कांग्रेस छोड़कर क्या फंस गए नसीमुद्दीन? अखिलेश-मायावती-चंद्रशेखर से उम्मीदें

पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने अपने करीब 6 दर्जन नेताओं के साथ 24 जनवरी को कांग्रेस छोड़ दी थी, उन्होंने 4 फरवरी तक सियासी फैसला लेने का ऐलान किया था. अब यह डेडलाइन निकल जाने के बाद सवाल उठने लगा है कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी कहीं सियासी मंझधार में तो नहीं फंस गए हैं.

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नसीमुद्दीन सिद्दीकी का सियासी ठिकाना कहां होगा (Photo-ITG) नसीमुद्दीन सिद्दीकी का सियासी ठिकाना कहां होगा (Photo-ITG)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 06 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:35 PM IST

उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों सभी की निगाहें नसीमुद्दीन सिद्दीकी पर लगी है. कांग्रेस छोड़े हुए नसीमुद्दीन सिद्दीकी को दो हफ्ते से ज्यादा का वक्त बीत गया है, लेकिन अभी तक उन्होंने किसी भी पार्टी का दामन नहीं थामा. इतना ही नहीं नसीमुद्दीन के साथ कांग्रेस छोड़ने वाले नेता भी कशमकश में स्थिति में है, क्योंकि उनका सियासी भविष्य का क्या होगा? 

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कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद से नसीमुद्दीन सिद्दीकी दलित नेता चंद्रशेखर आजाद से लेकर असदुद्दीन ओवैसी, अखिलेश यादव और बसपा प्रमुख मायावती तक की तारीफ कर चुके हैं. इसके बावजूद अभी तक उनके लिए कोई भी दल उन्हें लेने के लिए बहुत ज्यादा बेताब नहीं है. ऐसे में कांग्रेस छोड़कर नसीमुद्दीन सिद्दीकी कहीं सियासी मंझधार में तो नहीं फंस गए हैं? 

सियासी मंझधार में फंसे नसीमुद्दीन सिद्दीकी 
यूपी की सियासत में एक समय नसीमुद्दीन सिद्दीकी की सियासी तूती बोलती थी. मायावती के राइट हैंड माने जाते थे और बसपा की सरकार में एक दर्जन से ज्यादा मंत्रालय का कार्यभार संभाल रहे थे. बसपा में मुस्लिम राजनीति के चेहरे नसीमुद्दीन हुआ करते थे, लेकिन 2017 में उन्हें मायावती ने पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया. बसपा ने उन पर पार्टी विरोधी काम करने का आरोप लगाया था तो नसीमुद्दीन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके मायावती पर ब्लैकमेल करने के गंभीर आरोप लगाए. 

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बसपा छोड़ने के बाद नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कांग्रेस का दामन थाम लिया. कांग्रेस में रहते हुए नसीमुद्दीन की पहचान एक उत्तर प्रदेश के एक बड़े मुस्लिम नेता के तौर पर रही है, लेकिन बसपा जैसा सियासी मुकाम नहीं मिला. ऐसे में उन्होंने हाल ही में 72 करीबी नेताओं के साथ कांग्रेस को अलविदा कह दिया. उनके साथ दो दर्जन पूर्व विधायक ने भी कांग्रेस छोड़ने का ऐलान कर दिया. 

नसीमुद्दीन की सियासी भविष्य पर सवाल
नसीमुद्दीन ने कांग्रेस छोड़े हुए दो हफ्ते से ज्यादा का समय बीत गया है, लेकिन अभी तक किसी भी पार्टी का दामन नहीं थामा है.  नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि मेरे साथ 73 और लोग थे, जिन्होंने पार्टी छोड़ी है.हम सभी से सलाह ले रहे हैं. इसके लिए मैं अलग-अलग जिलों में उनके पास जा रहा हूं. मैं सलाह ले रहा हूं कि मेरा अगला कदम क्या होना चाहिए? 

उन्होने कहा था कि अगर किसी पार्टी में जाना है तो किस पार्टी में जाना है? इसके साथ अगर अपना संगठन बनाना है तो कैसे चलाना है? क्या करना है? इसके बाद मैं अपने पत्ते खोल दूंगा. इसके लिए उन्होंने 4 फरवरी की तारीख तय की थी, जो अब निकल चुकी है. ऐसे में नसीमुद्दीन के साथ-साथ उनके साथ छोड़ने वाले नेताओं पर सियासी सस्पेंस गहराता जा रहा है. नसीमुद्दीन को लेने के लिए भी कोई दल बहुत ज्यादा उत्सुक नजर नहीं आ रहे हैं. ऐसे में नसीमुद्दीन कांग्रेस छोड़कर कहीं सियासी मंझधार में तो नहीं फंस गए? 

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अखिलेश-मायावती-ओवैसी की तारीफ
कांग्रेस छोड़ चुके नसीमुद्दीन सिद्दीकी बसपा प्रमुख मायावती से लेकर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव तक की तारीफ कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि मायावती अगर खुद बुलाएं या किसी से संदेश भिजवाएं, तो मैं उनसे मिलने ज़रूर जाऊंगा, राजनीति अपनी जगह है और संस्कार अपनी जगह है. आज भी मायावती का फोन आता है, तो वो उनके सम्मान में खड़े होकर ही बात करते हैं. मायावती पर ब्लेकमेलर तक आरोप लगाने वाले नसीमुद्दीन के सुर बदल गए हैं, लेकिन बसपा की तरफ से कोई हरी झंडी नहीं मिल रही. 

मायावती ही नहीं नसीमुद्दीन सिद्दीकी को सपा प्रमुख अखिलेश यादव का पीडीए फॉर्मूला भी काफी पसंद है, जिसे लेकर खुलकर तारीफ कर चुके हैं. इसके अलावा असदुद्दीन ओवैसी की भी नसीमुद्दीन सिद्दीकी तारीफ कर रहे हैं. ओवैसी को अपने से ज्यादा काबिल नेता बता रहे हैं. इसके बाद भी न मायावती, न अखिलेश यादव और न ही ओवैसी ने उन्हें अपनी पार्टी में आने का न्योता दिया.  

चंद्रशेखर आजाद के साथ क्या जाएंगे 
बसपा और कांग्रेस से बाहर हो चुके नसीमुद्दीन सिद्दीकी को लेकर सियासी चर्चा है कि जल्द चंद्रशेखर आज़ाद की आज़ाद समाज पार्टी का दामन थाम सकते हैं. इस बात की उम्मीद इसीलिए भी है कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी बसपा में रहे हो या फिर कांग्रेस में, दोनों पार्टियों में उन्होंने अपनी राजनीति भूमि पश्चिम यूपी को बनाए रखा था. कांग्रेस में रहते हुए 2019 में पश्चिमी यूपी की बिजनौर सीट से चुनाव भी लड़े थे. 

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नसीमुद्दीन के ज्यादातर समर्थक पश्चिमी यूपी की है. यही वह इलाका है, जहां पर चंद्रशेखर आजाद सियासी जमीन तलाश रहे हैं. पश्चिम यूपी की जमान दलित-मुस्लिम राजनीति की लिए भी काफी उपजाऊ मानी जाती है. ऐसे में नसीमुद्दीन सिद्दीकी के लिए भी सबसे ज्यादा मुफीद आजाद समाज पार्टी हो सकती है, जहां पर बसपा जैसा सियासी मुकाम पा सकते हैं. सपा में पहले से ही मुस्लिम नेताओं की पूरी फौज है, जिसके चलते उन्हें सियासी अहमियत मिलना मुश्किल है. 

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