उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित उच्चस्तरीय कमेटी ने ग्रेटर नोएडा में प्रेस वार्ता कर स्पष्ट किया कि श्रमिकों के बीच न्यूनतम वेतन 20,000 रुपये होने की गलत सूचना फैलाकर हिंसा भड़काने की साजिश रची गई थी. मुख्य सचिव दीपक कुमार और प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि भारत सरकार अभी लेबर कोड की प्रक्रिया में है और उत्तर प्रदेश में भी वेतन बढ़ोतरी पर कार्यवाही चल रही है. वहीं, 15 अप्रैल को डीएम मेधा रूपम ने सूरजपुर इंडस्ट्रियल एरिया में श्रमिकों से सीधा संवाद कर उन्हें शांति बनाए रखने और बातचीत के जरिए समस्या सुलझाने का भरोसा दिलाया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रशासन अब उन बाहरी अराजक तत्वों को चिन्हित कर रहा है जिन्होंने औद्योगिक माहौल बिगाड़ने की कोशिश की.
अफवाह ने बिगाड़ा एनसीआर का माहौल
मुख्य सचिव दीपक कुमार के मुताबिक, यह भ्रामक अभियान पहले हरियाणा से शुरू हुआ. वहां यह अफवाह फैलाई गई कि केंद्र सरकार ने न्यूनतम मजदूरी 20,000 रुपये कर दी है और राज्य सरकारों ने इसे मंजूरी दे दी है, जिसे उद्यमी लागू नहीं कर रहे. वास्तविकता यह है कि यह प्रक्रिया अभी केंद्र और राज्य स्तर पर विचाराधीन है. इसी गलत जानकारी के कारण एनसीआर के श्रमिक उद्वेलित हुए.
श्रमिक बनाम सरकार की साजिश
कमेटी के सदस्य आलोक कुमार ने कहा कि इंटेलिजेंस इनपुट के अनुसार, श्रमिकों की कुछ मांगें जायज हैं, लेकिन उनकी आड़ में बाहरी तत्व माहौल खराब कर रहे हैं. ये तत्व 'वर्कर्स बनाम इंडस्ट्री' और 'वर्कर्स बनाम सरकार' का नैरेटिव गढ़ना चाहते हैं.
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा. वहीं, श्रमिकों ने भी स्पष्ट किया है कि वे महंगाई के कारण वेतन वृद्धि तो चाहते हैं, लेकिन हिंसा के पक्षधर नहीं हैं.
डीएम मेधा रूपम ने की अपील
फिलहाल, डीएम मेधा रूपम ने सूरजपुर इंडस्ट्रियल एरिया में श्रमिकों से संवाद कर शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है. फैक्ट्री मालिकों और मजदूरों के साथ बैठक कर भविष्य में विवाद की पुनरावृत्ति रोकने पर जोर दिया. उन्होंने हर समस्या के त्वरित समाधान का भरोसा भी दिया. डीएम ने अपील की कि किसी भी मुद्दे पर हिंसा नहीं होनी चाहिए बल्कि बातचीत के जरिए हल निकाला जाए.
अरुण त्यागी