'जिंदगी हो या मौत… रहस्य ही रहे प्रतीक', ससुर अरविंद सिंह बिष्ट का भावुक पोस्ट

प्रतीक यादव के निधन पर उनके ससुर अरविंद सिंह बिष्ट ने भावुक नोट लिखा है. इस पोस्ट में प्रतीक के विदेश से लेकर जिम खोलने तक के सफर और निजी जीवन के उतार-चढ़ाव को बेहद सादगी से लिखा गया है.

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स्कूल से बॉडीबिल्डर तक प्रतीक यादव का सफर (File Photo) स्कूल से बॉडीबिल्डर तक प्रतीक यादव का सफर (File Photo)

समर्थ श्रीवास्तव

  • लखनऊ,
  • 14 मई 2026,
  • अपडेटेड 5:54 AM IST

प्रतीक यादव के अचानक निधन ने पूरे परिवार को गहरा सदमा पहुंचाया. सिर्फ 38 साल की उम्र में उनका जाना बहुत मुश्किल लगा. उनके जाने के बाद अब उनके ससुर अरविंद सिंह बिष्ट ने उनके बारे में एक भावुक नोट लिखा है, जिसमें उन्होंने प्रतीक की जिंदगी को बेहद सरल लेकिन गहरे भावों के साथ याद किया है. यह पोस्ट सामने आते ही सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और लोग इसे पढ़कर भावुक हो रहे हैं.

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अरविंद सिंह बिष्ट ने अपने संदेश में लिखा है कि प्रतीक यादव ऐसे इंसान थे जिन्हें पूरी तरह समझ पाना आसान नहीं था. उन्होंने लिखा, 'जैसे जीवन में, वैसे ही मृत्यु में भी प्रतीक यादव एक रहस्य ही बने रहे.' इसी एक लाइन ने पूरे पोस्ट को चर्चा का विषय बना दिया है. पोस्ट में प्रतीक की जिंदगी के अलग-अलग पहलुओं को याद करते हुए उन्हें एक शांत, सादगी भरे और संवेदनशील इंसान के रूप में पेश किया गया है.

फिटनेस से बनी पहचान, युवाओं के लिए बने प्रेरणा

प्रतीक यादव को उनके ससुर अरविंद सिंह बिष्ट फिटनेस प्रेमी और बॉडीबिल्डर के रूप में याद करते हैं. वे लिखते हैं कि प्रतीक ने लखनऊ में जिम कल्चर को नई पहचान दी और युवाओं को फिट रहने की प्रेरणा दी. स्कूल के दिनों में प्रतीक सामान्य और थोड़े भारी शरीर वाले छात्र थे, लेकिन हाईस्कूल के समय में उन्होंने फिटनेस को लेकर ऐसा जुनून दिखाया कि पूरी जिंदगी बदल दी. वे लखनऊ के वॉकिंग प्लाजा और कैंट इलाके में लगातार दौड़ते और एक्सरसाइज करते नजर आते थे. उनकी मेहनत और अनुशासन ने उन्हें एक फिट और प्रेरणादायक व्यक्तित्व बना दिया.

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अरविंद सिंह अपने नोट में आगे बताते हैं कि प्रतीक का संबंध देश के एक प्रमुख राजनीतिक परिवार से था. वे मुलायम सिंह यादव और साधना गुप्ता के पुत्र थे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने हमेशा अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश की. परिवार और राजनीति के बड़े माहौल के बीच भी उनका झुकाव अधिकतर फिटनेस, अनुशासन और निजी जीवन की ओर ही रहा.

विदेश से लेकर जिम तक का सफर

प्रतीक यादव ने आगे की पढ़ाई के लिए यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स (UK) में दाखिला लिया. विदेश में रहते हुए भी उनका फिटनेस के प्रति लगाव कम नहीं हुआ, बल्कि और मजबूत हुआ. भारत लौटने के बाद उन्होंने लखनऊ में एक आधुनिक जिम शुरू किया, जहां टेक्नोजिम जैसी एडवांस मशीनें लगाई गईं. यह जिम शहर में युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हुआ और फिटनेस कल्चर को आगे बढ़ाने में इसकी भूमिका रही. राजनीतिक परिवार से आने के बावजूद प्रतीक यादव ने हमेशा खुद को सक्रिय राजनीति से दूर रखा. वे शांत स्वभाव के व्यक्ति थे और अपने निजी कामों और रियल एस्टेट के व्यवसाय में व्यस्त रहते थे.

