7 गोलियां खाकर भी नहीं डिगे, कान पकड़कर उठक-बैठक... इस्तीफा देने वाले IAS रिंकू सिंह की कहानी

रिंकू सिंह राही का कहना है कि काम का अवसर न मिलने के कारण उन्होंने इस्तीफा दिया. वह राजस्व परिषद में अटैच थे. शाहजहांपुर में वकीलों के सामने उठक-बैठक करने का उनका वीडियो वायरल हुआ था. इससे पहले 2009 में उन्होंने करोड़ों के घोटाले का खुलासा किया, जिसके बाद उन पर जानलेवा हमला हुआ था. गंभीर चोटों के बावजूद उन्होंने सख्त प्रशासनिक छवि के लिए जाने गए.

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घोटाला उजागर करने के बाद रिंकू सिंह पर गोलियां चली थीं. Photo ITG घोटाला उजागर करने के बाद रिंकू सिंह पर गोलियां चली थीं. Photo ITG

aajtak.in

  • लखनऊ,
  • 01 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 8:10 AM IST

उत्तर प्रदेश कैडर के 2022 बैच के आईएएस अफसर रिंकू सिंह राही ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. रिंकू सिंह लंबे समय से राजस्व परिषद में अटैच थे. रिंकू का कहना है कि उन्हें सक्रिय रूप से काम करने का अवसर नहीं मिल रहा था. रिंकू सिंह तब चर्चा में आए थे जब उन्होंने वकीलों के सामने कान पकड़कर उठक-बैठक लगाई थी.

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यह पूरा मामला शाहजहांपुर से जुड़ा है, जहां रिंकू सिंह राही का एक वीडियो काफी चर्चा में रहा. वीडियो में वह वकीलों की भीड़ के बीच बिना किसी रौब या गुस्से के, कान पकड़कर उठक-बैठक करते नजर आए. यह देखकर लोग चौंक गए, क्योंकि यही अधिकारी 2009 में 83 करोड़ रुपये के घोटाले का पर्दाफाश करने के बाद बदमाशों की गोलियों का सामना कर चुका था. उस हमले में वह बच तो गए, लेकिन उनके चेहरे को गंभीर नुकसान पहुंचा था, फिर भी उनकी ईमानदारी और हिम्मत बरकरार रही.

दरअसल, कुछ महीने पहले रिंकू सिंह को पुवायां तहसील में एसडीएम के तौर पर जिम्मेदारी मिली थी. निरीक्षण के दौरान उन्होंने एक व्यक्ति को शौचालय के बाहर गंदगी करते देखा, जिस पर नाराज होकर उन्होंने उसे उठक-बैठक करने को कहा. इस कार्रवाई से नाराज वकीलों ने विरोध शुरू कर दिया और धरने पर बैठ गए. हालात को शांत करने के लिए राही खुद वकीलों के बीच पहुंचे, माफी मांगी और सार्वजनिक रूप से उठक-बैठक कर संदेश दिया कि नियम सबके लिए समान हैं. यही वीडियो बाद में तेजी से वायरल हो गया.

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रिंकू सिंह राही का मानना है कि गलती होने पर सजा जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी गलती दोहराई न जाए. उन्होंने खुद भी उठक-बैठक कर यह दिखाने की कोशिश की कि जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटना चाहिए.

करोड़ों रुपये के घोटाले का खुलासा किया
उनकी ईमानदारी की मिसाल 2009 में भी देखने को मिली थी, जब वह मुजफ्फरनगर में समाज कल्याण अधिकारी थे. उस समय उन्होंने करोड़ों रुपये के घोटाले का खुलासा किया, जिससे नाराज लोगों ने उन पर हमला कर दिया और उन्हें सात गोलियां मारीं. इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और अलग-अलग जिलों में तबादलों के बावजूद ईमानदारी से काम करते रहे.

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