लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को उनके संसदीय क्षेत्र रायबरेली दौरे के दौरान एक भावुक कर देने वाला तोहफा मिला. मंगलवार को उन्हें अपने दादा और पूर्व सांसद फिरोज गांधी का वर्षों से खोया हुआ ड्राइविंग लाइसेंस सौंपा गया. यह लाइसेंस दशकों से रायबरेली के एक स्थानीय परिवार द्वारा सहेज कर रखा गया था.
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक यह ड्राइविंग लाइसेंस रायबरेली प्रीमियर लीग क्रिकेट टूर्नामेंट की आयोजन समिति के सदस्य विकास सिंह ने राहुल गांधी को मंच पर सौंपा. यह मौका कांग्रेस नेता के रायबरेली दौरे का दूसरा दिन था. विकास सिंह ने बताया कि कई साल पहले रायबरेली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उनके ससुर को यह ड्राइविंग लाइसेंस मिला था. उन्होंने इसे सुरक्षित रखा और उनके निधन के बाद उनकी पत्नी ने भी इसे संभालकर रखा.
विकास सिंह के परिवार ने संजोकर रखी थी 'अमानत'
विकास सिंह के मुताबिक, परिवार इस दस्तावेज को एक अमानत मानता था, जिसे सही समय पर गांधी परिवार को लौटाना उनका नैतिक कर्तव्य था. उन्होंने कहा, “जब हमें पता चला कि राहुल गांधी रायबरेली आ रहे हैं, तो हमने तय किया कि यह अमानत उन्हें सौंप दी जाए.”
मंच पर लाइसेंस मिलने के बाद राहुल गांधी ने उसे ध्यान से देखा और तुरंत उसकी तस्वीर अपने मोबाइल फोन से अपनी मां और कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी को व्हाट्सएप के जरिए भेजी. इस पल ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को भी भावुक कर दिया. कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने इसे गांधी परिवार और रायबरेली के पुराने रिश्ते की एक अहम कड़ी के रूप में देखा.
फिरोज गांधी और रायबरेली का रिश्ता
गौरतलब है कि फिरोज गांधी का जन्म दिसंबर 1912 में हुआ था. उन्होंने स्वतंत्र भारत के पहले आम चुनाव में 1952 में रायबरेली लोकसभा सीट से जीत दर्ज की थी. फिरोज गांधी अपने बेबाक अंदाज और संसद में सत्ता से सवाल पूछने के लिए जाने जाते थे. वह देश की पहली प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पति और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के पिता थे.
7 सितंबर 1960 को फिरोज गांधी का निधन हो गया था, लेकिन रायबरेली से उनका जुड़ाव आज भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों की स्मृतियों में जीवित है. राहुल गांधी को मिला यह ड्राइविंग लाइसेंस न सिर्फ एक ऐतिहासिक दस्तावेज़ है, बल्कि रायबरेली और गांधी परिवार के बीच दशकों पुराने भावनात्मक संबंध का प्रतीक भी माना जा रहा है.
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