'हिंदू धर्म में वापस लौटे लोगों का ध्यान रखना जरूरी...', RSS चीफ मोहन भागवत ने घर वापसी पर दिया जोर

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने लखनऊ में सामाजिक सद्भाव बैठक में हिंदू समाज को संगठित और सशक्त बनने का आह्वान किया. उन्होंने घटती जनसंख्या, जबरन मतांतरण और अवैध घुसपैठ के मुद्दों पर चिंता जताई.

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राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने लखनऊ में सामाजिक सद्भाव बैठक में की शिरकत राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने लखनऊ में सामाजिक सद्भाव बैठक में की शिरकत

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 17 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:51 PM IST

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि हिंदू समाज को किसी से डरने की जरूरत नहीं है, लेकिन परिस्थितियों को लेकर सजग रहना जरूरी है. लखनऊ के निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक में भागवत ने हिंदू समाज से संगठित और सशक्त बनने का आह्वान किया.

बैठक में उन्होंने हिंदुओं की घटती जनसंख्या पर चिंता जताई और लालच या जबरन हो रहे मतांतरण पर रोक लगाने की जरूरत भी बताई. उन्होंने कहा कि 'घर वापसी' के प्रयासों को गति दी जानी चाहिए और जो लोग हिंदू धर्म में वापस आते हैं, उनके सामाजिक पुनर्स्थापन की जिम्मेदारी भी समाज को उठानी होगी.

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घुसपैठ के मुद्दे पर भी की बात
घुसपैठ के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि अवैध रूप से देश में रह रहे लोगों की पहचान कर उन्हें हटाने की नीति अपनाई जानी चाहिए. उनके अनुसार, ऐसे तत्वों को रोजगार या अन्य सुविधाएं नहीं दी जानी चाहिए. परिवार व्यवस्था पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि समाज की स्थिरता के लिए संतुलित जनसंख्या आवश्यक है. वैज्ञानिकों के हवाले से उन्होंने दावा किया कि यदि किसी समाज में औसतन तीन से कम बच्चे होते हैं, तो वह समाज दीर्घकाल में कमजोर हो सकता है. उन्होंने नवदंपतियों को परिवार के प्रति कर्तव्यबोध समझाने की जरूरत बताई और कहा कि विवाह का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सुख नहीं, बल्कि सृष्टि के संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़ा है.

सद्भाव के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि भेदभाव समाज को कमजोर करता है. 'हम सभी एक देश और एक मातृभूमि के पुत्र हैं. मनुष्य होने के नाते हम सब एक हैं,' उन्होंने कहा- उनके अनुसार, सनातन विचारधारा का मूल भाव समन्वय और सद्भाव है, न कि विरोधियों को मिटाने की भावना. मातृशक्ति की भूमिका पर उन्होंने कहा कि परिवार का आधार महिला है. भारतीय परंपरा में महिलाओं को ‘माता’ के रूप में सम्मानित किया गया है. उन्होंने महिलाओं के आत्मरक्षा प्रशिक्षण पर जोर दिया और कहा कि उन्हें अबला नहीं, बल्कि शक्तिस्वरूपा समझा जाना चाहिए.

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सभी करें कानून का पालन- मोहन भागवत
कानून और सामाजिक मुद्दों पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर में उन्होंने कहा कि सभी को कानून का पालन करना चाहिए, और यदि कोई कानून त्रुटिपूर्ण है तो उसे संवैधानिक तरीकों से बदला जा सकता है. जातीय भेदभाव पर उन्होंने कहा कि समाज में अपनेपन का भाव बढ़ेगा तो ऐसी समस्याएं स्वतः कम होंगी. उन्होंने यह भी कहा कि भारत भविष्य में विश्व को मार्गदर्शन देने की क्षमता रखता है और अनेक वैश्विक समस्याओं का समाधान भारतीय चिंतन में निहित है.

बैठक में सिख, बौद्ध और जैन समाज के प्रतिनिधियों के साथ विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठनों के सदस्य मौजूद रहे. उन्होंने बस्ती स्तर पर नियमित सामाजिक सद्भाव बैठकों के आयोजन का आह्वान किया, ताकि संवाद के माध्यम से गलतफहमियों को दूर किया जा सके और समाज में समन्वय को मजबूत किया जा सके.

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