माघ मेले की रेत पर इस बार अगर किसी पंडाल की सबसे ज्यादा चर्चा है तो वह है सतुआ बाबा का पंडाल. भव्यता, वैभव और प्रभाव तीनों का ऐसा संगम कि श्रद्धालु हों या वीआईपी, हर कोई एक बार ठहरकर देखने को मजबूर हो जाता है. कभी चार्टर प्लेन में फोटो तो कभी डिफेंडर और पोर्शे जैसी लग्जरी कारों का काफिला, और कई मौकों पर हाथी व ऊंट की सवारी. सतुआ बाबा का यह अंदाज इस माघ मेले को अलग पहचान दे रहा है.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के करीबी माने जाने वाले सतुआ बाबा इस समय केवल अपने पंडाल या रहन-सहन को लेकर ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं को लेकर भी सुर्खियों में हैं. उनके पंडाल में देश के नामचीन संतों के साथ-साथ तमाम सेलिब्रिटी और राजनेताओं की तस्वीरें लगी हैं, जिनमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ उनकी कई तस्वीरें खास तौर पर लोगों का ध्यान खींच रही हैं. माघ मेले में सतुआ बाबा का पंडाल न सिर्फ आकार में भव्य है, बल्कि व्यवस्थाओं के लिहाज से भी इसे सबसे सुव्यवस्थित पंडालों में गिना जा रहा है. सुबह से देर रात तक श्रद्धालुओं, संतों और आगंतुकों का आना-जाना लगा रहता है. सुरक्षा, भोजन, आवास और प्रवचन. हर स्तर पर एक अलग ही स्तर की तैयारी नजर आती है.
डीएम के रोटी बनाने के वीडियो पर रखी बात
हाल के दिनों में सतुआ बाबा सोशल मीडिया पर उस वक्त चर्चा में आए जब जिलाधिकारी के रोटियां बनाने का वीडियो वायरल हुआ. इस पर उठे सवालों और राजनीतिक तंजों पर बाबा ने बेहद सधे अंदाज में प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि रोटी बनाना या खाना कोई अपराध नहीं है. जिलाधिकारी भी इंसान हैं. जब वे पंडाल में आए तो संतों के साथ भोजन बन रहा था. उन्होंने खुद कहा कि वह अपने बचपन की यादें ताजा करना चाहते हैं. इसके बाद उन्होंने रोटी सेकी. बाबा ने साफ कहा कि सनातन परंपरा में अतिथि और संत के साथ भोजन बनाना कोई असामान्य बात नहीं है, इसे मुद्दा बनाना गलत मानसिकता को दर्शाता है.
अखिलेश यादव पर साधा निशाना
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के तंज और समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया पर भी सतुआ बाबा ने खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि कुछ लोग हर बात को राजनीति के चश्मे से देखते हैं, जबकि सनातन संस्कृति में सेवा और सहभागिता जीवन का हिस्सा है. बाबा ने विशेष तौर पर अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका परिवार राम द्रोही रहा है और राम भक्तों पर गोलियां चलाने का इतिहास रहा है. जाति के नाम पर समाज को बांटने की राजनीति अब नहीं चलने वाली है.
सतुआ बाबा के पंडाल में राजनीति से इतर अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा हो रही है. बांग्लादेश में मौजूदा हालात को लेकर उन्होंने गहरी चिंता जताई. बाबा ने कहा कि वहां जो कुछ हो रहा है, वह बेहद दुखद है. भारत ने हमेशा सभी को स्वीकार किया है, लेकिन बांग्लादेश में भारतीयों को परेशान करने की एक सुनियोजित कोशिश चल रही है. उन्होंने दावा किया कि इस विषय पर माघ मेले में साधु-संतों के बीच गंभीर विचार-विमर्श हो रहा है. जरूरत पड़ी तो साधु-संत माघ मेले से ही बांग्लादेश कूच करने का निर्णय भी ले सकते हैं.
महंगी गाड़ियों के काफिले पर दिया जवाब
अपने वैभवशाली जीवन और महंगी गाड़ियों को लेकर उठने वाले सवालों पर भी सतुआ बाबा ने बेबाकी से जवाब दिया. उन्होंने कहा कि अध्यात्म का वैभव सीमाओं में नहीं बंधा होता. भक्तों की श्रद्धा का स्वरूप अलग-अलग होता है. किसी का मन करता है गाड़ी देने का, किसी का घोड़ा, किसी का हाथी. मैं इन चीजों की कंपनी, कीमत या ब्रांड पर ध्यान नहीं देता. मेरा ध्यान सिर्फ अपने मार्ग और उद्देश्य पर रहता है. उन्होंने यह भी कहा कि सतुआ बाबा पीठ करीब 300 वर्ष पुरानी है और सनातन परंपरा हमेशा से वैभवशाली रही है. जब कोई बड़ा कार्य करना होता है, तो उसके लिए व्यवस्थाएं भी उसी स्तर की होनी चाहिए. माघ मेले के धार्मिक महत्व पर बोलते हुए सतुआ बाबा ने मकर संक्रांति और मौनी अमावस्या के स्नान को विशेष बताया. उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति सूर्य के उत्तरायण होने का पर्व है, जो आत्मशुद्धि और नए संकल्प का प्रतीक है. वहीं मौनी अमावस्या पर किया गया स्नान मन, वाणी और कर्म—तीनों को शुद्ध करता है. उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि माघ स्नान को केवल परंपरा न समझें, बल्कि इसे आत्मिक साधना के रूप में अपनाएं.
सीएम योगी को बताया सनातन का ध्वजवाहक
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपने संबंधों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि योगी जी सनातन के ध्वजवाहक हैं. वे सभी से प्रेमपूर्वक मिलते हैं, ऐसा लगता है मानो वर्षों पुराना संबंध हो. योगी जी ने समाज के हर वर्ग के दुख और दर्द को समझा है और उसी संवेदना के साथ काम किया है. हालांकि, बाबा अपने आलोचकों की परवाह किए बिना अपने मार्ग पर चलते नजर आते हैं. उनका कहना है कि संत का काम समाज को दिशा देना है, न कि आलोचनाओं से विचलित होना. माघ मेले की रेत पर उनका पंडाल इस बात का गवाह बन रहा है कि आज के समय में संत की भूमिका केवल धर्म तक सीमित नहीं, बल्कि समाज, राजनीति और वैश्विक मुद्दों तक फैली हुई है.
समर्थ श्रीवास्तव