'हजारों साल से सवर्ण गाली खा रहे, इसमें नई बात क्या है', नए UGC नियमों पर बोले BJP विधायक अनिल सिंह; बताई क्षत्रिय की परिभाषा

सोशल मीडिया पर एक विधायक का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने सवर्ण समाज के त्याग और उन पर फिल्मों में दिखाए जाने वाले चित्रण पर खुलकर अपनी राय रखी है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और क्षत्रिय धर्म की व्याख्या करते हुए समाज से बड़ा हृदय रखने की अपील की है.

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उन्नाव की पुरवा विधानसभा से बीजेपी विधायक अनिल सिंह (Photo- ITG) उन्नाव की पुरवा विधानसभा से बीजेपी विधायक अनिल सिंह (Photo- ITG)

सूरज सिंह

  • उन्नाव ,
  • 28 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:03 PM IST

नए UGC नियमों को लेकर पूरे देश में सवर्ण समाज के लोग विरोध कर रहे हैं. सवर्ण अधिकारी से लेकर नेता तक भी इस UGC बिल का विरोध करते दिखाई दे रहे हैं. इस बीच यूपी के उन्नाव के बीजेपी विधायक ने भी इसकी मुखाफलत की है. उन्होंने एक जनसभा में अपना दर्द बयां किया है. उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

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आपको बता दें कि उन्नाव की पुरवा विधानसभा से बीजेपी विधायक अनिल सिंह ने बीते दिन एक जनसभा में यूजीसी बिल के खिलाफ बयान दिया. उन्होंने बातों-बातों में कहा कि शोषणकर्ता के रूप में हिंदी फिल्मो में ठाकुरों के नाम का इस्तेमाल होता रहा है, अब उसे कानून का रूप दिया जा रहा है जो कि गलत है. 

बीजेपी विधायक ने अपने विधानसभा क्षेत्र के असोहा ब्लॉक में आयोजित जनसभा के दौरान सवर्ण समाज और जाति आधारित भेदभाव पर बयान दिया है. उन्होंने 1 मिनट 53 सेकंड के वायरल वीडियो में कहा कि सवर्ण समाज हजारों साल से गालियां खा रहा है, जो कि कोई नई बात नहीं है. विधायक ने यह बात विश्वविद्यालय नियमों और सुप्रीम कोर्ट द्वारा रैगिंग व मारपीट पर लिए गए संज्ञान के संदर्भ में कही. उन्होंने स्पष्ट किया कि सवर्ण समाज को बदनाम करने के लिए कुछ गिरोह काम करते थे, जिन्हें खत्म करने हेतु सामान्य व्यवस्था लागू की गई है. हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकार अभी इस नए बिल पर विचार कर रही है और इसे पूरी तरह लागू नहीं किया गया है.

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फिल्मों में सवर्णों के चित्रण पर उठाए सवाल

विधायक ने अपने संबोधन में बॉलीवुड फिल्मों का उदाहरण देते हुए कहा कि आज फिल्मों में अक्सर ठाकुरों को नकारात्मक रूप में दिखाया जाता है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि फिल्मों के अंत में "ठाकुर साहब मारे जाते हैं", लेकिन समाज ने कभी इसका कड़ा विरोध नहीं किया. उन्होंने 'ठाकुर का कुआं', 'बैल' और 'खेत' जैसे प्रतीकों का जिक्र करते हुए समाज से सवाल किया कि आखिर ऐसी फिल्में हमारे ऊपर ही क्यों बनती हैं.

क्षत्रिय की नई परिभाषा और धैर्य की अपील

अपने भाषण के दौरान विधायक ने सवर्ण समाज को "त्याग और तपस्वी" बताया जो देश के लिए हमेशा खड़ा रहता है. उन्होंने क्षत्रिय शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि क्षत्रिय कोई जाति नहीं है, बल्कि जो सबके लिए 'छत्र' बनकर खड़ा रहे, वही असली क्षत्रिय है. उन्होंने सवर्णों से बड़ा हृदय रखने की अपील करते हुए कहा कि सवर्ण समाज को बदनाम करने की कोशिशों के बावजूद उन्हें विचलित नहीं होना चाहिए.

सरकार के रुख और कोर्ट के आदेश पर चर्चा

विधायक ने असोहा ब्लॉक की सभा में लोगों को जानकारी दी कि सुप्रीम कोर्ट ने रैगिंग और मारपीट जैसी घटनाओं पर संज्ञान लेकर व्यवस्थाएं बदली हैं. उन्होंने यह भी साफ किया कि वर्तमान में सरकार ने किसी भी नई बात को थोपा नहीं है. सरकार अभी इन विषयों और बिलों पर विचार कर रही है, इसे पूरी तरह पास या लागू नहीं किया गया है. उन्होंने समर्थकों को समझाया कि कानून हर जगह लागू है.

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