वाराणसी यूपी कॉलेज हत्याकांड: क्यों मंजीत चौहान को 'माफिया' कहते थे छात्र? भाई बोला- धमकाता था सूर्य प्रताप सिंह

वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज में छात्र सूर्य प्रताप सिंह की हत्या के मामले में आरोपी मंजीत चौहान के भाई का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इसमें उसने मर्डर की बात स्वीकारते हुए इसके पीछे दो साल से हो रही रैगिंग, जातिसूचक टिप्पणियों और मानसिक प्रताड़ना को मुख्य वजह बताया है.

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छात्र सूर्य प्रताप सिंह की हत्या में मंजीत चौहान गिरफ्तार (Photo- Screengrab) छात्र सूर्य प्रताप सिंह की हत्या में मंजीत चौहान गिरफ्तार (Photo- Screengrab)

रोशन जायसवाल

  • वाराणसी,
  • 23 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 1:04 PM IST

वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज में पिछले हफ्ते बीए सेकंड ईयर के छात्र मंजीत चौहान ने बीएससी सेकंड ईयर के छात्र सूर्य प्रताप सिंह की हत्या कर दी. यह वारदात कॉलेज परिसर में अंजाम दी गई, जिसका सनसनीखेज वीडियो भी सामने आया था. वर्तमान में आरोपी मंजीत 14 दिनों की न्यायिक रिमांड पर जेल में है. इस बीच इंस्टाग्राम पर 'wealsoneedjustice' अकाउंट से मंजीत के छोटे भाई ने एक वीडियो जारी कर घटना के पीछे की वजह साझा की है. भाई के अनुसार, सूर्य प्रताप और उसके हॉस्टल के साथी पिछले दो साल से मंजीत की रैगिंग कर रहे थे और उसे जाति को लेकर डराते-धमकाते थे.

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दो साल की प्रताड़ना का दावा

मंजीत के भाई ने वीडियो में बताया कि उसके भाई को रोज परेशान किया जाता था. उसे 'चौहान' के बजाय 'राजपूत नोनिया' कहकर चिढ़ाया जाता था. भाई का कहना है कि मंजीत ने कई बार उन्हें क्षमा किया, लेकिन जब सहने की क्षमता खत्म हो गई, तब उसने यह आत्मघाती कदम उठाया. 

उसने यह भी स्पष्ट किया कि मंजीत वारदात के बाद भागा नहीं था, बल्कि उसने वकीलों के जरिए कोर्ट में सरेंडर किया था. मंजीत के भाई ने कहा कि स्वाभिमान को ठेस पहुंचने पर ही उसने यह रास्ता चुना.

'माफिया' नाम के पीछे की सच्चाई

सोशल मीडिया पर मंजीत के नाम के साथ 'माफिया' शब्द जुड़ने पर भाई ने सफाई दी. उसने बताया कि मंजीत एक वेब सीरीज 'कर्ट्स कट्टा' में स्पॉट बॉय का काम करता था. वहां इस्तेमाल होने वाले नकली कट्टे के साथ फोटो पोस्ट करने पर पुलिस उसे थाने ले गई थी. पूछताछ के बाद सच्चाई पता चलने पर पुलिस ने उसे छोड़ दिया था, लेकिन दोस्तों ने उसे 'माफिया' कहकर चिढ़ाना शुरू कर दिया. इसी मजाक के चलते उसने अपने नाम के साथ माफिया लगाना शुरू किया, जबकि उसका ऐसा कोई इरादा नहीं था.

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