गंगा में मांसाहारी भोजन के अवशेष फेंकने से हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी के गंगा इफ्तार पार्टी मामले में कहा कि गंगा में मांसाहारी भोजन के अवशेष फेंकना हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत कर सकता है. कोर्ट ने खेद जताने और भविष्य में ऐसी गलती न दोहराने के आश्वासन के आधार पर पांच आरोपियों को जमानत दे दी. यह मामला मार्च में दर्ज हुआ था, जब आरोप लगा था कि नाव पर इफ्तार के दौरान मांसाहारी भोजन के अवशेष गंगा में फेंके गए थे.

Advertisement
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपियों को जमानत दे दी. (Photo: ITG) इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपियों को जमानत दे दी. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • प्रयागराज,
  • 17 मई 2026,
  • अपडेटेड 11:36 PM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी में नाव पर आयोजित इफ्तार पार्टी के दौरान गंगा नदी में मांसाहारी भोजन के अवशेष फेंकने के मामले में अहम टिप्पणी की है. अदालत ने कहा कि गंगा में इस तरह का कृत्य हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत कर सकता है.

यह टिप्पणी न्यायमूर्ति राजीव लोचन शुक्ल ने पांच आरोपियों को जमानत देते हुए की. अदालत ने कहा कि आरोपियों ने अपने कृत्य पर खेद जताया है और उनके परिवारों ने भी समाज को पहुंची पीड़ा पर अफसोस व्यक्त किया है.

Advertisement

कोर्ट ने क्या टिप्पणी की?
15 मई को पारित आदेश में अदालत ने मोहम्मद आजाद अली, मोहम्मद तहसीम, निहाल अफरीदी, मोहम्मद तौसीफ अहमद और मोहम्मद अनस को जमानत दी. अदालत ने माना कि आरोपियों का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है, वे काफी समय से जेल में हैं और भविष्य में ऐसी गलती दोबारा न करने का आश्वासन दिया है.

अदालत ने कहा कि मामले के तथ्यों को देखते हुए प्रथम दृष्टया जमानत देने का आधार बनता है. इससे पहले इसी मामले में 15 मई को न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा ने तीन अन्य आरोपियों मोहम्मद समीर, मोहम्मद अहमद रजा और मोहम्मद फैजान को भी जमानत दी थी.

मार्च में दर्ज हुआ था मामला
यह मामला 16 मार्च को दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है. शिकायत वाराणसी भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष रजत जायसवाल ने दर्ज कराई थी. आरोप है कि 15 मार्च को कुछ लोगों ने गंगा में नाव पर रोजा खोला, मांसाहारी भोजन किया और उसके अवशेष पवित्र नदी में फेंक दिए.

Advertisement

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था, जिनमें धार्मिक स्थल को अपवित्र करने और धार्मिक भावनाएं भड़काने से जुड़ी धाराएं शामिल हैं.

गौरतलब है कि एक अप्रैल को वाराणसी की सत्र अदालत ने आरोपियों की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि उनका कृत्य सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की मंशा दर्शाता है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement