सहारनपुर की गार्गी बनी यूपी की नंबर-1 भैंस, 24 लीटर दूध देकर बनाया रिकॉर्ड

सहारनपुर के मोहम्मदपुर गांव में भैंस 'गार्गी' ने पशुपालन में बड़ा रिकॉर्ड बनाते हुए पूरे उत्तर प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है. इस मुर्रा नस्ल की भैंस ने प्रतिदिन 23.375 लीटर दूध देकर सभी प्रतियोगियों को पीछे छोड़ दिया. उपलब्धि पर भैंस मालिक परिवार को सम्मानित किया गया. गार्गी की विशेषता उसका अनोखा आकार और उच्च दूध उत्पादन क्षमता है. परिवार ने इसे बेचने से इनकार करते हुए अपनी मेहनत और पहचान का प्रतीक बताया है.

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कई लोगों ने इसकी कीमत 20 लाख रुपये तक लगाई थी. Photo ITG कई लोगों ने इसकी कीमत 20 लाख रुपये तक लगाई थी. Photo ITG

राहुल कुमार

  • सहारनपुर,
  • 17 मई 2026,
  • अपडेटेड 8:54 PM IST

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के गांव मोहम्मदपुर में पशुपालन के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि देखने को मिली है, जहां पूर्व जिला पंचायत सदस्य चौधरी विक्रम सिंह की भैंस 'गार्गी' ने पूरे उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा दूध देकर पहला स्थान हासिल किया है. गार्गी ने प्रतिदिन 23.375 लीटर दूध देकर नया रिकॉर्ड बनाया है, जिसके बाद गांव में खुशी और गर्व का माहौल है.

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भैंस के मालिक को मिली ट्रॉफी
शुक्रवार को उत्तर प्रदेश कृषि एवं पशुपालन संघ और पशु चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम गांव पहुंची और भैंस मालिक परिवार को ट्रॉफी देकर सम्मानित किया. इस मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौजूद रहे और गार्गी को देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटी.

मुर्रा नस्ल की है भैंस
करीब चार साल की मुर्रा नस्ल की यह भैंस अपने अनोखे आकार और बेहतर दूध उत्पादन क्षमता के कारण चर्चा में है. बताया जा रहा है कि इसका कद लगभग साढ़े पांच फीट है, जो इसे और भी खास बनाता है. दिसंबर के आखिरी सप्ताह में लखनऊ की टीम ने इसका लाइव टेलीकास्ट के जरिए दूध उत्पादन परीक्षण किया था, जिसके बाद हाल ही में घोषित परिणामों में गार्गी को पूरे प्रदेश में पहला स्थान मिला.

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इस प्रतियोगिता में दूसरे स्थान पर रहने वाली भैंस ने 21.700 लीटर और तीसरे स्थान पर रहने वाली भैंस ने 21.200 लीटर दूध दिया. गार्गी का प्रदर्शन इन दोनों से काफी आगे रहा.

क्या बोले भैंस के मालिक?
भैंस मालिक शेखर चौहान ने बताया कि इस सफलता के पीछे उनके पिता विक्रम सिंह की लगभग 15 साल की लगातार मेहनत है. उन्होंने कहा कि परिवार ने हमेशा उन्नत नस्ल विकसित करने पर ध्यान दिया और बाहर से तैयार पशु खरीदने के बजाय अपनी ही नस्ल को बेहतर बनाया. गार्गी का टीकाकरण हरियाणा के प्रसिद्ध मुर्रा भैंसे 'भीम' से कराया गया था.

क्या है गार्गी भैंस की खासियत?
विक्रम सिंह ने बताया कि उन्होंने 8-9 लीटर दूध देने वाली सामान्य भैंसों से शुरुआत की थी और धीरे-धीरे ब्रीडिंग के जरिए इस स्तर तक पहुंचे. उन्होंने यह भी कहा कि गार्गी का आकार बेहद दुर्लभ है और अब तक 100 से अधिक पशु प्रदर्शनियों में भाग लेने के बावजूद उन्होंने ऐसा आकार कहीं नहीं देखा.

परिवार का कहना है कि गार्गी केवल एक पशु नहीं, बल्कि उनकी मेहनत और पहचान का प्रतीक बन चुकी है. कई लोगों ने इसकी कीमत 20 लाख रुपये तक लगाई, लेकिन परिवार ने इसे बेचने से इनकार कर दिया है. उनका कहना है कि वे इसके बच्चे जरूर दे सकते हैं, लेकिन गार्गी हमेशा उनके परिवार का हिस्सा रहेगी.

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