नोएडा के सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत अब महज़ एक सड़क हादसा नहीं रही. यह घटना सिस्टम की उस सामूहिक लापरवाही की तस्वीर बन चुकी है, जिसमें सालों से दिख रहा खतरा, चेतावनियों के बावजूद अनदेखा किया जाता रहा.
गूगल अर्थ की सैटेलाइट तस्वीरें अब उस सच्चाई को सामने ला रही हैं, जिसे प्रशासन, प्राधिकरण और जिम्मेदार विभाग या तो देख नहीं पाए या देखना नहीं चाहते थे. जिन तस्वीरों को आम नागरिक एक क्लिक में देख सकता है, वही तस्वीरें बताती हैं कि जिस गहरे गड्ढे में युवराज की कार गिरी, वहां 2021 के अंत से लगातार पानी भरा हुआ था. यह गड्ढा न केवल मौजूद था, बल्कि तीन साल से ज्यादा समय तक असुरक्षित, खुला और जानलेवा बना रहा.
सैटेलाइट तस्वीरें क्या कहती हैं?
पीटीआई द्वारा अप्रैल 2009 से मार्च 2025 तक की गूगल अर्थ सैटेलाइट तस्वीरों की समीक्षा में कई अहम तथ्य सामने आए हैं. 2009 से 2015 तक यह इलाका कृषि भूमि था. तस्वीरों में साफ दिखाई देता है कि यहां फसलें थीं, सिंचाई की लाइनें थीं. 2016-17 में स्पोर्ट्स सिटी परियोजना को मंजूरी मिली, जिसके बाद भूमि उपयोग बदला गया. पेड़-पौधे साफ किए गए और बड़े स्तर पर खुदाई शुरू हुई. लेकिन नवंबर 2021 से पहले तक किसी भी सैटेलाइट इमेज में इस स्थान पर कोई बड़ा जलभराव नहीं दिखाई देता. नवंबर 2021 की सैटेलाइट तस्वीरें पहली बार उस गड्ढे में बड़े पैमाने पर पानी भरा हुआ दिखाती हैं. इसके बाद 2022, 2023 और 2024 की तस्वीरों में हालात और बदतर होते चले गए जैसे गड्ढे में काला ठहरा हुआ पानी, काई और शैवाल की परत, आधी डूबी निर्माण सामग्री, चारों ओर उगी झाड़ियां. ये सब इस बात का सबूत हैं कि यह जगह लंबे समय तक यूं ही छोड़ दी गई. मार्च 2025 की सबसे ताजा सैटेलाइट तस्वीर में भी गड्ढा जस का तस दिखाई देता है. पानी से लबालब, चारों ओर अव्यवस्थित, जबकि उससे सटी सड़कें पूरी तरह विकसित नजर आती हैं.
एक हादसा, जिसने कई साल की लापरवाही उघाड़ दी
17 जनवरी की रात करीब 12 बजे गुरुग्राम से घर लौट रहे 27 वर्षीय युवराज मेहता की कार सेक्टर-150 में सड़क किनारे बने नाले को तोड़ते हुए सीधे स्पोर्ट्स सिटी के प्लॉट नंबर-2 के प्लॉट ए-3 में जा गिरी. वहां पहले से मौजूद गहरा और पानी से भरा गड्ढा युवराज के लिए मौत का कुंआ साबित हुआ. कार कुछ ही पलों में पानी में समा गई. युवराज ने घटना के तुरंत बाद पिता को कॉल कर जानकारी दी, उन्होंन पुलिस को सूचना दी फिर मौके पर पहुंचे. देखते ही देखते वहां पुलिस, फायर ब्रिगेड सहित कई अन्य विभागों की टीम पहुंच गई. लेकिन कोई भी पानी में उतरने को तैयार नहीं हुआ. युवराज वहां से बचाओ बचाओ चिल्लाता रहा. अंतत: युवराज कार सहित पानी में डूब गया और उसकी जान चली गई.
पहले भी हो चुका था हादसा, फिर क्यों नहीं चेता सिस्टम?
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह पहला हादसा नहीं था. कुछ ही दिन पहले इसी स्थान पर एक ट्रक भी दुर्घटनाग्रस्त हुआ था. फर्क सिर्फ इतना था कि उस हादसे में चालक की जान बच गई. ट्रक चालक गुरविंदर सिंह ने मीडिया को बताया कि 2 जनवरी की रात घने कोहरे के बीच उनका वाहन उसी मोड़ पर अनियंत्रित हो गया. चार घंटे तक मैं वहीं फंसा रहा. मदद देर से पहुंची. आज भी अंदरूनी चोटों की वजह से बोलने में दिक्कत होती है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गुरविंदर सिंह का हादसा भी उसी टी-पॉइंट पर हुआ, जहां से दाईं ओर मुड़ते ही यह खतरनाक गड्ढा शुरू हो जाता है. उनका साफ कहना है कि अगर टी-पॉइंट पर बैरिकेडिंग होती, रिफ्लेक्टर लगे होते, तो न मेरा हादसा होता, न युवराज की जान जाती.
विकसित सड़क, लेकिन सुरक्षा शून्य
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह गड्ढा बारिश और नालों से भरता रहता था. इसके बावजूद न कोई बैरिकेडिंग, न रिफ्लेक्टिव साइन बोर्ड, न चेतावनी लाइट और न ही सुरक्षा घेरा. जबकि सड़क पर लगभग 90 डिग्री का तीखा मोड़ है, जहां रात में विज़िबिलिटी और कम हो जाती है.
किसका है प्लॉट, किसकी जिम्मेदारी?
नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, हादसे वाला स्थान प्लॉट ए-3 है. यह प्लॉट स्पोर्ट्स सिटी के प्लॉट नंबर-2 के उप-विभाजन के बाद अस्तित्व में आया. कुल क्षेत्रफल: 27,185 वर्ग मीटर इसका उपयोग: वाणिज्यिक (कमर्शियल) है इसका प्रमुख डेवलपर: लोटस ग्रीन है. वर्ष 2021 से नियंत्रण: एमजेड विजटाउन प्लानर्स के पास है. शुरुआत में यहां एक व्यावसायिक भवन का नक्शा स्वीकृत किया गया था. बाद में एमजेड विजटाउन ने मॉल जैसी संरचना के लिए संशोधित योजना मांगी.
मई 2022 में खारिज हुआ नक्शा, फिर क्या हुआ?
आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, नोएडा प्राधिकरण ने मई 2022 में संशोधित योजना को खारिज कर दिया. कारण स्पष्ट था कि स्वीकृत लेआउट के तहत केवल खेल गतिविधियों से जुड़ी दुकानें और फूड एंड बेवरेज आउटलेट्स ही बनाए जा सकते थे. इसके बाद निर्माण कार्य रोक दिया गया. लेकिन सवाल यह है कि क्या निर्माण रुकने का मतलब यह था कि गड्ढे को खुला छोड़ दिया जाए? क्या सुरक्षा इंतज़ाम करना किसी की जिम्मेदारी नहीं थी?
तीन साल तक मौत का जाल, किसी ने नहीं देखा
दो ओर चौड़ी सड़कों से घिरे इस कोने वाले प्लॉट पर खुदा हुआ बेसमेंट तीन साल से अधिक समय तक खुला पड़ा रहा. सैटेलाइट तस्वीरें, स्थानीय लोगों की शिकायतें और एक पहले हो चुका हादसा. सब कुछ मौजूद था. फिर भी न प्राधिकरण हरकत में आया, न बिल्डर, न संबंधित विभाग.
Lotus Greens का आधिकारिक बयान
नोएडा सेक्टर-150 में हुए इस दर्दनाक हादसे पर लोटस ग्रीन्स कंस्ट्रक्शंस प्रा. लि. (LGCPL) ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए मृतक के परिजनों के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं. कंपनी ने साफ तौर पर कहा है कि जिस प्लॉट पर हादसा हुआ, वह लोटस ग्रीन्स के स्वामित्व या नियंत्रण में नहीं है. कंपनी के अनुसार, यह प्लॉट पहले स्पोर्ट्स सिटी योजना के तहत आवंटित था, जिसे 2016 में WPPL को सब-लीज किया गया था. इसके बाद 2019 में WPPL की पूरी हिस्सेदारी श्री अभय कुमार और अन्य (गृहप्रवेश बिल्टेक प्रा. लि.) को ट्रांसफर कर दी गई. Lotus Greens ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि सुरक्षा, खुदाई और जोखिम प्रबंधन की पूरी जिम्मेदारी WPPL के वर्तमान प्रबंधन और नोएडा प्राधिकरण की है. Lotus Greens ने इस प्लॉट पर कभी कोई निर्माण, खुदाई या कार्य नहीं कराया हालांकि, एक जिम्मेदार कॉरपोरेट संस्था के तौर पर कंपनी ने जांच एजेंसियों और प्रशासन को पूरा सहयोग देने की प्रतिबद्धता जताई है.
सांसद ने की मुलाकात
मंगलवार देर शाम गौतम बुद्धनगर के सांसद डॉ. महेश शर्मा मृतक युवराज मेहता के पिता राजकुमार मेहता से मिलने उनके घर पहुंचे. इसके बाद मीडिया से बातचीत में युवराज के पिता ने कहा कि सरकार की तरफ से जो त्वरित कार्रवाई हुई है, एसआईटी का गठन किया गया है, अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है, इससे दिल को थोड़ा सुकून मिला है. अब लग रहा है कि मेरे बेटे की आत्मा को न्याय मिलेगा. सांसद से मुलाकात पर उन्होंने कहा कि हमने उनसे अनुरोध किया है कि एक बार योगी जी का भी दर्शन हो जाए तो दिल को तसल्ली मिल जाएगी. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री कार्यालय से अभी तक उन्हें व्यक्तिगत रूप से मिलने का कोई पत्र या सूचना नहीं मिली है.
एनडीआरएफ का लंबा सर्च ऑपरेशन, शाम तक मिली सफलता
हादसे के कई दिन बाद मंगलवार को दिनभर चले सघन सर्च ऑपरेशन के बाद आखिरकार शाम होते-होते युवराज की कार को गड्ढे से बाहर निकाला गया. एनडीआरएफ की टीम ने हाइड्रा मशीन की मदद से कार को बाहर निकाला. कार आगे से पूरी तरह क्षतिग्रस्त थी, जो हादसे की भयावहता को बयां कर रही थी. कार को डंपर में लोड कर मौके से हटा दिया गया. कार के बाहर निकलने के साथ ही मौके पर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं.
पहली गिरफ्तारी: 72 घंटे बाद बिल्डर अभय कुमार दबोचा गया
सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में नॉलेज पार्क कोतवाली पुलिस ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए बेस्टटाउन प्लानर्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक और बिल्डर अभय कुमार को सेक्टर-150 नोएडा से गिरफ्तार कर लिया. आरोपी बिल्डर को गिरफ्तार करने के बाद कोर्ट में पेश किया गया. इस मामले में पुलिस ने घटना के करीब 24 घंटे बाद एफआईआर दर्ज की थी, जबकि 72 घंटे बाद पहली गिरफ्तारी हुई. इस गिरफ्तारी को लेकर भी सवाल उठे, लेकिन पुलिस का कहना है कि साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की गई है और आगे और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं.
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