लखनऊ की सेशन कोर्ट ने धर्मांतरण और दुष्कर्म के गंभीर मामले में मुख्य आरोपी रमीज उर्फ रमीजुद्दीन नायक की जमानत अर्जी खारिज कर दी है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मामले की प्रकृति अत्यंत गंभीर है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की भूमिका स्पष्ट रूप से सामने आती है, इसलिए उसे राहत देना उचित नहीं होगा.
दरअसल यह मामला लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) से जुड़ा है. पीड़िता ने आरोप लगाया है कि पढ़ाई के दौरान उसकी पहचान रमीज से हुई थी. शुरुआत में दोनों के बीच दोस्ती हुई, जो धीरे-धीरे प्रेम संबंध में बदल गई. इसी दौरान आरोपी ने शादी का झांसा देकर कई बार उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए.
पीड़िता ने लगाया है ये आरोपी
पीड़िता के अनुसार बाद में वह गर्भवती हो गई, जिसके बाद आरोपी ने उसे दवाइयां देकर गर्भपात करने के लिए मजबूर किया. इस पूरे दौरान आरोपी ने उसे मानसिक रूप से भी प्रताड़ित किया. पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया है कि उसे लगातार दबाव में रखा गया और धमकियां दी जाती रहीं.
मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि आरोपी ने पीड़िता पर धर्म परिवर्तन करने का दबाव बनाया. इसके अलावा, आपत्तिजनक फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर उसे डराया गया. लगातार मानसिक तनाव और प्रताड़ना से परेशान होकर पीड़िता ने आत्महत्या करने की कोशिश भी की थी.
पुलिस हिरासत में रहेगा आरोपी
कोर्ट में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कहा कि आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं और वह इस पूरे मामले का मुख्य अभियुक्त है. ऐसे में उसे जमानत पर रिहा करना जांच और न्याय प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है. वहीं बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई कि आरोपी को झूठे आरोपों में फंसाया गया है और उसे जमानत दी जानी चाहिए, लेकिन कोर्ट ने इन दलीलों को अस्वीकार कर दिया.
सेशन कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि इस मामले में अन्य सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है. लेकिन मुख्य आरोपी रमीज की भूमिका अलग और अधिक गंभीर पाई गई है. इसी आधार पर उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी गई. फिलहाल इस फैसले के बाद मामले की जांच आगे बढ़ेगी और आरोपी न्यायिक हिरासत में ही रहेगा.
आशीष श्रीवास्तव