उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में बीती शाम आकाशीय बिजली गिरने से भीषण आग लग गई, जिससे पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई. अचानक लगी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया और कई घर इसकी चपेट में आ गए. ग्रामीणों ने तुरंत शोर मचाकर लोगों को घरों से बाहर निकलने के लिए सतर्क किया और अपने स्तर पर आग बुझाने का प्रयास शुरू कर दिया.
घटना सदरपुर थाना क्षेत्र के सरैंया चलाकापुर गांव की है. यहां घटना के दौरान हालात इतने भयावह हो गए कि लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए. आग तेजी से फैलती चली गई और कई घरों को नुकसान पहुंचाया. गांव में चीख-पुकार और दहशत का माहौल बन गया, जबकि ग्रामीण लगातार आग पर काबू पाने की कोशिश में जुटे रहे.
यह भी पढ़ें: दुर्गा मंदिर ध्वस्त, हटाई जा रही मूर्तियां... सीतापुर में सड़क चौड़ीकरण की जद में आया 25 साल पुराना टेंपल
इस हादसे में दो महिलाओं की दर्दनाक मौत हो गई. मृतकों में फूलमती पत्नी शत्रुध्न शामिल हैं, जबकि दूसरी 60 वर्षीय महिला की पहचान फूलमती की मां के रूप में हुई है. घटना ने पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है और हर तरफ मातम का माहौल है.
सात वर्षीय बच्ची गंभीर रूप से झुलसी
इस हादसे में सात वर्षीय बच्ची माही पुत्री खुनखुन गंभीर रूप से झुलस गई. घटना के तुरंत बाद ग्रामीणों ने उसे उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिसवा भेजा, जहां उसका इलाज जारी है. बच्ची की हालत को लेकर गांव में चिंता और बेचैनी का माहौल बना हुआ है.
बताया जा रहा है कि अचानक आकाशीय बिजली गिरने से एक घर में आग लगी, जो कुछ ही समय में आसपास के घरों तक फैल गई. ग्रामीणों ने साहस दिखाते हुए कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला और बड़ी मुश्किल से आग पर काबू पाने में जुटे रहे. हालांकि आग ने तब तक कई घरों को नुकसान पहुंचा दिया था.
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आ गया और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची. कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया और हालात को नियंत्रण में लाया गया.
रशासन ने सहायता का दिया आश्वासन
पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है. प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया गया है.
हालांकि, प्रशासन की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन घटना के बाद पूरे गांव में शोक और दहशत का माहौल बना हुआ है. ग्रामीण इस दर्दनाक हादसे से उबरने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि प्रभावित परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है.
अरविंद मोहन मिश्रा