3.5 लाख में समझौता, तीन महीने तक इलाज और अब मौत... कानपुर में पुलिसिया सिस्टम के बीच पिस गई दलित बच्ची 

कानपुर देहात में एक दलित नाबालिग की मौत ने पुलिसिया सिस्टम की क्रूर हकीकत उजागर कर दी है. आरोप है कि दुष्कर्म के बाद केस दर्ज करने के बजाय थाने में पंचायत कराई गई और पैसों दिलाकर समझौता हुआ. तीन महीने तक इलाज के लिए भटकने के बाद अब पीड़िता की मौत हो गई. पुलिस आरोपों को नकार रही है, मामले की जांच जारी है.

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कानपुर देहात पुलिस ने आरोपियों काे गिरफ्तार किया (Photo: ITG) कानपुर देहात पुलिस ने आरोपियों काे गिरफ्तार किया (Photo: ITG)

सिमर चावला / तनुज अवस्थी

  • कानपुर ,
  • 23 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:26 PM IST

कानपुर देहात में एक नाबालिग दलित लड़की की मौत ने पुलिसिया कार्यशैली, प्रशासनिक संवेदनशीलता और न्याय व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. तीन महीने तक जिंदगी और मौत के बीच जूझती रही यह बच्ची आखिरकार इलाज के दौरान दम तोड़ गई. परिवार का आरोप है कि दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराध में पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने के बजाय थाने में पंचायत कराई, रुपयों का लेनदेन कराया गया और समझौता करवाया गया. जब मामला सार्वजनिक हुआ और पीड़िता की हालत गंभीर होती चली गई, तब जाकर आनन-फानन में केस दर्ज हुआ और आरोपी को जेल भेजा गया. 

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यह मामला रूरा थाना क्षेत्र के अमौली ठकुरान गांव का है. आरोप है कि 15 अक्टूबर 2025 को गांव के ही एक युवक ने दलित परिवार की नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म किया. घटना के बाद जब बच्ची घर पहुंची तो उसकी हालत बेहद गंभीर थी और लगातार खून बह रहा था. घबराए परिजन उसे तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे. पहले स्थानीय अस्पताल, फिर जिला अस्पताल और उसके बाद कानपुर के हैलट अस्पताल तक उसे रेफर किया गया. परिजनों का कहना है कि उसी दौरान पीड़िता के पिता रूरा थाने पहुंचे और दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराने की मांग की, लेकिन पुलिस ने केस दर्ज करने के बजाय थाने में पंचायत बैठा दी. आरोप है कि पुलिस की मौजूदगी में आरोपी पक्ष से 3 लाख 50 हजार रुपये दिलवाए गए. स्टांप पेपर पर लिखापढ़ी करवाई गई, लेनदेन का वीडियो भी बनवाया गया और यह कबूलनामा लिया गया कि भविष्य में कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी.

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इस दौरान बच्ची की हालत लगातार बिगड़ती चली गई. तीन महीने तक उसे एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल ले जाया गया. परिजन बताते हैं कि पहले रूरा के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, फिर जिला अस्पताल भेजा गया. हालत गंभीर होने पर कानपुर नगर रेफर किया गया. वहां से लाला लाजपत राय अस्पताल, उर्सला अस्पताल, झांसी मेडिकल कॉलेज, कानपुर के निजी नर्सिंग होम, अनंतराज हॉस्पिटल और अंततः लखनऊ के केजीएमयू तक बच्ची को ले जाया गया. इलाज की इस लंबी और थकाने वाली दौड़ के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी.

वहीं इस पूरे मामले में कानपुर रेंज के आईजी हरिश्चंद्र का कहना है कि शुरुआती स्तर पर मामला पॉक्सो एक्ट में दर्ज किया गया था, लेकिन जांच में यह सामने आया कि लड़की नाबालिग नहीं, बल्कि बालिग है. उनके मुताबिक मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर पीड़िता की उम्र 19 साल पाई गई है. आईजी का यह भी कहना है कि पीड़िता के पिता लगातार अपने बयान बदल रहे थे. जैसे ही पुलिस को ठोस तहरीर प्राप्त हुई, थानाध्यक्ष ने तुरंत रिपोर्ट दर्ज कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. उनका कहना है कि कुछ वीडियो वायरल होने के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए एक जांच कमेटी का गठन किया गया है, जो पुलिस की भूमिका की भी जांच करेगी. यदि किसी स्तर पर पुलिस की संलिप्तता पाई जाती है, तो कार्रवाई की जाएगी.

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कानपुर देहात पुलिस की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि थाने में किसी तरह का समझौता नहीं कराया गया. पुलिस का दावा है कि आरोपी और पीड़ित पक्ष के बीच जो समझौता हुआ, वह थाने के बाहर समाज के लोगों की मौजूदगी में हुआ था. उस वक्त पुलिस को यह बताया गया था कि दोनों पक्ष एक-दूसरे को जानते हैं और लड़की के साथ केवल मारपीट की घटना हुई है. उसी आधार पर समझौते की बात सामने आई थी. पुलिस का यह भी कहना है कि रेप की लिखित शिकायत परिवार की ओर से बाद में दी गई, जिस पर तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया. पुलिस के मुताबिक समझौते की बात असत्य है और पूरे मामले में तथ्य धीरे-धीरे सामने आए, जिस वजह से भ्रम की स्थिति बनी.

हालांकि इस पूरे प्रकरण में कई विरोधाभास भी सामने आ रहे हैं. एक तरफ पुलिस पीड़िता को बालिग बता रही है, वहीं शुरुआती मेडिकल और परिजनों के दावों में उसे नाबालिग बताया गया. दूसरी ओर, पीड़िता के पिता के अलग-अलग वीडियो बयान भी सामने आए हैं, जिनमें कथनों में अंतर दिखता है. इन विरोधाभासों ने मामले को और उलझा दिया है.

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