गोरखपुर में 1055 करोड़ की परियोजनाओं के बीच विकास की बात चल रही थी, लेकिन असली चर्चा एक वायरल वीडियो ने बटोर ली. दरअसल, कार्यक्रम स्थल पर टायरों से बनी एक शेर की प्रतिमा आकर्षण का केंद्र थी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जब उस प्रतिमा के सामने फोटो खिंचवाने पहुंचे, तभी पास खड़े सांसद रवि किशन ने अपने फिल्मी अंदाज में उन्हें दिशा देना शुरू कर दिया. उन्होंने कहा- महाराज जी, थोड़ा इधर… हां, अब लो एंगल लीजिए… शेर का फेस आना चाहिए. उनकी यह बात सुनते ही आसपास मौजूद लोग अपनी हंसी नहीं रोक पाए. खुद मुख्यमंत्री भी मुस्कुरा उठे.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अगर नीयत साफ हो और इरादा मजबूत हो, तो नियति बदलने में देर नहीं लगती. उन्होंने गोरखपुर के उदाहरण से इसे समझाते हुए कहा कि बीते नौ वर्षों में शहर ने जो बदलाव देखा है, वह इसी सोच का परिणाम है. उन्होंने कहा कि विकास सिर्फ योजनाएं बनाने से नहीं आता, बल्कि उसे जमीन पर उतारने की प्रतिबद्धता भी उतनी ही जरूरी होती है. मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर आज उस दिशा में आगे बढ़ चुका है, जहां कभी जाना मुश्किल लगता था. यह बदलाव अचानक नहीं आया, बल्कि लगातार प्रयासों और स्पष्ट दृष्टिकोण का नतीजा है.
कचरे से ईको पार्क तक की यात्रा
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में एकला बांध का जिक्र करते हुए पुराने दिनों को याद किया. उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब गोरखपुर में प्रवेश करते ही लोगों का सामना कचरे के ढेर से होता था. बदबू और गंदगी शहर की पहचान बन चुकी थी. लेकिन आज वही जगह एक आकर्षक ईको पार्क में बदल चुकी है. उन्होंने बताया कि पहले ट्रांसपोर्टनगर की जगह भी कचरा डंप किया जाता था, जिसे बाद में विकसित कर बाजार और मंडी के रूप में बदल दिया गया. ट्रांसपोर्टनगर बनने के बाद कचरा एकला बांध पर डाला जाने लगा, जिससे पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ा. वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण और जमीन की गुणवत्ता पर इसका प्रभाव दिखने लगा. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) द्वारा जुर्माना भी लगाया गया. मुख्यमंत्री ने कहा कि जब इस समस्या को गंभीरता से लिया गया और सही दिशा में काम हुआ, तो नतीजा सामने है आज वहां एक सुंदर और उपयोगी ईको पार्क मौजूद है.
कचरा में हीरा खोज लेते हैं सीएम योगी : रविकिशन
कार्यक्रम में सांसद रवि किशन ने भी मुख्यमंत्री की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी सोच अलग है. उन्होंने कहा, योगी जी कचरे में भी हीरा ढूंढ लेते हैं. जहां कुछ नहीं दिखता, वहां भी संभावनाएं तलाश लेते हैं. उन्होंने एकला बांध का उदाहरण देते हुए कहा कि जहां पहले गटर और गंदगी थी, वहां अब रोजगार के अवसर बन रहे हैं. भविष्य में यहां फिल्म शूटिंग भी हो सकती है, जिससे स्थानीय युवाओं को फायदा मिलेगा.
गोरखपुर की बदली तस्वीर
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर ने हर क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है. सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल, उद्योग और रोजगार हर क्षेत्र में बदलाव साफ दिखाई देता है. उन्होंने बताया कि पहले जहां खेल के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं थीं, वहीं अब कई मिनी स्टेडियम बन चुके हैं. गोरखपुर ग्रामीण क्षेत्र में एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का स्टेडियम भी तैयार हो रहा है. स्वास्थ्य सेवाओं में एम्स और बीआरडी मेडिकल कॉलेज ने शहर को नई पहचान दी है. शिक्षा के क्षेत्र में चार विश्वविद्यालयों की मौजूदगी ने गोरखपुर को एक शैक्षणिक केंद्र बना दिया है. इसके अलावा, खाद कारखाने का पुनरुद्धार और पिपराइच में चीनी मिल की स्थापना से रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं.
स्मार्ट और सुरक्षित शहर की दिशा में कदम
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में स्मार्ट सिटी और सुरक्षित शहर की अवधारणा पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के विजन के अनुरूप प्रदेश के सभी नगर निगम इस दिशा में काम कर रहे हैं. गोरखपुर में स्मार्ट सड़कों का निर्माण, ग्रीन बेल्ट और मिनी फॉरेस्टेशन, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और पार्कों का सौंदर्यीकरण जैसे काम तेजी से किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि खुली नालियों को ढकने और जल निकासी की बेहतर व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि शहर साफ और सुरक्षित बन सके.
स्वच्छता को जन आंदोलन बनाने की कोशिश
कार्यक्रम के दौरान ‘स्वच्छ स्कूल अभियान’ की शुरुआत भी की गई. मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अभियान के तहत एक लाख से अधिक स्कूली बच्चों को जोड़ा जाएगा. बच्चों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश घर-घर पहुंचाने की योजना है. उन्हें ‘रिड्यूस, रियूज और रिसाइकिल’ के बारे में जागरूक किया जाएगा. इसके अलावा वेस्ट टू आर्ट, निबंध और रील्स प्रतियोगिताओं के जरिए भी इस अभियान को व्यापक बनाया जाएगा. इसमें हजारों शिक्षक और अभिभावक भी शामिल होंगे, ताकि इसे जन आंदोलन का रूप दिया जा सके.
सियासी तंज भी आया सामने
इस पूरे घटनाक्रम पर सियासत भी सक्रिय हो गई. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए टिप्पणी की. उन्होंने ‘नकली शेर’ को लेकर व्यंग्य करते हुए कहा कि असली शेर सामने आ जाए तो तस्वीर बदल सकती है. साथ ही उन्होंने इटावा की लायन सफारी का जिक्र करते हुए तुलना भी की. उन्होंने लिखा कि ‘नक़ली शेर’ के साथ मुस्कान असली देखें तो हो जाएं धड़ाम. लगता है कोरोना काल का शेर है, तभी ‘बाल-अयाल’ इतने लंबे हैं. शेर बनाना ही था तो क़ायदे का बनाते और इसके लिए सपाकाल में बनी इटावा की लायन सफ़ारी ही देख आते.
गजेंद्र त्रिपाठी