उत्तर प्रदेश के बांदा मंडल कारागार से नोएडा के आरोपी रवि काना की रिहाई का मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। इस पूरे प्रकरण में शासन ने अब बड़ा एक्शन लिया है। बिना सक्षम आदेश के रवि काना को जेल से रिहा करने के आरोप में पहले जेलर को निलंबित किया गया और अब जेल अधीक्षक व जेलर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
जेल चौकी प्रभारी की तहरीर पर यह मुकदमा भारतीय न्याय संहिता की धारा 260 सी के तहत दर्ज किया गया है। आरोप है कि जेल प्रशासन ने न तो किसी सक्षम न्यायालय का आदेश लिया और न ही न्यायालय को सूचित किया। इसके बावजूद आरोपी को जेल से रिहा कर दिया गया।
एसपी बांदा पलाश बंसल ने बताया कि मामला संवेदनशील है और इसकी गंभीरता से जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि अपर पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में एक विशेष विवेचनात्मक टीम गठित की गई है। टीम यह जांच कर रही है कि किन परिस्थितियों में रवि काना को रिहा किया गया और इसमें किन अधिकारियों की भूमिका रही।
दरअसल रवि काना को 2024 में प्रशासनिक आधार पर गौतम बुद्ध नगर से बांदा मंडल कारागार लाया गया था। तब से वह वहीं निरुद्ध था। जेल प्रशासन के अनुसार उसके खिलाफ 20 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे। इनमें से अधिकांश मामलों में उसे पहले ही जमानत या रिहाई के आदेश मिल चुके थे।
जेल प्रशासन का दावा है कि जिस अंतिम मामले में रवि काना बांदा जेल में बंद था, उसमें 28 जनवरी को अदालत ने रिहाई का आदेश दिया था। आदेश के सत्यापन के बाद 29 जनवरी को जेल मैनुअल के अनुसार उसे रिहा किया गया।
हालांकि इस रिहाई पर सवाल उठने के बाद गौतम बुद्ध नगर की अदालत ने जेल प्रशासन से स्पष्टीकरण मांगा। प्रारंभिक जांच में लापरवाही सामने आने पर पहले जेलर विक्रम सिंह को सस्पेंड किया गया और विभागीय जांच के आदेश दिए गए। अब इसी क्रम में जेल अधीक्षक और जेलर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है
सिद्धार्थ गुप्ता