मेले में बिहार के साधु की कठिन साधना, कांटों पर लेटे बाबा को देखने जुटी भीड़

संगम के माघ मेले में बिहार से आए साधु रमेश निशादराज कांटों की सेज पर लेटकर साधना कर रहे हैं. उनकी अनोखी तपस्या को देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ रही है. हठ योगियों और संतों के बीच यह दृश्य लोगों के लिए कौतूहल और आस्था का केंद्र बन गया है.

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संगम में बिहार से आए साधु की अनोखी तपस्या (Photo: Pankaj Srivastava/ITG) संगम में बिहार से आए साधु की अनोखी तपस्या (Photo: Pankaj Srivastava/ITG)

पंकज श्रीवास्तव

  • प्रयागराज ,
  • 14 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:46 PM IST

संगम के माघ मेले में इस बार हठ योगियों, साधु संतों और सन्यासियों की अनोखी साधनाएं लोगों का ध्यान खींच रही हैं. कोई सालों से एक हाथ उठाए तपस्या कर रहा है, तो कोई खड़े होकर साधना में लीन है. इसी बीच एक साधु ऐसे भी हैं, जिनकी साधना को देखकर लोग दांतों तले उंगलियां दबा रहे हैं.

कांटों की सेज पर लेटे इस साधु को देखने के लिए मेले में भारी भीड़ जुट रही है. लोग रुक रुककर उनकी साधना को निहार रहे हैं और आश्चर्य में पड़ जा रहे हैं. यह दृश्य मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुका है.

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नुकीले कांटों को बनाया साधना का माध्यम

बिहार से माघ मेले में आए इन साधु का नाम रमेश निशादराज बताया जा रहा है. वह नुकीले कांटों से बनी सेज पर लेटकर साधना कर रहे हैं. यही कांटों का बिस्तर उनकी तपस्या का माध्यम है. साधु इसी सेज पर लंबे समय तक लेटे रहते हैं और ध्यान में लीन दिखाई देते हैं.

कांटों की सैया देखकर कई लोग सहम जाते हैं, तो कई लोग इसे अद्भुत तपस्या मानकर नमन करते हैं. साधु के पास श्रद्धालु आते हैं, उनकी साधना को प्रणाम करते हैं और कुछ लोग दान दक्षिणा भी देते हैं.

कठिन साधना और अडिग ध्यान, मेले में दिनभर जुट रही भीड़

मेले में मौजूद लोगों का कहना है कि उन्होंने पहले कभी इस तरह की साधना नहीं देखी. साधु की शांति और स्थिरता लोगों को हैरान कर रही है. आसपास खड़े लोग आपस में इसी चर्चा में लगे रहते हैं कि आखिर कोई इंसान नुकीले कांटों पर कैसे लेट सकता है.

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माघ मेले में इस तरह की कठिन साधनाएं सनातन परंपरा की याद दिलाती हैं, जहां तप और संयम को सर्वोच्च माना गया है. साधु रमेश निशादराज की कांटों पर की जा रही साधना इसी परंपरा का एक जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई है, जिसे देखने के लिए दिन भर भीड़ लगी रहती है.

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