प्रयागराज के फाफामऊ इलाके से सामने आया यह मामला सिस्टम की परतों में छिपी खामियों और लालच के जाल की कहानी है. एक 15 साल की नाबालिग लड़की, जिसे पैसों का लालच देकर, पहचान बदलकर और शादीशुदा दिखाकर IVF सेंटर तक पहुंचाया गया... और वहां उसके अंडाणु निकलवा लिए गए. जब परतें खुलनी शुरू हुईं तो नाम सामने आए... पलक, रिंकी, सीमा, हिमांशु और कल्पना... और एक पूरा नेटवर्क जांच के घेरे में आ गया.
मामले की शुरुआत तब हुई, जब नाबालिग की मां ने फाफामऊ थाने में शिकायत दर्ज कराई. मां का आरोप था कि उसकी बेटी को पड़ोस की रहने वाली पलक और उसकी मां रिंकी अपने साथ ले गईं. पहले तो कहा गया कि काम दिलवाएंगी, फिर कुछ पैसों का लालच दिया गया.
इसी बीच लड़की के व्यवहार और आवाजाही में बदलाव दिखने लगा. मां के मुताबिक, बेटी कई बार बिना बताए घर से बाहर रहने लगी. पूछने पर टाल देती. फिर एक दिन वह लापता हो गई. तलाश शुरू हुई तो पता चला कि वह किसी आईवीएफ सेंटर में है, और मामला मेडिकल प्रोसेस से जुड़ा है.
3 फरवरी को लड़की को वन स्टॉप सेंटर भेजा गया, जहां चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) के सामने उसका बयान दर्ज हुआ. यहीं कहानी ने बड़ा मोड़ लिया. नाबालिग ने माना कि वह पलक के साथ एक IVF सेंटर गई थी और वहां उसका ओवा (अंडाणु) एक्सट्रैक्शन कराया गया.
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पुलिस के मुताबिक, लड़की ने बताया कि उसे पैसों और आईफोन का लालच दिया गया था. उसे कहा गया कि यह नॉर्मल मेडिकल डोनेशन है. उसे पूरी प्रक्रिया की गंभीरता और कानूनी स्थिति के बारे में कोई सही जानकारी नहीं दी गई.
फर्जी आइ़डेंटिटी का खेल
जांच आगे बढ़ी तो सामने आया कि नाबालिग होने के कारण सीधे इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) प्रक्रिया संभव नहीं थी. यहीं से फर्जी दस्तावेजों का खेल शुरू हुआ. पुलिस के अनुसार, सीमा नाम की महिला के पास लड़की को ले जाया गया. सीमा के बेटे हिमांशु ने फर्जी आधार कार्ड तैयार किया. उस आधार में लड़की की उम्र बालिग दिखाई गई. साथ ही उसे विवाहित भी दर्शाया गया. इसके बाद उसे IVF सेंटर की एक रजिस्टर्ड एजेंट कल्पना के पास ले जाया गया. वहां फर्जी कंसेंट एफिडेविट तैयार किया गया. इन कागजों के आधार पर 20 जनवरी को IVF सेंटर में अंडाणु निकालने की प्रक्रिया की गई.
IVF सेंटर तक कैसे पहुंचा मामला
DCP गंगानगर जोन कुलदीप सिंह गुनावत के मुताबिक, लड़की की मां ने इस मामले में शिकायत की थी. इसके बाद पुलिस ने केस दर्ज किया और कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की. पूछताछ में कड़ियां जुड़ती गईं. जांच में सामने आया कि लड़की पहले पलक के साथ शादी-ब्याह आयोजनों में वेट्रेस का काम करती थी. इसी दौरान संपर्क हुआ. आर्थिक तंगी और जरूरतों को समझकर उसे टारगेट किया गया. डोनर बनकर जल्दी पैसा कमाने का झांसा दिया गया.
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IVF में अंडाणु दान (egg donation) एक नियंत्रित और कानूनी प्रक्रिया है, लेकिन सिर्फ बालिग और मेडिकल जांच के बाद योग्य घोषित महिलाओं के लिए. इसमें हार्मोनल इंजेक्शन, मेडिकल मॉनिटरिंग और सर्जिकल प्रक्रिया शामिल होती है. विशेषज्ञ बताते हैं कि पैसों का लालच देकर नाबालिग से अंडाणु लेना अवैध है. यह अपराध है.
अब तक पुलिस ने पलक, रिंकी, सीमा, हिमांशु और कल्पना को हिरासत में लिया है. सभी से पूछताछ जारी है. दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और सेंटर रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं.
DCP का कहना है कि नाबालिग की मां की तहरीर और पीड़िता के बयान के आधार पर केस दर्ज किया गया है. फर्जी दस्तावेज बनाकर अवैध ओवा एक्सट्रैक्शन कराने के आरोप में कार्रवाई की गई है. पूरे नेटवर्क की जांच जारी है.
क्या IVF एजेंटों का नेटवर्क सक्रिय है?
जांच एजेंसियां अब यह भी देख रही हैं कि क्या IVF डोनर के नाम पर एजेंटों का कोई अनौपचारिक नेटवर्क काम कर रहा था. क्योंकि एजेंट का नाम सामने आया, फर्जी दस्तावेज व्यवस्थित तरीके से बने, कंसेंट एफिडेविट तैयार हुआ. मेडिकल प्रक्रिया पूरी हुई. यह सब बिना नेटवर्क के संभव होना मुश्किल माना जा रहा है.
नाबालिग लड़की की काउंसलिंग जारी
पुलिस के अनुसार, लड़की की काउंसलिंग कराई जा रही है. मेडिकल जांच और मनोवैज्ञानिक सपोर्ट भी दिया जा रहा है. CWC पूरे केस की निगरानी कर रही है.
इस केस को लेकर कई सवाल हैं कि क्या आर्थिक लालच देकर नाबालिगों को मेडिकल डोनेशन के नाम पर फंसाया जा रहा है? क्या फर्जी दस्तावेज बनाना इतना आसान हो गया है? क्या IVF जैसे संवेदनशील सेक्टर में एजेंट आधारित मॉडल का दुरुपयोग हो रहा है?
इस मामले को लेकर जानकारों का कहना है किIVF डोनेशन केवल अधिकृत प्रक्रिया और सत्यापित दस्तावेजों से ही संभव है. पैसों के लालच में मेडिकल प्रक्रिया के लिए तैयार होना खतरनाक हो सकता है. किसी भी जल्दी पैसा ऑफर की पहले कानूनी जांच करें. बच्चों की गतिविधियों और नए संपर्कों पर नजर रखें.
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