उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में बकरीद को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश के बाद राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है. मुस्लिम पक्ष की तरफ से इस आदेश पर आपत्ति जताई गई है और इसे राजनीतिक स्टंट बताया गया है. लोगों का कहना है कि ईद पर आमतौर पर सड़क पर नमाज नहीं पढ़ी जाती, इसके बावजूद इस तरह के बयान जारी किए जाते हैं.
स्थानीय लोगों का कहना है कि ईद की नमाज साल में एक बार पढ़ी जाती है और अगर किसी कारणवश कहीं सड़क पर नमाज पढ़ी भी जाए तो उसे बड़ा मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए. उनका यह भी कहना है कि सड़कों पर तो अक्सर पुलिस बल ज्यादा नजर आता है, ऐसे में सिर्फ ईद की नमाज को लेकर चर्चा करना सही नहीं है.
कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि जब ईद की नमाज और पशु कटान को लेकर निर्देश जारी किए जाते हैं, तो हिंदू त्योहारों की शोभायात्राओं पर कोई रोक क्यों नहीं लगाई जाती. उनका कहना है कि हर समुदाय के धार्मिक आयोजनों के लिए समान नियम होने चाहिए.
सड़क पर नमाज और पशु कटान को लेकर उठे सवाल
पशु कटान को लेकर भी लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. उनका कहना है कि अधिकतर लोग इसे अपने घरों या चिन्हित स्थानों पर ही करते हैं. ऐसे में सरकार के आदेशों का पालन करने के लिए वे तैयार हैं, लेकिन इसके लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध कराया जाना चाहिए. इस बीच कुछ लोगों ने यह भी कहा कि पहले ईद की नमाज मुख्य रूप से ईदगाह में ही होती थी, लेकिन अब प्रशासनिक सख्ती के चलते लोग पहले से ही मस्जिदों में नमाज पढ़ने की व्यवस्था कर रहे हैं.
प्रशासन की सख्ती के बाद मस्जिदों में बढ़ी तैयारियां
वहीं, एक अलग बयान में सरकार की नीतियों पर टिप्पणी करते हुए कुछ लोगों ने कहा कि हाल ही में जिस तरह से राजनीतिक हलचल बढ़ी है, उससे कई नए शब्द और चर्चाएं सामने आ रही हैं. उन्होंने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक माहौल से जोड़कर देखा है. फिलहाल इस पूरे मामले पर प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है. सहारनपुर में माहौल शांत बताया जा रहा है, लेकिन बयानबाजी के कारण चर्चा लगातार बनी हुई है.
राहुल कुमार