • कोलकाता ,
  • 14 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:59 PM IST

कलकत्ता हाईकोर्ट ने बुधवार को इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) पर हुई ED रेड से जुड़े मामले में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) की याचिका को निपटा दिया. अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के उस बयान को रिकॉर्ड किया, जिसमें एजेंसी ने कहा कि 8 जनवरी को हुई तलाशी के दौरान किसी तरह का कोई दस्तावेज, डेटा या डिजिटल सामग्री जब्त नहीं की गई.

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TMC की ओर से दलील दी गई थी कि अगर ED का ये बयान औपचारिक रूप से कोर्ट रिकॉर्ड में दर्ज हो जाए कि कुछ भी जब्त नहीं हुआ है तो उनकी याचिका निपटाई जा सकती है. इसके बाद हाईकोर्ट ने ED का बयान रिकॉर्ड करते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया.

TMC ने सिर्फ डेटा सुरक्षा की मांग की थी

सुनवाई के दौरान तृणमूल कांग्रेस ने साफ किया कि वो सिर्फ एक सीमित राहत चाहती है. अगर तलाशी के दौरान पार्टी से जुड़ा कोई राजनीतिक रूप से संवेदनशील डेटा लिया गया हो तो उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए.

TMC ने ये भी कहा कि उसे ये आशंका है कि पिछले छह सालों का राजनीतिक डेटा लिया जा सकता है, लेकिन वो याचिका वापस नहीं ले रही थी, बल्कि सिर्फ ED के बयान को कोर्ट रिकॉर्ड में दर्ज कराना चाहती थी.

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ED ने कोर्ट को निर्देश पर साफ तौर पर बताया कि ना तो कोई रिकॉर्ड जब्त किया गया, ना कोई दस्तावेज लिया गया और ना ही किसी डेटा का बैकअप बनाया गया. हाईकोर्ट ने तलाशी की पंचनामा रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि कुछ भी जब्त किए जाने का कोई सबूत नहीं है. इसके बाद अदालत ने कहा कि अब TMC की याचिका में कुछ भी शेष नहीं बचता और इसे निपटा दिया.

ED ने याचिका को अवैध बताया

ED ने TMC की याचिका पर आपत्ति जताते हुए कहा कि ये याचिका बनाए रखने लायक ही नहीं है. एजेंसी ने दलील दी कि जिसने हलफनामा दाखिल किया, वो न तो तलाशी के दौरान मौजूद था और न ही उसका उन परिसरों से कोई सीधा संबंध था, जहां रेड हुई थी.

ED ने कहा कि याचिका सिर्फ आशंकाओं पर आधारित है और उसमें ये तक नहीं बताया गया कि कौन-सा 'संवेदनशील डेटा' जब्त किया गया है, जबकि हकीकत ये है कि कुछ भी जब्त नहीं किया गया.

मामला सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा

इस बीच, इस पूरे मामले से जुड़ा एक अहम अपडेट ये है कि अब ये विवाद सुप्रीम कोर्ट में भी सुना जाएगा. कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा कि ED की याचिका और सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले एक जैसे हैं, इसलिए सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के सामने ही होनी चाहिए. ED द्वारा दाखिल विशेष अनुमति याचिका (SLP) को सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ के सामने मैटर नंबर 27 के तौर पर सूचीबद्ध कर दिया है.

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अब गुरुवार को ED सुप्रीम कोर्ट में अपनी SLP पर दलीलें रखेगी.इस मामले में पश्चिम बंगाल सरकार पहले ही कैविएट दाखिल कर चुकी है, जिसके बाद ED ने SLP दायर की.

I-PAC ऑफिस और प्रतीक जैन के घर हुई थी रेड

8 जनवरी को ED ने कोलकाता में राजनीतिक सलाहकार कंपनी I-PAC के ऑफिस और उसके निदेशक प्रतीक जैन के घर पर तलाशी ली थी. यह कार्रवाई कथित करोड़ों रुपये के कोयला तस्करी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में की गई थी.

ED का आरोप है कि रेड के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद वहां पहुंचीं और अहम दस्तावेज व इलेक्ट्रॉनिक उपकरण हटाए. हालांकि, ममता बनर्जी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए ED पर अधिकारों के दुरुपयोग का आरोप लगाया. इसके बाद ED ने मुख्यमंत्री के खिलाफ CBI जांच की मांग करते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था, जिसकी सुनवाई अब आगे बढ़ेगी.

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