'तोका बंद कइके डंडा से मारब, नहीं सुधर जा...', मिर्जापुर में जल निगम के अधिकारियों पर भड़के BJP विधायक

यूपी के मिर्जापुर में सड़कों की खुदाई और सीवर लाइन के अधूरे कामों ने जनता की मुसीबत बढ़ा दी है. जन आक्रोश को देखते हुए भाजपा विधायक रत्नाकर मिश्रा ने प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं होगी और अधिकारी 15 दिन में सुधार करें.

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मिर्जापुर में बीजेपी विधायक का वीडियो वायरल (Photo- Screengrab) मिर्जापुर में बीजेपी विधायक का वीडियो वायरल (Photo- Screengrab)

सुरेश कुमार सिंह

  • मिर्जापुर ,
  • 09 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 8:41 AM IST

मिर्जापुर जिले में विकास कार्यों की धीमी रफ्तार को लेकर भाजपा विधायक रत्नाकर मिश्रा ने प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है. शहर में जल जीवन मिशन, सीवर लाइन और सड़कों की खुदाई से जनता को हो रही भारी परेशानी के कारण विधायक ने यह मोर्चा खोला. निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों को सार्वजनिक रूप से फटकार लगाते हुए स्पष्ट किया कि जनता की अनदेखी अब नहीं चलेगी. उन्होंने अस्थाई पुल के बहने और जलभराव जैसी गंभीर समस्याओं पर जवाब तलब किया. 

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विधायक ने प्रशासन को 15 दिनों के भीतर व्यवस्था सुधारने का सख्त अल्टीमेटम दिया है. बीच सड़क बातचीत के दौरान उन्होंने स्थानीय भाषा में कहा कि 'अबहीं, तोहे बंद कइके डंडा से मारब, नहीं सुधर जा, सारे काम दुरुस्त कर ले जा, पानी सप्लाई जल्दी से जल्दी चालू करावा.' वहीं, वायरल वीडियो पर सवाल पूछने पर विधायक ने कहा कि जनहित के लिए किसी भी हद तक जा सकता हूं. अगर जनता बिना पानी के मरेगी तो क्या अधिकारी सेफ रहेंगे.

जनता का टूटा सब्र, विधायक ने दिखाई सख्ती

विधायक रत्नाकर मिश्रा ने कहा कि 'हर घर जल' योजना और सीवर निर्माण कार्यों ने पूरे शहर की रफ्तार थाम दी है. जगह-जगह खुदाई के बाद निर्माण में हो रही देरी से नागरिक त्रस्त हैं. विधायक ने कड़े लहजे में अधिकारियों से कहा कि वे अपनी कार्यशैली बदलें, वरना कड़ी कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार रहें. उन्होंने जोर देकर कहा कि अधिकारियों की लापरवाही के कारण आम जनता को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.

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अस्थायी पुल और सीवर पर अधिकारियों की घेराबंदी

शहर में अस्थायी पुल के बह जाने और नालों के निर्माण में लापरवाही को लेकर विवाद और गहरा गया है. विधायक ने अधिकारियों को उनकी जिम्मेदारी का अहसास कराते हुए पूछा कि आखिर कब तक लोग जलभराव और आवाजाही की बाधाओं को झेलेंगे. हालांकि, अधिकारियों ने तकनीकी बाधाओं और सड़क निर्माण के मानकों का हवाला देकर सफाई देने की कोशिश की, लेकिन विधायक उनके तर्कों से बिल्कुल संतुष्ट नजर नहीं आए.

15 दिन का अल्टीमेटम और राजनीतिक मायने

विधायक ने साफ कर दिया है कि यदि अगले 15 दिनों में कार्य स्थल की बाधाएं दूर नहीं हुईं, तो वे शासन स्तर पर सख्त कदम उठाएंगे. राजनीतिक गलियारों में इस कदम को चुनाव से पहले जनता के प्रति 'जवाबदेही' तय करने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है. 

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