लखनऊ के पंतनगर-खुर्रमनगर इलाके में नहीं चलेगा बुलडोजर, यूपी सरकार का फैसला

Lucknow News: सीएम योगी आदित्यनाथ ने अफसरों के साथ हुई बैठक में लखनऊ के पंतनगर, खुर्रमनगर, अबरार नगर समेत कुकरैल नदी किनारे बने कथित अवैध मकानों पर संभावित कार्रवाई का संज्ञान लिया है.

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लखनऊ: मकान तोड़ने के खिलाफ पंतनगर के लोगों का प्रोटेस्ट लखनऊ: मकान तोड़ने के खिलाफ पंतनगर के लोगों का प्रोटेस्ट

समर्थ श्रीवास्तव / संतोष शर्मा

  • लखनऊ ,
  • 16 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 12:48 PM IST

लखनऊ में पंतनगर, खुर्रमनगर, अबरार नगर समेत कुकरैल नदी किनारे बने मकान अब नहीं तोड़े जाएंगे. सीएम योगी आदित्यनाथ के ऑफिस के एक्स (ट्विटर) हैंडल से की गई पोस्ट की बाद ऐसी चर्चा चल पड़ी है. हालांकि, कुछ ही देर बाद ये पोस्ट डिलीट कर दिया गया. इसको लेकर अभी तक कोई भी आधिकारिक बयान नहीं आया है. 

इस बीच खबर है कि कुकरैल किनारे बसे रहीम नगर, पंतनगर, अबरार नगर के प्रतिनिधिमंडल सीएम योगी मुलाकात करेंगे. एलडीए के वीसी के जरिए ये मुलाकात हो रही है. प्रतिनिधिमंडल में शामिल लोग घरों की रजिस्ट्री व अन्य दस्तावेज लेकर सीएम से मिलेंगे. 

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सीएम ऑफिस की ओर से एक्स पर जो बयान जारी किया गया उसके मुताबिक, कुकरैल नदी के दोनों तरफ मौजूदा 35 मीटर की चौड़ाई पर्याप्त है, इसलिए इस सीमा के भीतर कोई भी संरचना प्रभावित नहीं होगी. बयान में नदी के दोनों ओर 50 मीटर का बफर जोन स्थापित करने के पिछले निर्णय पर सवाल भी उठाया गया. इस खबर के आते ही पंतनगर, खुर्रमनगर, अबरार नगर आदि इलाकों के निवासियों ने जमकर जश्न मनाया और सीएम को धन्यवाद कहा. 

बता दें कि कुकरैल रिवरफ्रंट के दायरे में अकबरनगर के बाद आए रहीमनगर, खुर्रमनगर, पंतनगर, इंद्रप्रस्थ नगर और अबरार नगर के लोग अपने घरों को अवैध बताकर लाल निशान लगाए जाने से गुस्से और गम में थे. इसके विरोध में लोगों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया था.

ये भी पढ़ें- पंतनगर के मकान अचानक कैसे हुए अवैध? दीवारों पर दिखे खौफ के लाल निशान, निवासियों ने CM योगी से लगाई गुहार

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इस बीच मामला तूल पकड़ने लगा. बात सीएम योगी तक पहुंची. जिसके बाद इस मामले को लेकर उन्होंने अधिकारियों संग सोमवार को बैठक की. बैठक के बाद सीएम ऑफिस की ओर से निर्देश दिया गया कि पंतनगर, खुर्रम नगर और अबरार नगर आदि में कुकरैल नदी के किनारे बने घरों को नहीं तोड़े जाएंगे. यहां बने सैकड़ों मकानों पर पिछले दिनों प्रशासन की ओर से 'लाल निशान' लगाया था, जिसका मतलब था कि इन घरों का तोड़ा जाएगा. हालांकि, अब ये पोस्ट डिलीट हो गई है. 

सीएम ऑफिस की ओर से कहा गया कि कुकरैल नदी के पास मौजूदा 35 मीटर की चौड़ाई पर्याप्त है, इस सीमा के भीतर कोई भी स्ट्रक्चर प्रभावित नहीं होगा, यानि तोड़फोड़ नहीं होगी. सीएम ऑफिस की ओर से आश्वासन मिलने के बाद इलाके के निवासी से खुशी से झूम उठे. 

गौरतलब है कि इससे पहले जो बुलडोजर पहले लखनऊ के अकबरगनर में अवैध घोषित मकानों पर चला, उसके अब अबरारनगर, रहीम नगर, पंत नगर तक पहुंचने का डर था. पंतनगर में रहने वाले बच्चे गुहार लगा रहे थे कि 'हमारा घर मत तोड़िए, हम लोग कहां जाएंगे. दस्तावेज वैध हैं.'

कुकरैल के किनारे चिन्हित किए गए घर 

दरअसल, लखनऊ में कुकरैल नाले के किनारे घरों को चिन्हित किया जा रहा है. कुकरैल नाले के पचास मीटर के दायरे में बने घरों को अवैध बताया जा रहा है. जल्द ही इन घरों पर हो सकता है कि सिंचाई विभाग, नगर निगम और जिला प्रशासन की टीम मिलकर बुलडोजर कार्रवाई कर दे. 

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खनऊ का अकबरनगर अब इतिहास बन चुका है. वहां जमीन समतल हो चुकी है. माना जा रहा है कि अब पंतनगर और रहीमनगर की बारी है. प्रशासन लखनऊ में विकास के एक प्रोजेक्ट के लिए मकानों को अवैध घोषित कर गिराने की तैयारी में है. 

गोमती नदी की सहायक नदी है कुकरैल 

मालूम हो कि लखनऊ में कुकरैल को अधिकतर लोग नाले के नाम से ही जानते आए हैं. लेकिन प्रशासन का कहना है कि कुकरैल गोमती नदी की सहायक नदी है. अब इसके पचास मीटर के दायरे को फ्लड प्लेन जोन बताते हुए उसमें हुए निर्माण को अवैध घोषित किया जा रहा है. लखनऊ में पहले अकबरनगर में 1800 मकानों को अवैध बताकर गिराया गया. अब चार इलाकों में 2000 मकान को गिराए जाने की आशंका है.

अधिकारी बताएं कि घर अवैध कैसे?

हालांकि, अभी सर्वे करके घरों पर सिर्फ लाल निशान ही लगाया गया है. यहां रहने वाले लोग पूछ रहे हैं कि जहां वो चार-पांच दशक से रहते आए हैं, जहां सरकार ने विकास का काम कराया है, जहां से वोट देते आए, वो सबकुछ अवैध कैसे हो सकता है? लखनऊ में पंतनगर के लोग एक हाथ में रजिस्ट्री की कॉपी लेकर सत्याग्रह कर रहे हैं. कुछ लोगों ने अपने घर के बाहर रजिस्ट्री की फोटोकॉपी चिपका दी है. लोगों का कहना है कि वे नगर निगम हाउस टैक्स की रसीद, पानी का बिल देते हैं. लेखपत्र का विवरण दे रखा है. दस्तावेज अवैध हैं तो वैध क्या है. 1800 से ज्यादा मकान हैं, सिंचाई विभाग ने सर्वे कर लिया है और कह रहा है कि ये मकान अवैध हैं.

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