क्यों संभल के एसपी ने पूरी SOG टीम को कर दिया सस्पेंड? कुल 8 पुलिसवालों पर गिरी गाज

संभल एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने अवैध वसूली और उगाही की शिकायतें सही पाए जाने पर एसओजी प्रभारी मोहित कुमार समेत आठ पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है. विभाग के भीतर हुई इस कार्रवाई से हड़कंप मच गया है.

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संभल एसपी केके बिश्नोई (File Photo ITG) संभल एसपी केके बिश्नोई (File Photo ITG)

अभिनव माथुर

  • संभल ,
  • 16 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:09 PM IST

Uttar Pradesh News: संभल जिले के एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के आरोपों में एसओजी टीम पर कड़ी कार्रवाई करते हुए प्रभारी सहित आठ पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है. पुलिस को शिकायत मिली थी कि एसओजी टीम ने ई-कचरा ले जाने वाले एक युवक और अश्लील वीडियो मामले में पकड़े गए दो अन्य युवकों को पैसे लेकर छोड़ दिया था. एसपी ने इन गंभीर शिकायतों की आंतरिक जांच कराई, जिसमें भ्रष्टाचार और उगाही के प्रमाण मिले. कार्रवाई के तहत एसओजी प्रभारी मोहित कुमार, दो हेड कांस्टेबल और पांच कांस्टेबलों को सस्पेंड कर दिया गया है.

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ई-कचरा और अश्लील वीडियो से जुड़ा है मामला

एसओजी टीम के खिलाफ भ्रष्टाचार की दो मुख्य शिकायतें सामने आई थीं. पहले मामले में 2 फरवरी को मुरादाबाद के बिलारी निवासी ई-कचरा व्यापारी आस मोहम्मद को हिरासत में लिया गया, जिसे टीम ने पैसे लेकर रिहा कर दिया. दूसरे मामले में एक युवक-युवती के अश्लील वीडियो के आधार पर दो युवकों को पकड़ा गया था, जिन्हें भी अवैध वसूली के बाद छोड़ दिया गया. एसपी ने जब इन प्रकरणों की गहराई से जांच कराई, तो आरोपों की पुष्टि हुई और टीम की संलिप्तता सही पाई गई.

पूरी एसओजी टीम पर गिरा निलंबन का गाज

भ्रष्टाचार के सबूत मिलने के बाद एसपी केके बिश्नोई ने एसओजी प्रभारी मोहित कुमार, हेड कांस्टेबल अरशद और कुलवंत सिंह को सस्पेंड किया. इनके साथ ही कांस्टेबल बृजेश तोमर, विवेक कुमार, हीरेश ठहनुआ, अजनबी और आयुष को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. एसपी की इस सख्त कार्यवाही ने महकमे में हलचल पैदा कर दी है. एसपी ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार से संबंधित कोई भी शिकायत बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई जारी रहेगी. 

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भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति

मामले की जानकारी देते हुए एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत यह कदम उठाया गया है. प्रथम दृष्टया जांच में भ्रष्टाचार के ठोस सबूत मिले थे, जिसके आधार पर पूरी टीम को निलंबित किया गया है. उन्होंने कड़ा संदेश दिया कि जनता की सुरक्षा के लिए तैनात पुलिसकर्मी अगर खुद अवैध वसूली में शामिल होंगे, तो उनके खिलाफ सख्त से सख्त विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.

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