कितनी अलग है विक्रमादित्य वैदिक घड़ी और क्या है इसकी खासियत? काशी विश्वनाथ मंदिर में PM मोदी ने जाना राज

Vikramaditya Vedic Clock: क्या है विक्रमादित्य वैदिक घड़ी? काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में PM मोदी ने जाना इस अनोखी घड़ी का राज. जानें क्यों यह घंटों के बजाय 'मुहूर्त' में बताती है समय और किसने इसे तैयार किया है...

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काशी विश्वनाथ मंदिर में PM मोदी ने परखा प्राचीन काल-गणना का विज्ञान.(Photo:ITG) काशी विश्वनाथ मंदिर में PM मोदी ने परखा प्राचीन काल-गणना का विज्ञान.(Photo:ITG)

aajtak.in

  • वाराणसी/उज्जैन,
  • 29 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 7:38 PM IST

विक्रमादित्य वैदिक घड़ी पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच रही है. वाराणसी दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस घड़ी के आकर्षण से बंधे नजर आए. उन्होंने काशी विश्वनाथ परिसर में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का अवलोकन किया. मध्यप्रदेश के महाकाल की नगरी उज्जैन से शुरू हुआ विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का सफर देश के अन्य तीर्थ स्थलों से भी गुजर रहा है. इस वैदिक घड़ी की खासियत है कि यह समय तो बताती ही है, साथ ही सूर्योदय, मुहूर्त, ग्रहों की स्थिति और पंचांग की जानकारी भी देती है. 

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घड़ी को देखते ही इसकी पूर्ण जानकारी ली. इसको न सिर्फ पास से देखा, बल्कि इसकी कार्यप्रणाली भी समझी. इस घड़ी को कुछ महीने पहले ही काशी विश्वनाथ मंदिर के परिसर में स्थापित किया गया है. यह वैदिक घड़ी इसी महीने की 3 तारीख को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेंट की थी. ठीक अगल दिन इसे काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थापित कर दिया गया था.

किसने बनाई और कब हुई स्थापित?
- इस घड़ी को मध्य प्रदेश के संस्कृति विभाग के तहत 'महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ, उज्जैन' के विद्वानों ने विकसित किया है.

- प्रधानमंत्री मोदी ने विश्व की इस प्रथम वैदिक घड़ी का लोकार्पण 29 फरवरी 2024 को उज्जैन में किया था.

- MP के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 3 अप्रैल 2026 को यह घड़ी यूपी के CM योगी आदित्यनाथ को भेंट की थी, जिसे 4 अप्रैल 2026 को काशी विश्वनाथ मंदिर प्रांगण में स्थापित किया गया.

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कितनी अलग है वैदिक घड़ी?
- जहां आम घड़ियां (GMT) रात के 12 बजे से दिन की शुरुआत मानती हैं और 24 घंटों के चक्र पर आधारित होती हैं, वहीं वैदिक घड़ी पूरी तरह अलग है.

यह घड़ी एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय के मध्य समय की गणना करती है. 

सूर्योदय से सूर्यास्त- 15 मुहूर्त

सूर्यास्त से अगले सूर्योदय- 15 मुहूर्त

- इसमें पूरे दिन को 24 घंटों के बजाय 30 मुहूर्तों में विभाजित किया गया है. 

- यह घड़ी जिस स्थान पर स्थापित है, वहां के सटीक सूर्योदय के समय के अनुसार खुद को सिंक (Sync) करती है. देखें PM मोदी का VIDEO:- 

वैदिक घड़ी की 5 बड़ी खासियतें
- इस घड़ी के डिजिटल डिस्प्ले पर सिर्फ समय ही नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा की समस्त जानकारियां उपलब्ध हैं.

- यह मुहूर्त, कला और काष्ठा (समय की सबसे छोटी इकाई) को प्रदर्शित करती है. 

मुहूर्त, कला और काष्ठा को समझिए

एक मुहूर्त सामान्यतः 48 मिनट के बराबर होता है, किंतु इसकी अवधि घड़ी की भौगोलिक स्थिति, सूर्योदय-सूर्यास्त समय और सूर्य के कोण के अनुसार परिवर्तित होती है.

मुहूर्त- 30 कला

कला- 96 सेकंड

कला- 30 काष्ठा

काष्ठा- 3.2 सेकंड

- इस घड़ी में विक्रम सम्वत् मास, तिथि, नक्षत्र, योग और करण की सटीक जानकारी मिलती है.

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- घड़ी में ग्रहों की वर्तमान स्थिति, भद्रा, चंद्र स्थिति और सूर्य राशि का विवरण भी शामिल है.

- ब्रह्म मुहूर्त से लेकर वरुण मुहूर्त तक, कौन सा समय शुभ है, यह घड़ी वास्तविक समय में बताती है.

- इसका मापन उज्जैन के पास स्थित डोंगला वेधशाला को आधार मानकर किया गया है, जो खगोलीय दृष्टि से शून्य रेखा (Prime Meridian) माना जाता है. 

- बता दें कि उज्जैन में कर्क रेखा पर स्थित होने के कारण इसे वैज्ञानिक और खगोलीय रूप से सटीक माना जाता है.

वैदिक कालगणना पर आधारित है यह अनोखी घड़ी.

उज्जैन को 'प्राइम मेरिडियन' बनाने का संकल्प
मुख्यमंत्री मोहन यादव का मानना है कि उज्जैन प्राचीन काल से ही काल-गणना का केंद्र रहा है. वे पश्चिमी संस्कृति की ओर से थोपे गए ग्रीनविच मीन टाइम (GMT) यानी पृथ्वी के घूमने पर आधारित एक समय मानक के बजाय उज्जैन की सटीक खगोलीय गणना को पुनर्स्थापित करना चाहते हैं.

वाराणसी के बाद अब अयोध्या के राम मंदिर और देश के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों में ऐसी वैदिक घड़ियां लगाने की योजना है. 

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