सहारनपुर जिले के पिंकी गांव में एक बुजुर्ग महिला के अंतिम संस्कार को लेकर ऐसा विवाद खड़ा हो गया, जिसने पूरे इलाके में धर्म और सामाजिक बहिष्कार को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी. गांव निवासी मामचंदी पत्नी रामसिंह के निधन के बाद जब परिजन शव को श्मशान घाट ले जा रहे थे, तभी कुछ लोगों ने आपत्ति जता दी.
आपत्ति करने वालों का कहना था कि जिन परिवारों ने ईसाई धर्म अपना लिया है, वे गांव के श्मशान घाट का उपयोग नहीं कर सकते और उन्हें अपने धर्म के अनुसार अंतिम संस्कार करना चाहिए. इसको लेकर माहौल गर्म हो गया और मामला पंचायत तक पहुंच गया.
श्मशान घाट में रोक के बाद मंदिर में बुलाई गई पंचायत
सुबह गांव के मंदिर में पंचायत बुलाई गई. बिरादरी के लोगों ने सामूहिक रूप से इस मुद्दे पर चर्चा की. पंचायत में यह बात सामने आई कि गांव के कुल 13 परिवार पहले ईसाई धर्म अपना चुके हैं. पंचायत के दौरान 11 परिवारों ने अपने मूल धर्म में वापस लौटने की सहमति जताई. इसके बाद फैसला लिया गया कि मामचंदी का अंतिम संस्कार गांव के श्मशान घाट में ही कराया जाएगा. मृतका के बेटे सुरेंद्र ने बताया कि गांव के जिम्मेदार लोगों और बिरादरी के बीच सहमति बनने के बाद अब अंतिम संस्कार गांव में ही होगा.
ग्रामीण शीशराम ने बताया कि पहले कुछ लोग लालच या बहकावे में आकर ईसाई धर्म में चले गए थे, लेकिन अब 11 परिवारों ने शपथ पत्र देकर वापसी की है. उन्होंने कहा कि गांव में पहले से एक समिति बनाई गई थी, जो ऐसे परिवारों को समझाने का काम कर रही थी. उनके अनुसार अब दो परिवार शेष हैं, जिनसे भी बातचीत जारी है. एक अन्य ग्रामीण ने बताया कि 20 से 25 लोगों की कमेटी बनाई गई थी, जो अंदरूनी बैठक कर ऐसे परिवारों से संवाद कर रही थी. उनका कहना है कि दो परिवार अभी भी बाकी हैं और उन्हें भी समझाने का प्रयास किया जाएगा.
13 में से 11 परिवारों की धर्म वापसी का दावा
एक ग्रामीण ने यह भी कहा कि गांव में गुरु रविदास सुधार समिति पहले से सक्रिय है. समिति का निर्णय था कि यदि ईसाई धर्म अपनाने वाले परिवारों में किसी की मौत होती है तो श्मशान घाट में अंतिम संस्कार नहीं होने दिया जाएगा और सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा. उनका कहना है कि 13 में से 11 परिवारों ने एफिडेविट देकर वापसी की है. दो परिवार अभी शेष हैं और यदि वो सहमत नहीं होते हैं तो लिए गए निर्णय आगे भी लागू रहेंगे. फिलहाल गांव में स्थिति सामान्य बताई जा रही है. प्रशासन की ओर से भी हालात पर नजर रखी जा रही है ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति न बने.
राहुल कुमार