बंदरों को भगाने की ड्यूटी, 12 हजार सैलरी और अब आजादी... दिल छू लेगी लंगूर 'गोलू' की कहानी

यूपी में अलीगढ़ के डीएस कॉलेज में जिस लंगूर 'गोलू' को लोग कभी गार्ड की तरह देखते थे, वह अब अपनी ड्यूटी से आजाद कर दिया गया है. बंदरों से कैंपस को बचाने वाला गोलू अब वन विभाग के फैसले के बाद प्राकृतिक माहौल में लौट गया है. उसे गोलू नाम स्टूडेंट्स ने दिया था. स्टूडेंट्स गोलू के साथ तस्वीरें खिंचाते थे, उसे फैमिली मेंबर की तरह मानते थे.

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दो साल पहले लंगूर 'गोलू' को कैंपस में किया गया था तैनात, छात्रों ने दिया था नाम. (Photo: Screengrab) दो साल पहले लंगूर 'गोलू' को कैंपस में किया गया था तैनात, छात्रों ने दिया था नाम. (Photo: Screengrab)

शिवम सारस्वत

  • अलीगढ़,
  • 25 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 3:47 PM IST

यूपी में अलीगढ़ शहर के धर्म समाज महाविद्यालय (डीएस कॉलेज) में बंदरों के आतंक से राहत दिलाने वाला चर्चित लंगूर गोलू अब आजाद कर दिया गया है. वन विभाग ने उसे उसके प्राकृतिक माहौल में लौटाते हुए कॉलेज परिसर में ही सुरक्षित तरीके से रिलीज कर दिया. इस फैसले के बाद अब गोलू किसी वेतन या ड्यूटी के बंधन में नहीं रहेगा, बल्कि स्वाभाविक तरीके से परिसर में ही रह सकेगा.

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दरअसल, डीएस कॉलेज में लंबे समय से बंदरों का आतंक गंभीर समस्या बना हुआ था. बंदर अक्सर छात्रों के हाथ से खाना छीन लेते थे, उन पर हमला कर देते थे. कई बार क्लासरूम में घुसकर किताबें-कॉपियों तक को नुकसान पहुंचाते थे. इस वजह से पढ़ाई का माहौल भी प्रभावित हो रहा था. छात्र-छात्राएं लगातार डर के साए में रहते थे.

इसी समस्या के समाधान के लिए कॉलेज प्रशासन ने एक अनोखा कदम उठाया. करीब दो साल पहले एक प्रशिक्षित लंगूर को कैंपस में तैनात किया था. छात्रों ने उसे प्यार से गोलू नाम दिया. गोलू को 12 हजार मासिक वेतन पर रखा गया था और उसकी ड्यूटी सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक तय थी.

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लंगूर की मौजूदगी का असर जल्द ही दिखाई देने लगा. जैसे ही गोलू कैंपस में रहता, बंदर आसपास भी नहीं फटकते थे. धीरे-धीरे कॉलेज परिसर से बंदरों की समस्या लगभग पूरी तरह खत्म हो गई. छात्रों और स्टाफ ने राहत की सांस ली और कैंपस में सुरक्षा व सुकून का माहौल बन गया.

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गोलू सिर्फ सुरक्षा का जरिया नहीं रहा, बल्कि छात्रों के बीच आकर्षण का केंद्र भी बन गया. छात्र उसके साथ फोटो खिंचवाते और उसे परिवार के सदस्य की तरह मानने लगे थे.

शहर वन प्रभारी पुत्तन सिंह ने बताया कि वन्यजीवों को कृत्रिम रूप से कंट्रोल करना या बंधन में रखना उचित नहीं है. इसी को ध्यान में रखते हुए गोलू को उसके प्राकृतिक परिवेश में लौटाने का फैसला लिया गया. उन्होंने कहा कि कॉलेज परिसर का वातावरण उसके लिए पहले से अनुकूल है, इसलिए उसे वहीं सुरक्षित रूप से रिलीज किया गया है.

वन विभाग का मानना है कि वन्यजीवों को प्राकृतिक परिस्थितियों में ही रहने देना उनके स्वास्थ्य और व्यवहार के लिए बेहतर होता है. गोलू की रिहाई के बाद एक बड़ा सवाल यह भी है कि क्या अब कॉलेज में बंदरों की समस्या अब नहीं रहेगी. हालांकि कॉलेज प्रशासन और वन विभाग की संयुक्त निगरानी में स्थिति सामान्य बताई जा रही है.

अगर भविष्य में कॉलेज के अंदर बंदरों की समस्या होती है, तो वन विभाग और प्रशासन अन्य विकल्पों पर विचार कर सकता है. फिलहाल गोलू अब सैलरी वाले गार्ड से एक आजाद वन्यजीव बन चुका है, जिसने अपने अनोखे रोल से शहर में एक अलग पहचान बना ली है.

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