प्रयागराज माघ मेला: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के 'शंकराचार्य' पद पर कानूनी संकट! प्रशासन ने थमाया 24 घंटे का नोटिस, जानिए पूरा मामला

प्रयागराज माघ मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के 'शंकराचार्य' संबोधन पर कड़ा रुख अपनाया है. सुप्रीम कोर्ट के 2022 के स्थगन आदेश का हवाला देते हुए प्रशासन ने उनसे 24 घंटे में जवाब मांगा है कि वे विचाराधीन मामले के बावजूद खुद को ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य कैसे घोषित कर रहे हैं.

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'शंकराचार्य' पद को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस (File Photo- ITG) 'शंकराचार्य' पद को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस (File Photo- ITG)

संतोष शर्मा

  • प्रयागराज ,
  • 20 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:59 PM IST

प्रयागराज माघ मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक औपचारिक नोटिस जारी कर उनके शंकराचार्य पद के दावे पर स्पष्टीकरण मांगा है. प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में लंबित सिविल अपील संख्या 3010/2020 और 3011/2020 का संदर्भ देते हुए कहा कि अदालत ने अक्टूबर 2022 में ज्योतिष्पीठ के किसी भी नए पट्टाभिषेक पर रोक लगा दी थी. 

इस नोटिस में सवाल किया गया है कि जब शीर्ष अदालत ने अंतिम फैसला होने तक किसी को भी शंकराचार्य नियुक्त करने से मना किया है, तो स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिविर और बोर्ड पर इस पद का उपयोग कैसे कर रहे हैं. प्रशासन ने इसे अदालत की अवमानना का संकेत मानते हुए 24 घंटे के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला

मेला प्राधिकरण ने अपने नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के 14 अक्टूबर 2022 के उस आदेश को विस्तार से लिखा है, जिसमें प्रार्थना खंड (a) को स्वीकार किया गया था. इस आदेश के तहत ज्योतिष्पीठ बद्रीनाथ या किसी अन्य संगठन को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद या किसी अन्य व्यक्ति का पट्टाभिषेक करने से रोक दिया गया था. प्रशासन का कहना है कि चूंकि मुख्य अपील अभी भी विचाराधीन है और कोई नया आदेश नहीं आया है, इसलिए वर्तमान में ज्योतिष्पीठ का कोई भी नया शंकराचार्य कानूनी रूप से मान्य नहीं है.

विधिक राय और जमीन आवंटन का पेंच

प्राधिकरण ने विभिन्न अधिवक्ताओं द्वारा दी गई विधिक राय का भी उल्लेख किया है. कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ज्योतिष्पीठ के उत्तराधिकारी के रूप में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को किसी भी प्रकार की जमीन का आवंटन करना या उन्हें शंकराचार्य के रूप में मान्यता देना सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट की अवहेलना मानी जाएगी. इसी विधिक जटिलता के कारण प्रशासन ने माघ मेले में उनके द्वारा किए जा रहे प्रचार-प्रसार और 'शंकराचार्य' शब्द के प्रयोग पर गंभीर आपत्ति जताई है.

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क्या है प्रशासन की मुख्य आपत्ति?

प्रशासन ने नोटिस में स्पष्ट किया है कि माघ मेला 2025-26 के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर में लगे बोर्डों पर उन्हें 'ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य' प्रदर्शित किया जा रहा है. नोटिस के अनुसार, "आपके इस कृत्य से माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश की अवहेलना दर्शित हो रही है." अब प्रशासन यह जानना चाहता है कि किस आधार पर वे खुद को इस पद पर प्रचारित कर रहे हैं. 24 घंटे की समयसीमा बीतने के बाद इस मामले में प्रशासन कड़ी कार्रवाई कर सकता है.

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