नोएडा के एक नामी निजी स्कूल में बड़ा लापरवाही का मामला सामने आया है. यहां UKG में पढ़ने वाला एक मासूम बच्चा करीब 7 घंटे तक स्कूल बस में ही बंद रह गया. मामला सामने आने के बाद अभिभावकों में भारी आक्रोश है, वहीं स्कूल प्रबंधन ने बयान जारी कर अपनी सफाई दी है.
जानकारी के मुताबिक, गुरुवार सुबह महागुण मजेरिया सोसाइटी में रहने वाला UKG का एक छात्र घर से स्कूल के लिए स्कूल बस से निकला. बच्चा स्कूल बस में ही पीछे की सीट पर सो गया. स्कूल पहुंचने पर सभी बच्चे नीचे उतर गए, लेकिन ये बच्चा सीट पर ही सोता रह गया.
बस चालक और कंडक्टर ने बस को चेक नहीं किया और बस को स्कूल से लगभग 25 किलोमीटर दूर यार्ड में खड़ा कर दिया. दूसरी ओर बस के भीतर घंटों तक बच्चा मदद के लिए रोता और चिल्लाता रहा, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं था.
छुट्टी के बाद घर नहीं पहुंचा बच्चा तो शुरू हुई तलाश
दोपहर को स्कूल की छुट्टी के समय जब बच्चे की मां स्कूल बस के पास बच्चे को लेने के लिए पहुंची तो बच्चा नहीं मिला, जिसके बाद परिवार घबरा गया. परिवार ने स्कूल से बात की और पता किया तो पता चला कि बच्चा स्कूल पहुंचा ही नहीं. बच्चा स्कूल में एब्सेंट था लेकिन बस के एटेंडेंस में बच्चे का प्रजेंट लगा हुआ था.
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परिवार ने तुरंत बच्चे की तलाश शुरू की और आखिरकार 25 किमी दूर खड़ी बस से बच्चा मिला. परिजनों ने स्कूल प्रशासन और बस स्टाफ पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है.
स्कूल ने पेश की सफाई
स्कूल प्रबंधन ने इस घटना पर आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा, 'आज स्कूल में परिवहन से जुड़ी एक घटना की जानकारी मिली, जिसमें एक छात्र वाहन में आई अचानक तकनीकी समस्या के कारण बस बदलने के बाद भी पुरानी बस में ही रह गया था. जैसे ही ये मामला हमारे संज्ञान में आया, तुरंत कार्रवाई की गई. सफर के दौरान सो गए छात्र तुरंत ढूंढ लिया गया और सुरक्षित रूप से उसके माता-पिता से मिला दिया गया.'
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सुरक्षित है बच्चा
स्कूल प्रबंधन ने आगे बताया, 'हमें ये बताते हुए राहत है कि बच्चा पूरी तरह सुरक्षित है और उसे कोई नुकसान नहीं हुआ है. हर छात्र की सुरक्षा, संरक्षा और कल्याण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. स्कूल प्रबंधन ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए परिवहन संबंधी निर्धारित प्रोटोकॉल की व्यापक समीक्षा शुरू कर दी है.'
स्कूल प्रबंधन ने बताया कि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा ना हो, इसके लिए सुरक्षा उपाय लागू किए जा रहे हैं.
(इनपुट- भूपेंद्र चौधरी)
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