अपर्णा यादव से रिश्ते की शुरुआत और परिवार का जुड़ाव

अरविंद सिंह बिष्ट अपने नोट में एक पुरानी याद साझा करते हैं, जिसमें वे बताते हैं कि प्रतीक और अपर्णा की मुलाकात की शुरुआत प्रतीक की मां साधना गुप्ता के जन्मदिन समारोह से हुई थी, जो क्लार्क्स अवध होटल में आयोजित किया गया था. अपर्णा को उस पारिवारिक कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था और वे खुद उन्हें वहां छोड़ने गए थे. वहां उन्हें रुकने के लिए काफी आग्रह किया गया, लेकिन उन्होंने लौटना ही बेहतर समझा और घर आ गए.​​​​​​ उसी मौके पर प्रतीक और अपर्णा की पहली बार मुलाकात हुई और यहीं से दोनों के बीच बातचीत और दोस्ती की शुरुआत हुई.

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धीरे-धीरे यह दोस्ती गहरी होती गई और बाद में रिश्ते में बदल गई. अपर्णा जब पढ़ाई के लिए विदेश चली गईं, तब भी दोनों के बीच संपर्क बना रहा. साल 2010 में परिवारों के बीच बातचीत तेज हुई और सगाई का फैसला लिया गया. उस समय लखनऊ में कई परिस्थितियां व्यस्त थीं, लेकिन परिवारों ने मिलकर इस रिश्ते को आगे बढ़ाया. अरविंद सिंह के मुताबिक, यह समय दोनों परिवारों के लिए बेहद खास और यादगार बन गया था.

जीवन के कठिन दौर और भावनात्मक संघर्ष

पोस्ट में यह भी बताया गया है कि प्रतीक यादव के जीवन में कुछ साल बेहद कठिन रहे. कोरोना महामारी के दौरान उनकी सेहत पर असर पड़ा और वे मानसिक रूप से भी काफी परेशान रहने लगे. उस समय न सिर्फ उनकी शारीरिक स्थिति प्रभावित हुई, बल्कि उनका मनोबल भी धीरे-धीरे कमजोर होता गया.

इसके बाद परिवार में हुई दो बड़ी क्षतियों ने उन्हें गहराई से तोड़ दिया. मां और पिता के निधन का असर उनके जीवन पर बहुत भारी पड़ा. करीबी लोगों के मुताबिक, इन घटनाओं के बाद उनकी जिंदगी पहले जैसी नहीं रही. इसी दौरान उन्हें समय-समय पर इलाज के लिए अस्पताल भी जाना पड़ा.

इसके बावजूद उनका स्वभाव हमेशा शांत और विनम्र बना रहा. वे लोगों से पहले की तरह ही सादगी से मिलते थे और अपने व्यवहार में कभी कोई बदलाव नहीं आने देते थे. चाहें परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न रही हों, उन्होंने अपनी सहजता और विनम्रता को आखिरी समय तक बनाए रखा.

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'जिंदगी हो या मौत… रहस्य ही रहे प्रतीक'

पोस्ट के अंत में अरविंद सिंह बिष्ट ने लिखा कि प्रतीक यादव हमेशा एक ऐसे इंसान रहे जिन्हें पूरी तरह समझ पाना आसान नहीं था. इसी कारण उन्होंने उन्हें 'एक रहस्य' कहा. उनकी यही लाइन अब सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चा में है. लोग इसे एक भावुक श्रद्धांजलि के रूप में देख रहे हैं और लगातार साझा कर रहे हैं.

प्रतीक यादव की जिंदगी सिर्फ फिटनेस या राजनीतिक परिवार तक सीमित नहीं थी. यह एक ऐसे इंसान की कहानी भी थी जिसने अपनी अलग पहचान बनाई, युवाओं को प्रेरित किया और अपनी शर्तों पर जीवन जिया. अरविंद सिंह बिष्ट का यह भावुक नोट उनकी जिंदगी के कई अनदेखे पहलुओं को सामने लाता है. यही वजह है कि यह पोस्ट अब लोगों के बीच चर्चा और भावनाओं का विषय बन गया है.
 

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