वर्ल्ड क्लास सुविधाओं से लैस नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, सीएम योगी को पेश किया गया एयरोड्रम लाइसेंस

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को वर्ल्ड क्लास सुविधाओं से लैस किया जा रहा है. यह एयरपोर्ट राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को देश और दुनिया के प्रमुख शहरों से जोड़ने वाला अहम केंद्र बनेगा. इंटरनेशनल एयरपोर्ट के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर उन्हें एयरोड्रोम लाइसेंस पेश किया.

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CM योगी भारत सरकार द्वारा जारी एयरोड्रम लाइसेंस प्रस्तुत किया गया. (Photo: ITG) CM योगी भारत सरकार द्वारा जारी एयरोड्रम लाइसेंस प्रस्तुत किया गया. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • लखनऊ,
  • 10 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 5:03 PM IST

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट एक महत्वपूर्ण ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट है, जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को देश और दुनिया के प्रमुख शहरों से जोड़ेगा. विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस इस हवाई अड्डे का विकास तेजी से किया जा रहा है. एयरपोर्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टोफ श्नेलमन हैं.

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर उन्हें एयरोड्रोम लाइसेंस पेश किया. इस औपचारिक प्रक्रिया के साथ जेवर में बन रहे इस इंटरनेशनल एयरपोर्ट के संचालन की दिशा में जरूरी चरण पूरा हो गया है.

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एयरपोर्ट मैनेजमेंट ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को परियोजना की मौजूदा प्रगति और आने वाले चरणों की जानकारी दी.

एयरपोर्ट का एयरोड्रोम सिक्योरिटी प्रोग्राम फिलहाल ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) के पास समीक्षा के लिए लंबित है. जैसे ही सुरक्षा मंजूरी मिल जाएगी, एयरपोर्ट मैनेजमेंट संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर औपचारिक उद्घाटन और कमर्शियल फ्लाइट्स शुरू करने की तारीख तय करेगा.

देश-दुनिया से आसान होगी कनेक्टिवीटी

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का विकास चार चरणों में किया जा रहा है. गौतम बुद्ध नगर के जेवर में बन रहा यह हवाई अड्डा देश और दुनिया के बीच कनेक्टिविटी को और आसान बनाएगा.

पहले चरण में एक रनवे और एक यात्री टर्मिनल भवन का निर्माण किया गया है, जिसकी वार्षिक क्षमता लगभग 1.2 करोड़ यात्रियों की है.

दूसरे चरण में क्षमता बढ़ाकर 3 करोड़ यात्रियों तक की जाएगी. तीसरे और चौथे चरण में विस्तार के साथ, कुल क्षमता को 7 करोड़ यात्रियों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है. 

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पहले चरण में, टर्मिनल भवन का क्षेत्रफल लगभग 1.38 लाख वर्ग मीटर होगा, जिसमें 48 चेक-इन काउंटर, 9 सुरक्षा जांच लेन और 9 इमिग्रेशन काउंटर होंगे. यात्रियों की सुविधा के लिए डोमेस्टिक और इंटरनेशनल लाउंज भी विकसित किए जा रहे हैं.

इसके अलावा 10 एयरोब्रिज और 28 विमान पार्किंग स्टैंड की व्यवस्था की गई है. रनवे को इस तरह विकसित किया गया है कि यहां प्रति घंटे करीब 30 उड़ानों का संचालन संभव होगा. एयरपोर्ट परिसर में एक आधुनिक कार्गो और लॉजिस्टिक्स हब भी बनाया जा रहा है.

शुरुआती चरण में इसकी क्षमता करीब 2.5 लाख टन कार्गो प्रति वर्ष होगी, जिसे आगे बढ़ाकर 15 लाख टन तक किया जाएगा.

तकनीकी दृष्टि से भी एयरपोर्ट को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है. यात्रियों को तेज और सहज यात्रा अनुभव देने के लिए डिजीयात्रा आधारित बायोमेट्रिक प्रोसेसिंग, सेल्फ बैगेज ड्रॉप और डिजिटल पैसेंजर प्रोसेसिंग सिस्टम लागू किए जा रहे हैं.

सस्टेनेबल डेवलपमेंट को ध्यान में रखते हुए एयरपोर्ट को नेट-ज़ीरो एमिशन्स के लक्ष्य के साथ विकसित किया जा रहा है. परिसर में सोलर एनर्जी सिस्टम, रेन वाटर हार्वेस्टिंग और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं.

विशेषज्ञों का मानना है कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के संचालन शुरू होने के बाद दिल्ली-एनसीआर के हवाई यातायात पर दबाव कम होगा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में निवेश, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.

(Input: Chetan Bhutani)

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