बनारस में बनारसी यादव का एनकाउंटर... सुपारी किलर पर पुलिस ने रखा था एक लाख का इनाम

वाराणसी में यूपी एसटीएफ की टीम के साथ हुई मुठभेड़ में एक लाख रुपये का इनामी और वांछित सुपारी किलर बनारसी यादव मारा गया. पुलिस का कहना है कि वह कॉलोनाइजर महेंद्र गौतम हत्याकांड का मुख्य अभियुक्त था. उस पर दो दर्जन से अधिक गंभीर आपराधिक केस दर्ज थे.

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बनारसी यादव को एसटीएफ ने किया एनकाउंटर. (File Photo: ITG) बनारसी यादव को एसटीएफ ने किया एनकाउंटर. (File Photo: ITG)

संतोष शर्मा / रोशन जायसवाल

  • वाराणसी,
  • 04 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:39 AM IST

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में यूपी एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक कुख्यात इनामी बदमाश को मुठभेड़ में ढेर कर दिया. मारा गया आरोपी बनारसी यादव एक लाख रुपये का इनामी था. वह कॉलोनाइजर महेंद्र गौतम की हत्या के मामले में सुपारी किलर के तौर पर वांछित चल रहा था.

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, बनारसी यादव पर दो दर्जन से ज्यादा गंभीर आपराधिक केस दर्ज थे. एसटीएफ को खुफिया इनपुट मिला था कि बनारसी यादव इलाके में पहुंचा है और किसी वारदात की फिराक में घूम रहा है. 

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सूचना के आधार पर टीम ने चौबेपुर थाना क्षेत्र के बारियासनपुर रिंग रोड के पास घेराबंदी की. इसी दौरान संदिग्ध दिखे बदमाश को रोकने की कोशिश की गई तो उसने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी.

इस दौरान अपने बचाव में एसटीएफ की टीम ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें बदमाश बनारसी यादव पुलिस की गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गया. मुठभेड़ के बाद उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया. घटना के बाद पूरे इलाके में पुलिस बल तैनात कर दिया गया और सर्च ऑपरेशन भी चलाया गया.

मौके से एसटीएफ टीम ने दो पिस्टल और भारी मात्रा में कारतूस बरामद किए हैं. अधिकारियों के अनुसार, बनारसी यादव संगठित आपराधिक नेटवर्क से जुड़ा था और कई गंभीर मामलों में उसकी तलाश की जा रही थी. उसकी गिरफ्तारी पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था.

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पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि उसके गिरोह में और कौन-कौन शामिल हैं तथा हाल के मामलों में उसकी क्या भूमिका रही. एसटीएफ और स्थानीय पुलिस संयुक्त रूप से आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है.

कौन था बनारसी यादव?

मुठभेड़ में मारे गए एक लाख रुपये के इनामी बदमाश बनारसी यादव का आपराधिक सफर दो दशक से ज्यादा पुराना रहा है. पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, बनारसी यादव पहली बार वर्ष 2003 में चोरी के एक मामले में गाजीपुर जिले के खानपुर थाने से जेल गया था. यहीं से उसका आपराधिक नेटवर्क से संपर्क बढ़ा और वह धीरे-धीरे बड़े अपराधियों के गिरोह से जुड़ता चला गया.

जेल में रहने के दौरान उसकी मुलाकात कई कुख्यात अपराधियों से हुई. इसके बाद उसने संगठित अपराध की दुनिया में कदम रखा और देखते ही देखते वह सुपारी लेकर हत्या करने वाले अपराधियों में गिना जाने लगा. पिछले करीब 23 वर्षों में उसने तीन हत्याओं और पांच से अधिक हत्या के प्रयास जैसी गंभीर वारदातों को अंजाम दिया.

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पुलिस के मुताबिक, बनारसी यादव का नाम गाजीपुर और आसपास के जिलों के बड़े अपराधियों में शामिल हो चुका था. उसका नेटवर्क इतना मजबूत हो गया था कि वह सफेदपोश और प्रभावशाली लोगों को भी धमकी देने लगा था. रंगदारी, सुपारी किलिंग और हमले जैसे मामलों में उसकी संलिप्तता सामने आती रही.

उसकी गिरफ्तारी मुश्किल होने की सबसे बड़ी वजह उसका तरीका था, वह वारदात के बाद तुरंत राज्य छोड़ देता था और लंबे समय तक फरार रहता था. पुलिस के अनुसार, वह मोबाइल फोन और बैंक खातों का इस्तेमाल नहीं करता था, जिससे उसकी लोकेशन ट्रेस करना बेहद कठिन हो जाता था.

कॉलोनाइजर महेंद्र गौतम की हत्या के बाद भी वह उत्तर प्रदेश छोड़कर मुंबई और कर्नाटक में छिपा रहा. गिरफ्तारी से बचने के लिए वह अक्सर अकेले ठिकाने बदलकर रहता था. 

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