Uttar Pradesh News: बहराइच की महसी तहसील में तैनात एसडीएम (ज्वाइंट मजिस्ट्रेट) आलोक प्रसाद के खिलाफ उनके सुरक्षा में तैनात होमगार्ड रमाकांत मिश्रा ने अभद्रता और उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई. होमगार्ड का आरोप है कि एक दिव्यांग व्यक्ति को एसडीएम से मिलवाने पर आईएएस अधिकारी ने उसे जातिसूचक गालियां दीं, जूते से मारने और चोटी उखाड़ने की धमकी दी. इसके साथ ही उसे दंड स्वरूप तहसील ग्राउंड के पांच चक्कर लगाने का आदेश दिया गया. हालांकि, जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी के निर्देश पर मुख्य राजस्व अधिकारी द्वारा की गई जांच में इन आरोपों को तथ्यहीन और निराधार पाया गया है.
होमगार्ड का आरोप और जांच रिपोर्ट
पीड़ित होमगार्ड रमाकांत मिश्रा के अनुसार, एसडीएम ने अपने चपरासी और गनर के जरिए उसे ग्राउंड के चक्कर लगवाने और उठक-बैठक करने की सजा दी. इस मामले में होमगार्ड यूनियन ने जिलाधिकारी से कार्रवाई की मांग की थी.
जिलाधिकारी के निर्देश पर मुख्य राजस्व अधिकारी देवेंद्र पाल सिंह ने जांच की, जिसमें उन्होंने पाया कि शिकायतकर्ता कोई भी ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सका. जांच अधिकारी ने उस दिव्यांग व्यक्ति का वीडियो भी जारी किया है, जिसने एसडीएम के खिलाफ लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है.
विवादों से पुराना नाता
2022 बैच के आईएएस अधिकारी आलोक प्रसाद का विवादों से पुराना नाता रहा है. बहराइच में उनकी पहली तैनाती कैसरगंज तहसील में हुई थी, जहां न्यायिक कार्यशैली को लेकर अधिवक्ताओं ने उनकी कोर्ट का बहिष्कार कर दिया था. भारी विरोध के बाद उन्हें वहां से हटाकर महसी तहसील भेजा गया, लेकिन यहां भी उनकी मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं. होमगार्ड के आरोपों के बीच अब महसी तहसील के अधिवक्ताओं ने भी जिलाधिकारी को पत्र लिखकर उनकी कार्यशैली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.
प्रशासनिक करियर और वर्तमान स्थिति
आलोक प्रसाद एक मेधावी पृष्ठभूमि से आते हैं, वे 2018 में पीसीएस और 2022 में आईपीएस के रूप में भी चयनित हो चुके हैं. वर्तमान में वे महसी में एसडीएम के पद पर कार्यरत हैं. सूचना विभाग के मीडिया सेल के अनुसार, प्रशासन ने जांच रिपोर्ट के आधार पर उन्हें क्लीन चिट दे दी है. हालांकि, स्थानीय अधिवक्ताओं और कर्मचारियों के बीच उन्हें लेकर असंतोष बना हुआ है. अब देखना यह है कि अधिवक्ताओं के नए शिकायती पत्र पर जिला प्रशासन क्या रुख अपनाता है.
राम बरन चौधरी