उत्तर प्रदेश पुलिस सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा को लेकर एक बड़ा साइबर फ्रॉड सामने आया है. यूपी एसटीएफ की आगरा टीम ने टेलीग्राम चैनल के जरिए अभ्यर्थियों को ठगने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है और राजस्थान के सवाई माधोपुर से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. आरोपियों पर यूपी पुलिस एसआई भर्ती परीक्षा का पेपर उपलब्ध कराने के नाम पर अभ्यर्थियों से पैसे ऐंठने का आरोप है.
कैसे सामने आया मामला
यूपी पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड लखनऊ द्वारा आयोजित उपनिरीक्षक और समकक्ष पदों की सीधी भर्ती परीक्षा-2025 की शुचिता बनाए रखने के लिए सोशल मीडिया और इंटरनेट प्लेटफॉर्म की लगातार निगरानी की जा रही थी. इसी दौरान एसटीएफ को टेलीग्राम पर कुछ संदिग्ध चैनल दिखाई दिए, जिनके नाम यूपी एसआई पुलिस 2026, रिजल्ट पैनल पीवीटी टीएम, यूपी एसआई एग्जाम पेपर 2026 बताए गए. इन चैनलों के जरिए दावा किया जा रहा था कि यूपी एसआई भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया जाएगा.
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ऐसे करते थे ठगी
जांच में सामने आया कि आरोपी टेलीग्राम चैनल और ग्रुप बनाकर अभ्यर्थियों को झांसे में लेते थे. वे दावा करते थे कि उनके पास भर्ती परीक्षा का असली पेपर है और पैसे देने पर प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया जाएगा. इस तरह अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूलने की तैयारी की जा रही थी.
तकनीकी जांच के बाद कार्रवाई
तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर यूपी एसटीएफ की टीम राजस्थान पहुंची. सवाई माधोपुर के साइबर पुलिस स्टेशन में मुकदमा संख्या 05/2026 दर्ज किया गया. जिसमें भारतीय दंड संहिता की धाराएं 319(2), 318(4), 316(2), 61(2)(ए) बीएनएस और आईटी एक्ट की धारा 66C व 66D लगाई गईं. इसके बाद आगरा एसटीएफ टीम ने राजस्थान पुलिस के सहयोग से तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया.
गिरफ्तार आरोपी
एसटीएफ आगरा के अनुसार गिरफ्तार किए गए आरोपियों के नाम- सुमित मीणा उर्फ लोडा, शाहिल, साजिद हैं, सभी आरोपी राजस्थान के रहने वाले हैं. पुलिस ने आरोपियों के पास से एक वीवो कंपनी का मोबाइल फोन बरामद किया है, जिसका इस्तेमाल टेलीग्राम चैनल चलाने में किया जा रहा था.
पूछताछ में क्या खुलासा हुआ
पूछताछ में आरोपी शाहिल ने बताया कि करीब 15–20 दिन पहले उसकी मुलाकात साजिद से हुई थी. साजिद ने उससे सिम कार्ड और बैंक खाते उपलब्ध कराने को कहा और इसके लिए उसे 5 हजार रुपये दिए. इसके बाद शाहिल ने अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाए और सिम कार्ड उपलब्ध कराए.
गिरोह का मास्टरमाइंड
जांच में यह भी सामने आया कि सुमित मीणा का संपर्क अपने गांव के ही एक व्यक्ति सुमेर सिंह मीणा से था. सुमेर सिंह मीणा ने टेलीग्राम पर “रिजल्ट पैनल” नाम से ग्रुप बनाकर लोगों से पैसे लेकर भर्ती परीक्षा का पेपर उपलब्ध कराने का झांसा देने की योजना बनाई थी.
फिलहाल पुलिस का कहना है कि इस मामले में अन्य संदिग्ध लोगों की तलाश की जा रही है. एसटीएफ और पुलिस मिलकर पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है.
अरविंद शर्मा