आयकर विभाग की टीम ने 25 फरवरी को लखनऊ के गोमतीनगर स्थित बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के आवास पर छापेमारी की. बलिया की रसड़ा सीट से इकलौते विधायक उमाशंकर के घर लगभग 30 अधिकारियों ने पहुंचकर वित्तीय दस्तावेजों की जांच शुरू की. इस कार्रवाई के बाद उनके समधी और यूपी सरकार के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने सोशल मीडिया पर विधायक के पक्ष में बयान जारी किया. मंत्री ने बताया कि उमाशंकर सिंह पिछले ढाई साल से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं और वर्तमान में आइसोलेशन में हैं. उन्होंने इस नाजुक समय में की गई छापेमारी को मानवीय संवेदनाओं के खिलाफ बताया है.
रिश्तेदारी का हवाला और खराब सेहत का जिक्र
मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने फेसबुक पोस्ट के जरिए अपनी पीड़ा व्यक्त की. उन्होंने लिखा कि उमाशंकर सिंह के घर में उनकी बिटिया ब्याही है और वह लंबे समय से जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं.
मंत्री के अनुसार, विधायक की हालत ऐसी है कि उनके कमरे में नर्स और मेडिकल स्टाफ के अलावा किसी को जाने की इजाजत नहीं है. उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी कठिन परिस्थितियों में कौन सी संस्था या राजनेता इतना संवेदनहीन हो सकता है जो उनके घर छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम दे.
व्यवसाय बंद और आइसोलेशन में विधायक
दिनेश प्रताप सिंह ने यह भी साफ किया कि गंभीर बीमारी के चलते उमाशंकर सिंह का सारा बिजनेस और कारोबार लगभग ठप हो चुका है. उनका पूरा समय और धन केवल इलाज और सांसें बचाने में खर्च हो रहा है. वह अपनी बीमारी के कारण विधानसभा सत्र में भी एक घंटे के लिए शामिल नहीं हो सके और पूरी तरह आइसोलेशन में रह रहे हैं. मंत्री ने चेतावनी दी कि यदि इस तनावपूर्ण माहौल में विधायक के जीवन को कोई हानि होती है, तो इसके लिए ये संवेदनहीन संस्थाएं ही जिम्मेदार होंगी.
न्यायालय की दया और संस्थाओं को नसीहत
मंत्री ने अपने पोस्ट में उल्लेख किया कि दुर्लभतम अपराधों में भी माननीय न्यायालय मानवीय आधार और बीमारी को देखते हुए दया दिखाते हैं. उन्होंने छापेमारी को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए ईश्वर से ऐसी संस्थाओं और राजनेताओं को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना की.
बता दें कि उमाशंकर सिंह बसपा के वर्तमान विधानसभा में एकमात्र विधायक हैं और सुबह से ही उनके आवास पर भारी पुलिस बल के साथ आयकर की कार्रवाई जारी है, जिससे प्रदेश के राजनीतिक हलकों में खलबली मची हुई है.
कुमार अभिषेक