मेरठ के शास्त्री नगर स्थित सेंट्रल मार्केट इन दिनों ध्वस्तीकरण की आशंका को लेकर सुर्खियों में है. सुप्रीम कोर्ट से व्यापारियों को इस मामले में कोई राहत नहीं मिल पाई है. अदालत ने मार्केट के निर्माण को अवैध मानते हुए ध्वस्तीकरण के आदेश दिए थे. इसके बाद से ही सेंट्रल मार्केट के व्यापारी और कई संगठन लगातार धरना प्रदर्शन कर रहे हैं.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में प्रस्तावित ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को लेकर व्यापारियों का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है. शुक्रवार को शास्त्री नगर की सेंट्रल मार्केट में सुबह से शाम तक दुकानों को बंद रखा गया. व्यापारी सेंट्रल मार्केट और आवास विकास परिषद के मुख्य प्रवेश द्वार पर धरने पर बैठ गए थे.
बीच धरने में पुलिस और किसान नेता आमने-सामने
व्यापारियों का आरोप है कि देर रात उन्हें वहां से जबरदस्ती हटाया गया और दो लोगों को हिरासत में ले लिया गया. इसी के विरोध में शनिवार को सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों के समर्थन में व्यापारी और किसान मजदूर संगठन के लोग जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए. प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि हिरासत में लिए गए दोनों लोगों को तुरंत रिहा किया जाए.
धरने के दौरान मेरठ के सीओ सिविल लाइन अभिषेक तिवारी और किसान संगठन के कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस भी हुई. धरना स्थल पर मौजूद अधिकारियों से बातचीत के दौरान सीओ ने कहा कि पुलिस वहां सभी के लिए खड़ी है और किसी को भी धमकाने की अनुमति नहीं दी जाएगी. उन्होंने कहा कि वह काफी देर से चुप थे लेकिन एक थाने के एसएसआई को लगातार धमकाया जा रहा है जो उचित नहीं है.
हिरासत और ध्वस्तीकरण को लेकर बढ़ा विवाद
इस दौरान किसान संगठन के एक कार्यकर्ता ने पूछा कि क्या पुलिस गिरफ्तारी करेगी। इस पर सीओ ने कहा कि उन्हें यह बताने की जरूरत नहीं कि पुलिस क्या करेगी और पहले उनकी बात सुनी जाए. उन्होंने कहा कि पुलिस सभी का सम्मान करती है लेकिन यदि किसी सिपाही का अपमान किया गया तो यह ठीक नहीं होगा. इसी दौरान जब व्यापारियों की बात उठी तो सीओ ने कहा कि सम्मानपूर्वक बात करनी हो तभी पुलिस वहां आएगी.
दरअसल शास्त्री नगर की सेंट्रल मार्केट का विवाद काफी समय से चल रहा है. कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एक कॉम्प्लेक्स को बुलडोजर से ध्वस्त भी किया जा चुका है. अदालत ने इस निर्माण को अवैध माना था. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने आवास विकास परिषद को ऐसी अन्य जगहों की पहचान करने के निर्देश दिए थे जहां आवासीय प्लॉट पर अवैध निर्माण किया गया है.
सेंट्रल मार्केट प्रकरण में व्यापारी और किसान संगठन का विरोध जारी
आवास विकास परिषद ने जांच के बाद करीब 1470 दुकानों को चिन्हित किया है जो आवासीय प्लॉट पर बनाई गई हैं. इनमें से 31 परिसरों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का खतरा मंडरा रहा है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दुकानों को खाली करने के लिए नोटिस भी चस्पा किए गए हैं.
बताया जा रहा है कि नोटिस की अवधि पूरी हो चुकी है और 729 दुकानदारों को तीन दिन के भीतर अपने अवैध निर्माण को स्वयं हटाने के निर्देश दिए गए हैं. कुछ दुकानदार अब खुद ही निर्माण हटाने की प्रक्रिया शुरू कर चुके हैं.
दूसरी तरफ व्यापारी इस कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि वह वर्षों से यहां व्यापार कर रहे हैं और उनकी पूरी पूंजी इन दुकानों में लगी हुई है. यदि दुकानें टूट जाती हैं तो उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा. व्यापारी सरकार से वार्ता कर स्थायी समाधान निकालने और दुकानों को नियमित करने की मांग कर रहे हैं.
SSI को धमकी देने पर भड़के सीओ सिविल लाइन
शनिवार को भी सेंट्रल मार्केट में विरोध के चलते बाजार बंद रहा. किसान मजदूर संगठन के जिला अध्यक्ष अंशुल तोमर ने कहा कि सेंट्रल मार्केट में हाल ही में तोड़फोड़ की कार्रवाई भी हुई है और दोबारा बुलडोजर चलने की आशंका बनी हुई है. उन्होंने कहा कि व्यापारी वर्षों से यहां अपना व्यवसाय चला रहे हैं और उनकी पूरी जिंदगी की कमाई इस मार्केट में लगी हुई है.
अंशुल तोमर ने आरोप लगाया कि आवास विकास परिषद के बाहर हुए धरने के बाद रात करीब डेढ़ बजे पुलिस दो लोगों को थाने ले गई. सुबह जब लोग थाने पहुंचे तो उन्हें एक घंटे तक जानकारी नहीं दी गई और बाद में बताया गया कि दोनों का धारा 151 में चालान कर दिया गया है. फिलहाल सेंट्रल मार्केट को लेकर विवाद जारी है और व्यापारी प्रशासन से बातचीत के जरिए समाधान की मांग कर रहे हैं.
उस्मान चौधरी